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परियोजना झील बनी मुसीबत
Updated Sun, 24 Sep 2017 10:35 PM IST
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श्रीनगर। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की वजह से जल संस्थान की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। परियोजना झील से एक साथ भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने की वजह से अलकनंदा नदी के पानी में मलबा आ रहा है। इस वजह से जल संस्थान के पंप काम नहीं कर पा रहे हैं। पंपों के बंद होने से जिला मुख्यालय पौड़ी, श्रीनगर और श्रीकोट गंगानाली की पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।
वर्ष 2015 में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना शुरू होने के बाद कोटेश्वर से नीचे श्रीनगर तक लगभग 5 किमी के हिस्से में पेयजल किल्लत और दूषित पेयजल आपूर्ति की समस्या बढ़ गई है। हालांकि परियोजना संचालन कर रही कंपनी ने झील से जल संस्थान के पंपों तक योजना बिछाने की जिम्मेदारी ली है, लेकिन इसके लिए जल निगम को पर्याप्त बजट न दिए जाने के चलते यह योजना अधर में लटकी हुई है। परियोजना के शुरू होने से शीतकाल और ग्रीष्मकाल में अलकनंदा नदी मेें पानी का प्रवाह कम होने पर पेयजल संकट हो जाता है। साथ ही गंदे पानी की आपूर्ति होती है। वहीं बरसात मेें गंदले पानी से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। दरअसल, बारिश होने पर परियोजना झील के गेट खोल दिए जाते हैं, जिससे झील मेें एकत्र मलबा भारी वेग से पंप हाउस तक पहुंच जाता है। इस वजह से संस्थान को पंप बंद करने पड़ते हैं। पंपों के न चलने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है।
रविवार को 20 मिनट आया पानी
श्रीनगर। रविवार सुबह श्रीनगर और श्रीकोट में लगभग 20 मिनट ही पेयजल आपूर्ति हुई। वहीं पानी भी गंदला आ रहा है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला, विजयराम भट्ट व भागवत पांडे का कहना है कि परियोजना की वजह से जनता परेशानी झेल रही है।
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पंप करने पड़े बंद
झील से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। पानी में ज्यादा सिल्ट आने से पंप चोक हो जाते हैं। इसके अलावा फिल्टर भी इतनी सिल्ट साफ नहीं कर पाते हैं। इस वजह से पंप बंद करने पड़े।
विनोद भट्ट, अवर अभियंता जल संस्थान श्रीनगर
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वर्ष 2015 में श्रीनगर जल विद्युत परियोजना शुरू होने के बाद कोटेश्वर से नीचे श्रीनगर तक लगभग 5 किमी के हिस्से में पेयजल किल्लत और दूषित पेयजल आपूर्ति की समस्या बढ़ गई है। हालांकि परियोजना संचालन कर रही कंपनी ने झील से जल संस्थान के पंपों तक योजना बिछाने की जिम्मेदारी ली है, लेकिन इसके लिए जल निगम को पर्याप्त बजट न दिए जाने के चलते यह योजना अधर में लटकी हुई है। परियोजना के शुरू होने से शीतकाल और ग्रीष्मकाल में अलकनंदा नदी मेें पानी का प्रवाह कम होने पर पेयजल संकट हो जाता है। साथ ही गंदे पानी की आपूर्ति होती है। वहीं बरसात मेें गंदले पानी से पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। दरअसल, बारिश होने पर परियोजना झील के गेट खोल दिए जाते हैं, जिससे झील मेें एकत्र मलबा भारी वेग से पंप हाउस तक पहुंच जाता है। इस वजह से संस्थान को पंप बंद करने पड़ते हैं। पंपों के न चलने से पेयजल आपूर्ति बाधित हो जाती है।
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रविवार को 20 मिनट आया पानी
श्रीनगर। रविवार सुबह श्रीनगर और श्रीकोट में लगभग 20 मिनट ही पेयजल आपूर्ति हुई। वहीं पानी भी गंदला आ रहा है। जिला पंचायत सदस्य प्रकाश बुटोला, विजयराम भट्ट व भागवत पांडे का कहना है कि परियोजना की वजह से जनता परेशानी झेल रही है।
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पंप करने पड़े बंद
झील से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया। पानी में ज्यादा सिल्ट आने से पंप चोक हो जाते हैं। इसके अलावा फिल्टर भी इतनी सिल्ट साफ नहीं कर पाते हैं। इस वजह से पंप बंद करने पड़े।
विनोद भट्ट, अवर अभियंता जल संस्थान श्रीनगर