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कुंभनगरी पर मंडराती रही आतंक की काली छाया
Updated Mon, 06 Nov 2017 10:35 PM IST
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कुणाल दरगन
हरिद्वार।
कुंभनगरी को खून से लाल कर देने की साजिश पर से समय- समय पर पर्दा उठता रहा है। वर्ष 2016 में हुए अर्द्धकुंभ में खून की नदी बहा देने की साजिश रुड़की से सटे लंढौरा कस्बे के चार युवकों ने रची ही थी। कुंभ और अर्द्धकुंभ हमेशा से आतंकी संगठनों के निशाने पर रहे हैं।
जैश ए मोहम्मद, लश्कर एक तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन सरीखे आतंकी संगठनों के कमांडरों के नाम से पत्र यहां मिलते रहे हैं। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रहे एस गोस्वामी, शांतिकुंज, रामलीला भवन, रुडकी के धर्माचार्यों के नाम कई बार ऐसे पत्र भेजे गए। उत्तराखंड के तीर्थस्थलों के अलावा प्रमुख शहरों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक को बम से उड़ा देने की धमकी दी गई। बावजूद इसके पत्रों के बारे में आईबी, एलआईयू, स्पेशल ब्रांच से लेकर सिविल पुलिस, एसओजी तक नहीं पता कर पाई। यही नहीं कुंभनगरी को दहलाने की नापाक साजिश भी हुई हैं। पिछले वर्ष दिल्ली स्पेशल सेल, आईबी ने लंढौरा के जिन चार युवकों को आईएसआईएस के संदिग्ध मॉड्यूल के तौर पर दबोचा था, उनके निशाने पर हरकी पैड़ी थी। वे रैकी भी कर चुके थे। पर, सुरक्षा व्यवस्था देखकर उनके हाथ पांव फूल गए थे। फिर उन्होंने लंढौरा के पास ही रेलवे ट्रेक उड़ाने की तैयारी कर ली थी, पर तब तक वो धरे गए। बकायदा माचिस की तीलियों से बारूद भी बड़ी मात्रा में जमा कर लिया था।
वर्ष 2004 के अर्द्धकुंभ, 2010 के कुंभ, 2016 के अर्द्धकुंभ में भी हरिद्वार रुडकी से आतंकी हत्थे चढ़े हैं। हरिद्वार में एक बार आरडीएस भी भारी मात्रा में बरामद हुआ था तो शिवाजी पैलेस भी हुए बम विस्फोट की याद कई आमजन के जेहन में ताजा है। हरिद्वार- रुडकी हाईवे पर आतंकियों द्वारा बस पर की गई गोलीबारी से लेकर लक्सर में ट्रेन में हुए आतंकी हमले से भी हर कोई परिचित है। आतंकी संगठन हरिद्वार को वे सॉफ्ट टॉरगेट मानते है।
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बिजनौर में ठहरे आतंकियों ने की थी रैकी
बिजनौर में बम बनाते वक्त सिलेंडर में विस्फोट होने के बाद फरार हुए खांडवा मध्यप्रदेश के पांच आतंकियों ने हरिद्वार में भी शरण ली थी। वे पहले भी यहां रैकी कर चुके थे। बकायदा ट्रेन से आए गए थे। हरिद्वार में कार खरीदने की कोशिश भी हुई थी। बिजनौर से फरार होने के बाद भी वे हरिद्वार की सीमा पर ही जंगल में छिपे रहे थे। फिर उन्होंने दक्षिण भारत का रुख किया था। उन्हें उड़ीसा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। फिर जब वे मध्यप्रदेश के भोपाल से जेल ब्रेक कर भागे थे तब पुलिस ने उन्हें मुठभेड़ में ढहा दिया था।
हरिद्वार।
कुंभनगरी को खून से लाल कर देने की साजिश पर से समय- समय पर पर्दा उठता रहा है। वर्ष 2016 में हुए अर्द्धकुंभ में खून की नदी बहा देने की साजिश रुड़की से सटे लंढौरा कस्बे के चार युवकों ने रची ही थी। कुंभ और अर्द्धकुंभ हमेशा से आतंकी संगठनों के निशाने पर रहे हैं।
जैश ए मोहम्मद, लश्कर एक तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन सरीखे आतंकी संगठनों के कमांडरों के नाम से पत्र यहां मिलते रहे हैं। रेलवे स्टेशन के अधीक्षक रहे एस गोस्वामी, शांतिकुंज, रामलीला भवन, रुडकी के धर्माचार्यों के नाम कई बार ऐसे पत्र भेजे गए। उत्तराखंड के तीर्थस्थलों के अलावा प्रमुख शहरों से लेकर मुख्यमंत्रियों तक को बम से उड़ा देने की धमकी दी गई। बावजूद इसके पत्रों के बारे में आईबी, एलआईयू, स्पेशल ब्रांच से लेकर सिविल पुलिस, एसओजी तक नहीं पता कर पाई। यही नहीं कुंभनगरी को दहलाने की नापाक साजिश भी हुई हैं। पिछले वर्ष दिल्ली स्पेशल सेल, आईबी ने लंढौरा के जिन चार युवकों को आईएसआईएस के संदिग्ध मॉड्यूल के तौर पर दबोचा था, उनके निशाने पर हरकी पैड़ी थी। वे रैकी भी कर चुके थे। पर, सुरक्षा व्यवस्था देखकर उनके हाथ पांव फूल गए थे। फिर उन्होंने लंढौरा के पास ही रेलवे ट्रेक उड़ाने की तैयारी कर ली थी, पर तब तक वो धरे गए। बकायदा माचिस की तीलियों से बारूद भी बड़ी मात्रा में जमा कर लिया था।
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वर्ष 2004 के अर्द्धकुंभ, 2010 के कुंभ, 2016 के अर्द्धकुंभ में भी हरिद्वार रुडकी से आतंकी हत्थे चढ़े हैं। हरिद्वार में एक बार आरडीएस भी भारी मात्रा में बरामद हुआ था तो शिवाजी पैलेस भी हुए बम विस्फोट की याद कई आमजन के जेहन में ताजा है। हरिद्वार- रुडकी हाईवे पर आतंकियों द्वारा बस पर की गई गोलीबारी से लेकर लक्सर में ट्रेन में हुए आतंकी हमले से भी हर कोई परिचित है। आतंकी संगठन हरिद्वार को वे सॉफ्ट टॉरगेट मानते है।
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बिजनौर में ठहरे आतंकियों ने की थी रैकी
बिजनौर में बम बनाते वक्त सिलेंडर में विस्फोट होने के बाद फरार हुए खांडवा मध्यप्रदेश के पांच आतंकियों ने हरिद्वार में भी शरण ली थी। वे पहले भी यहां रैकी कर चुके थे। बकायदा ट्रेन से आए गए थे। हरिद्वार में कार खरीदने की कोशिश भी हुई थी। बिजनौर से फरार होने के बाद भी वे हरिद्वार की सीमा पर ही जंगल में छिपे रहे थे। फिर उन्होंने दक्षिण भारत का रुख किया था। उन्हें उड़ीसा पुलिस ने गिरफ्तार किया था। फिर जब वे मध्यप्रदेश के भोपाल से जेल ब्रेक कर भागे थे तब पुलिस ने उन्हें मुठभेड़ में ढहा दिया था।