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गंगा बंदी से ठप्प हुआ हरिद्वार का बंगाली सीजन
Updated Mon, 02 Oct 2017 11:03 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दशहरे से दीपावली के बीच गंगा क्लोजर का असर अब हरिद्वार के बंगाली सीजन पर पड़ रहा है। इस बार भी तीन दिन के अवकाश एक साथ न आए होते तो यह सीजन खाली चला जाता। हरिद्वार के बाजार में चार- पांच दिन के अलावा कोई खास खरीदारी इस बार नहीं हुई है। इकट्ठा किया गया ऊनी वस्त्रों का सामान भी दुकानों में भरा हुआ है।
उत्तराखंड बनने से पहले गंगा क्लोजर पर्व के दिनों में नहीं होता था। तब पहली सितंबर से ही बंगालियों का अवागमन बड़े पैमाने पर शुरू हो जाता था। लाखों बंगाली यात्री गंगा फेसिंग होटलों धर्मशालाओं को प्राथमिकताएं देते। यद्यपि बंगालियों का कर्मकांड आदि से विशेष रिश्ता नहीं है, किंतु गंगा के प्रति उनमे अपार प्रेम है। वे ही नहीं ओड़ीसा और त्रिपुरा के यात्री भी इसी सीजन में हरिद्वार आते थे। दशहरे पर क्लोजर करने की नई परंपरा शुरू होने के बाद यात्रियों ने गंगा विहीन नगरी को तिलांजलि दे दी। अब बंगाली यात्रियों का गढ़ ऋषिकेश बन गया है, जहां कभी भी क्लोजर नहीं होता। एक दिन के लिए बंगाली यात्री ऋषिकेश से उसी प्रकार हरिद्वार घूमने आते हैं, जिस प्रकार पहले हरिद्वार से ऋषिकेश जाया करते थे। सितंबर का पूरा महीना ही लगभग खाली चला गया। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी व्यापारी और विभिन्न संस्थाओं ने प्रदर्शन किया, जिसका कोई संज्ञान दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग ने नहीं लिया। वह तो तीन दिनों का अवकाश सीजन चल निकला तथा हरिद्वार में भारी भीड़ पहुंच गई। इससे हरिद्वार के व्यापार और होटल जगत ने कुछ राहत की सांस ली।
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प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री कैलाश केसवानी के अनुसार हर साल प्रदर्शन करने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। व्यापार मंडल विचार कर रहा है कि इस संबंध में अब उच्चतम न्यायालय में श्रद्धा के अधिकार को लेकर जनहित याचिका दायर की जाए। गंगा सभा के महामंत्री रामकुमार मिश्रा ने बताया कि कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखे जा चुके है। अखिल भारतीय पुरोहित महासभा ने एक प्रतिनिधि मंडल के साथ लखनऊ जाकर योगी आदित्यनाथ से भी भेट की। इसके बावजूद पर्व काल में ही गंगा क्लोजर कर दिया गया। इसका असर बंगाली यात्रियों के आगमन पर खासा पड़ा है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशुतोष शर्मा बताते हैं कि होटल कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दो महीनों तक खचाखच भरे रहने वाले होटल दो चार कमरों के अलाव अब खाली ही पड़े रहते हैं। यहीं हाल धर्मशालाओं का भी हैं। बाजारों में ऊनी वस्त्रों की बिक्री एक तरफा घट गई है। सभी ने मांग की है कि गंगा क्लोजर कार्तिक पूर्णिमा के बाद किया जाए।
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