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सिरदर्द बना हरिद्वार का जिलाध्यक्ष

Mon, 16 Oct 2017 10:47 PM IST
Updated Mon, 16 Oct 2017 10:47 PM IST
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सिरदर्द बना हरिद्वार का जिलाध्यक्ष

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राजेश शर्मा
हरिद्वार।
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश हाईकमान के लिए हरिद्वार का जिलाध्यक्ष चुनना एक बार फिर मुश्किल भरा निर्णय बन गया है। तमाम नेता इस पद के दावेदार हैं ऐसे में वर्तमान जिलाध्यक्ष डॉ. जयपाल सिंह को ही एक बार फिर जिम्मेदारी मिलने की संभावना बनती दिख रही है। जयपाल सिंह पर सांसद निशंक के गुट का होने का ठप्पा लगा है, लेकिन इनकी सहज उपलब्धता और कार्यकर्ताओं में उनकी अच्छी पैठ का लाभ डॉ. जयपाल को मिल सकता है।
हरिद्वार जिले में भाजपा के अभी तक दो संगठनात्मक जिले हरिद्वार और रुड़की होते थे। हरिद्वार में डॉ. जयपाल सिंह चौहान और रुड़की में कल्पना सैनी के पास जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी रही है ,लेकिन पिछले महीने उत्तराखंड के दौरे पर आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने संगठन में नई व्यवस्था लागू करते हुए हरिद्वार जिले में एक ही संगठनात्मक जिला बना दिया है। यह व्यवस्था कई और जिलों में भी लागू की गई है। प्रदेश हाईकमान ने अन्य जिलों के जिलाध्यक्षों की घोषणा तो कर दी है लेकिन हरिद्वार के लिए जिलाध्यक्ष की घोषणा अभी नहीं हो सकी।
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सूत्रों की मानें तो जिलाध्यक्ष की घोषणा शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक तथा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक के गुटों के आमने-सामने आ जाने से रुक गई है। प्रदेश में सरकार होने के कारण भाजपा के कई नेता जिलाध्यक्ष का पद पाने के इच्छुक हैं इनमें निशंक गुट के ओमप्रकाश जमदग्रि, के अलावा मौजूदा जिलाध्यक्ष जयपाल सिंह, राकेश गिरि, विधायक आदेश चौहान, कल्पना सैनी, रुड़की के आदेश सैनी, अजय सैनी के साथ ही जिला उपाध्यक्ष नरेश शर्मा, विकास तिवारी, पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश राजपूत तथा सुशील चौहान समेत कई अन्य नेताओं के नाम चले लेकिन दोनों गुटों की किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पाने के कारण अभी घोषणा रोक दी गई।
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सूत्रों की मानें तो तमाम गतिरोध के बीच संयुक्त जिले के अध्यक्ष की जिम्मेदारी वर्तमान अध्यक्ष डॉ. जयपाल सिंह को ही दी जा सकती है। सूत्रों की मानें तो हाईकमान ने डॉ. जयपाल को इशारा किया है कि वे शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक और उनके समर्थक नेताओं को साध लें। निशंक गुट के समझे जाने वाले डॉ. जयपाल की कार्यकर्ताओं में सहज उपलब्धता और निर्विवाद छवि है। अपने करीब आठ महीने के कार्यकाल में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दो बार राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के कार्यक्रम कराने के साथ ही कई विवाद भी सफलतापूर्वक निपटाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। कुछ मामलो को लेकर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक उनसे नाराज बताए जाते हैं। डॉ. जयपाल सिंह का कहना है कि पार्टी हाईकमान का जो भी निर्णय होगा वह उन्हें मान्य है।
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