{"_id":"59e4e89b4f1c1bcc538b7b50","slug":"150817404711-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यम दीपक से यम पूजा तक पांच महापर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यम दीपक से यम पूजा तक पांच महापर्व
Updated Mon, 16 Oct 2017 10:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कौशल सिखौला
हरिद्वार।
लगातार पांच दिन चलने वाले पांच दिनी महापर्व मंगलवार से शुरू हो रहे हैं। उत्तरा फाल्गुनी से शुरू हो रहे पर्वों का समापन स्वाति नक्षत्र में होगा। इन दिनों में यम पूजा से लेकर कृष्ण, विष्णु, महालक्ष्मी, बजरंग बली, धनवंतरि आदि की आराधना की जाएगी। ब्रह्मांड में यक्ष गंर्धव गीत गाएंगे तथा देव बालाओं के साथ अप्सराएं नृत्य करेंगी। कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाली देवी दीपावली भी इन्हीं दिनों में शुरू हो जाएगी।
त्योहारों और खुशियों के मिलन से भरे इस देश में अन्यत्र कभी भी पांच पर्व एक साथ नहीं पड़ते। केवल यही ऐसा अवसर है, जब धरती वासियों के साथ- साथ देवलोक वासियों को भी उत्सव मनाने का अवसर मिलता है। मंगलवार से प्रारंभ हो रहे पर्व देवोत्थान पर्व से होते हुए कार्तिक पूर्णिमा के महास्नान तक पहुंचेंगे। शुरुआत मंगलवार को औषध रूपी अमृत कलश हाथ में लिए हुए भगवान धनवंतरि की पूजा से होगा। इसी दिन देवों और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान धनवंतरि आरोग्य कलश लेकर धरती पर अवतरित हुए थे। समूचा आयुर्वेद जगत उनका गुणगान करेगा और पर्व के पहले दिन यमराज के निमित्त एक यम दीपक घरों के प्रवेश द्वार पर जलाया जाएगा। अगले दिन हनुमान जयंती मनेगी तथा छोटी दीपावली का पर्व मनेगा। यह वही दिन है जब भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। हनुमान के मंदिरों में रोट चढ़ाने की परंपरा पुराने जमाने से चली आ रही है। तीसरे दिन महालक्ष्मी पूजन का दीपावली महापर्व मनेगा। चौथा दिन भगवान कृष्ण द्वारा उंगली पर उठाए गए गोवर्धन पर्वत और उसकी पूजा के नाम रहेगा। उसी दिन श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाकर अन्कूट पर्व मनाया जाएगा। पांचवा दिन भाई और बहन के मिलन का दिन है। यह वहीं दिन है जब जमुना ने अपने भाई यमराज को तिलक कर दुनिया की सभी बहनों के लिए सौभाग्य मांगा था। भैयादूज के पर्व पर पांच दिनी पर्वों का समापन हो जाएगा। यद्यपि बाद में श्रीकृष्ण का गोपाष्टमी और देव जागरण का हरि प्रबोधिनी पर्व आएगा। इस पर्व से विवाहों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा। वर्ष के पर्वों का समापन कार्तिक पूर्णिमा से होगा। जिस पर समूचे आकाश में देव दीपावली मनाई जाएगी।
विज्ञापन
उत्सवों के इस देश में अनेक पर्व हैं, लघु पर्व हैं, महापर्व हैं और स्नान पर्व हैं। देवी देवताओं से जुड़े पर्वों के साथ साथ क्षेत्रिय पर्वों की भी बहुत आयत है। वास्तव में यह देश खुशियों का ही देश है, जिसमें सर्वत्र मंगल मनाया जाता है। होली और दीपावली दो पर्वों को महापर्वों से भी ऊपर अति महापर्व कहा गया है। ये पर्व सांस्कृतिक विरासत तथा इन सभी का ऋतु परिवर्तन से सीधा रिश्ता है। ऋतुओं के ये पर्व भारत में ही नहीं समूचे संसार में मनाए जाते हैं। संसार में इन पर्वों को अलग अलग नाम दिया गया है। एक बात सत्य है कि सभी पर्व सूर्य और चंद्र की गिनती पर आधारित हैं। पांच दिनी पर्वों का खुमार इस समय पूरे देश पर चढ़ा हुआ है। भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में धरती का कण कण आनंद मना रहा है।
विज्ञापन