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जमीन उपलब्ध कराते ही केंद्र एनआईटी निर्माण के लिए दे देगा बजट
Updated Thu, 09 Nov 2017 10:38 PM IST
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श्रीनगर। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा कि एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी कैंपस के निर्माण के लिए बजट की कमी नहीं होगी, बशर्ते राज्य सरकार जल्द ही भूमि उपलब्ध कराए।
देवप्रयाग में आयोजित कार्यक्रम के बाद एचआरडी मंत्री श्रीनगर स्थित एनआईटी के अस्थायी कैंपस में पहुंचे थे। यहां उन्होंने एनआईटी व स्थानीय प्रशासन से भूमि की जानकारी ली। एनआईटी के नवनियुक्त निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि सुमाड़ी मेें भूमि चयनित की गई है, लेकिन वहां बादल फटने का खतरा बताया गया है। इस मौके पर केंद्रीय गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने अनुरोध किया कि वर्ष 2013 की आपदा से चौरास स्टेडियम ध्वस्त हो गया था। सुरक्षा दीवार का आधा निर्माण हुआ है। स्टेडियम की सुरक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने एनआईटी प्रेक्षागृह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक अब बहुत विकसित हो गई है। स्थायी कैंपस के लिए जरूरी नहीं है कि 300 एकड़ भूमि की जरूरत हो। पहाड़ में 50 एकड़ में भी संस्थान का निर्माण हो सकता है। इस पर छात्र हूटिंग करते हुए नो बोलने लगे। केंद्रीय मंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह को बड़ी जगह उपलब्ध कराने को कहा। इस मौके पर विधायक देवप्रयाग विनोद कंडारी, एनआईटी के कुलसचिव सुखपाल सिंह व तहसीलदार सुनीलराज आदि मौजूद थे।
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केंद्रीय राज्य मंत्री ने रखी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की आधारशिला
23 एकड़ भूमि पर 92 करोड़ की लागत से परिसर का निर्माण कार्य हुआ शुरू
2019 तक पूरा होगा परिसर का निर्माण कार्य
उच्च शिक्षा में शुरू होंगे 300 आनलाइन कोर्स
अमर उजाला ब्यूरो
देवप्रयाग। मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने 92 करोड़ की लागत के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान परिसर की आधारशिला रखी। 2019 तक परिसर का निर्माण पूरा होगा। मंत्री ने कहा कि वह उत्तराखंड मेें संस्कृत को द्वितीय नहीं बल्कि प्रथम राजभाषा के रुप में देखना चाहते है। उन्होंने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 300 ऑनलाइन कोर्स शुरू किए जाने की बात कही।
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बुधवार को मानव संसाधन राज्यमंत्री डा.सत्यपाल सिंह ने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की आधारशिला रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा संस्कृत भाषा ही सभी भाषाओं की जननी है। आने वाला समय संस्कृत का होगा। कार्यक्रम में विधायक विनोद कंडारी की ओर से देवप्रयाग और कीर्तिनगर में केंद्रीय विद्यालय खोलने की भी मांग की गई, जिस पर उन्होंने विधायक से प्रस्ताव भेजने को कहा। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने पहाड़ों में एनआईटी, डीम्ड विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के खोले जाने की जरूरत बताई। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बारायूदु, पौड़ी विधायक मुकेश कोली, सहित संस्थान के शिक्षकों व छात्रों ने मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में संस्थान की ओर से प्रकाशित ग्रंथों और पत्रिकाओं का भी केंद्रीय राज्य मंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में आरपी यादव, आरसी शर्मा, एसएस रावत, डा. आर बालमुर्गन, डा. मुकेश शर्मा, डा. वीरेंद्र बत्र्ववाल, डा. मनीष, डा. बनमाली, डा. शैलेन्द्र उनियाल, डा. अरविंद गौड़, डा. प्रफुल गढ़पाल आदि मौजूद थे।
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शिलान्यास के बाद परिसर में निर्माण कार्य शुरू
देवप्रयाग। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्रीरघुनाथ परिसर का विधिवत शिलान्यास होने के बाद यहां छात्रावास, प्रशासनिक व शैक्षिक भवन सहित आडिटोरियम और पुस्तकालय का विधिवत निर्माण शुरू हो गया है। गंगातट से सटे नृसिंगा पर्वत की 23 एकड़ भूमि में 92 करोड़ की लागत से परिसर का निर्माण किया जाएगा। केंद्रीय लोनिवि के मुख्य अभियंता एससी भारद्वाज ने बताया कि यहां 590 विद्यार्थियों का छात्रावास बनेगा, जिसमें 295 बालक 295 बालिका रहेंगे। निर्माण के प्रथम चरण में 10 कक्षा कक्षों का निर्माण शुरू कर दिया गया है । परिसर का निर्माण वर्ष 2019 तक पूरा किया जाएगा।
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देवप्रयाग में आयोजित कार्यक्रम के बाद एचआरडी मंत्री श्रीनगर स्थित एनआईटी के अस्थायी कैंपस में पहुंचे थे। यहां उन्होंने एनआईटी व स्थानीय प्रशासन से भूमि की जानकारी ली। एनआईटी के नवनियुक्त निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि सुमाड़ी मेें भूमि चयनित की गई है, लेकिन वहां बादल फटने का खतरा बताया गया है। इस मौके पर केंद्रीय गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. जेएल कौल ने अनुरोध किया कि वर्ष 2013 की आपदा से चौरास स्टेडियम ध्वस्त हो गया था। सुरक्षा दीवार का आधा निर्माण हुआ है। स्टेडियम की सुरक्षा के लिए 50 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने एनआईटी प्रेक्षागृह में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि तकनीक अब बहुत विकसित हो गई है। स्थायी कैंपस के लिए जरूरी नहीं है कि 300 एकड़ भूमि की जरूरत हो। पहाड़ में 50 एकड़ में भी संस्थान का निर्माण हो सकता है। इस पर छात्र हूटिंग करते हुए नो बोलने लगे। केंद्रीय मंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह को बड़ी जगह उपलब्ध कराने को कहा। इस मौके पर विधायक देवप्रयाग विनोद कंडारी, एनआईटी के कुलसचिव सुखपाल सिंह व तहसीलदार सुनीलराज आदि मौजूद थे।
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केंद्रीय राज्य मंत्री ने रखी राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की आधारशिला
23 एकड़ भूमि पर 92 करोड़ की लागत से परिसर का निर्माण कार्य हुआ शुरू
2019 तक पूरा होगा परिसर का निर्माण कार्य
उच्च शिक्षा में शुरू होंगे 300 आनलाइन कोर्स
अमर उजाला ब्यूरो
देवप्रयाग। मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह ने 92 करोड़ की लागत के राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान परिसर की आधारशिला रखी। 2019 तक परिसर का निर्माण पूरा होगा। मंत्री ने कहा कि वह उत्तराखंड मेें संस्कृत को द्वितीय नहीं बल्कि प्रथम राजभाषा के रुप में देखना चाहते है। उन्होंने उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 300 ऑनलाइन कोर्स शुरू किए जाने की बात कही।
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बुधवार को मानव संसाधन राज्यमंत्री डा.सत्यपाल सिंह ने राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की आधारशिला रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा संस्कृत भाषा ही सभी भाषाओं की जननी है। आने वाला समय संस्कृत का होगा। कार्यक्रम में विधायक विनोद कंडारी की ओर से देवप्रयाग और कीर्तिनगर में केंद्रीय विद्यालय खोलने की भी मांग की गई, जिस पर उन्होंने विधायक से प्रस्ताव भेजने को कहा। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डा. धन सिंह रावत ने पहाड़ों में एनआईटी, डीम्ड विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के खोले जाने की जरूरत बताई। इस मौके पर प्राचार्य प्रो. केबी सुब्बारायूदु, पौड़ी विधायक मुकेश कोली, सहित संस्थान के शिक्षकों व छात्रों ने मंत्री का स्वागत किया। कार्यक्रम में संस्थान की ओर से प्रकाशित ग्रंथों और पत्रिकाओं का भी केंद्रीय राज्य मंत्री द्वारा लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में आरपी यादव, आरसी शर्मा, एसएस रावत, डा. आर बालमुर्गन, डा. मुकेश शर्मा, डा. वीरेंद्र बत्र्ववाल, डा. मनीष, डा. बनमाली, डा. शैलेन्द्र उनियाल, डा. अरविंद गौड़, डा. प्रफुल गढ़पाल आदि मौजूद थे।
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शिलान्यास के बाद परिसर में निर्माण कार्य शुरू
देवप्रयाग। राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के श्रीरघुनाथ परिसर का विधिवत शिलान्यास होने के बाद यहां छात्रावास, प्रशासनिक व शैक्षिक भवन सहित आडिटोरियम और पुस्तकालय का विधिवत निर्माण शुरू हो गया है। गंगातट से सटे नृसिंगा पर्वत की 23 एकड़ भूमि में 92 करोड़ की लागत से परिसर का निर्माण किया जाएगा। केंद्रीय लोनिवि के मुख्य अभियंता एससी भारद्वाज ने बताया कि यहां 590 विद्यार्थियों का छात्रावास बनेगा, जिसमें 295 बालक 295 बालिका रहेंगे। निर्माण के प्रथम चरण में 10 कक्षा कक्षों का निर्माण शुरू कर दिया गया है । परिसर का निर्माण वर्ष 2019 तक पूरा किया जाएगा।