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गैंडा कौथिक देखने के लिए उमड़ी भी
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:23 PM IST
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नारायणबगड़। सिमली (बधाण) गांव में चल रहे पांडव नृत्य के सातवें दिन गैंडा कौथिक का मंचन किया गा। इसे देखने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण आए।
पांडव मंदिर में आचार्य नंद राम सती ने वेदोमंत्रोचारण और पंचांग पूजा के साथ पांडव देवताओं की पूजा की। मीम सेन (पांडु पुत्र) द्वारा पांडु के श्राद्ध के लिए सात समुद्रों का जल लाया गया। जागरी राजेंद्र सिंह ने महाभारत की कथा को जागर विधा में गाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पांडव के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद पश्वा पांडव पुत्र अर्जुन ने धनुष से गैंडे का वध किया। श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप गैंडे की आकृति में प्रयोग की सामग्री वितरित की गई। मेला समिति के अध्यक्ष चंद्र सिंह बुटोला ने बताया कि महाभारत की कथानुसार पांडव पुत्रों को अपने पिता पांडु के श्राद्ध में तर्पण के लिए गैंडे के सींग की आवश्यकता होती है। ग्रामीणों ने चेपड़ी मिट्टी, सीताफल (कददू) तथा लौकी की सहायता से गैंडे की विशाल आकृति बनाई थी। इस मौके पर आयोजन समिति की संयोजक और ग्राम प्रधान गोदांबरी, जयवीर सिंह बुटोला, जयपाल सिंह, चंद्र सिंह नेगी, देवेंद्र बुटोला, पंचम सिंह रावत आदि मौजूद थे।
पांडव मंदिर में आचार्य नंद राम सती ने वेदोमंत्रोचारण और पंचांग पूजा के साथ पांडव देवताओं की पूजा की। मीम सेन (पांडु पुत्र) द्वारा पांडु के श्राद्ध के लिए सात समुद्रों का जल लाया गया। जागरी राजेंद्र सिंह ने महाभारत की कथा को जागर विधा में गाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। पांडव के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इसके बाद पश्वा पांडव पुत्र अर्जुन ने धनुष से गैंडे का वध किया। श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप गैंडे की आकृति में प्रयोग की सामग्री वितरित की गई। मेला समिति के अध्यक्ष चंद्र सिंह बुटोला ने बताया कि महाभारत की कथानुसार पांडव पुत्रों को अपने पिता पांडु के श्राद्ध में तर्पण के लिए गैंडे के सींग की आवश्यकता होती है। ग्रामीणों ने चेपड़ी मिट्टी, सीताफल (कददू) तथा लौकी की सहायता से गैंडे की विशाल आकृति बनाई थी। इस मौके पर आयोजन समिति की संयोजक और ग्राम प्रधान गोदांबरी, जयवीर सिंह बुटोला, जयपाल सिंह, चंद्र सिंह नेगी, देवेंद्र बुटोला, पंचम सिंह रावत आदि मौजूद थे।