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वार्ड नंबर 6: विकास की राह ताकती ब्रह्मपुरी
Updated Mon, 11 Sep 2017 10:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
वार्ड नंबर 6 ब्रह्मपुरी में जनपद के सभी अस्पताल, नगर कोतवाली, मनसा देवी समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल होने से यहां विकास कार्यों पर जोर रहता है। बावजूद इसके क्षेत्र में सीवर लाइन, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। वार्डों में सबसे बड़ी समस्या नालों की साफ-सफाई न होने और बारिश में पूरा वार्ड क्षेत्र पहाड़ों से आई सिल्ट से बदरंग हो जाता है। पार्षद अपने क्षेत्र में अस्पताल जैसी व्यवस्था होने की बात करते हैं, लेकिन अस्पतालों में अव्यवस्था होने पर कभी आवाज नहीं उठाई।
वार्ड नंबर 6 में भाजपा पार्षद विजय शर्मा है। वार्ड में ब्रह्मपुरी, काशीपुरा, जोगिया मंडी, भूरे की खोल, हाथी खाना, नाथों की गलिया, जोगीवाड़ा, बिल्केश्वर मंदिर, मेला, जिला एवं महिला अस्पताल, नगर कोतवाली, मा मनसा देवी है। वार्ड में करीब 8 हजार मतदाता है। वार्ड में अधिकांश लोग वन विभाग की भूमि पर कब्जा कर बसेे हुए हैं, लेकिन इनके लिए सीवर, पेयजल की समुचित व्यवस्था की हुई है। कुछ क्षेत्रों में पुरानी सीवर लाइन होने से सीवर ओवर फ्लो हो जाता है। पार्षद की मानें तो जहां पर सीवर लाइन की समस्या दूर करने के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या बारिश के दौरान पहाड़ों से आने वाली सिल्ट है। सिल्ट आने से अपर रोड क्षेत्र के साथ अन्य कालोनी पूरी तरह से बदरंग हो जाती है। वार्ड नंबर पांच और छह के मुख्य मार्ग रेलवे ट्रैक के नीचे बने पुल पर पूरे साल सीवर और पानी बहने की समस्या से निजात नहीं मिल सकी। इसी पुल के पास ब्रह्मपुरी का पूरा कूड़ा डाल दिया जाता है। ऐसे में मनसा देवी के साथ बिल्वकेश्वर मंदिर पर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। जनपद के मुख्य अस्पताल मेला, जिला एवं महिला अस्पताल में डाक्टर हो न हो, या दवा गोली पूरी तरह से समाप्त हो जाती हो। पार्षद ने कभी इसके लिए आवाज नहीं उठाई। मेला अस्पताल बंद होने के कगार पर खड़ा है, लेकिन पार्षद को इस संबंध में कोई जानकारी तक नहीं है।
वर्जन
नगर निगम से करीब 20 लाख के बजट के साथ जिला योजना एवं विधायक निधि से काम कराए। किसी भी कालोनी में पानी एवं सीवर की समस्या नहीं है। पेंशन, राशन कार्ड बनवाने के साथ पथ प्रकाश की समुचित व्यवस्था कराई। पहाड़ों से बारिश के साथ सिल्ट आने से साफ सफाई का बुरा हाल हो जाता है। पुरानी सीवर लाइन और कुछ सड़क बनवाने के लिए नगर निगम के साथ विधायक को प्रस्ताव दिए हुए हैं। कालोनियों में किराएदारों के अधिक संख्या में रहने से बड़ी समस्या है। पहाड़ पर हुए कब्जों को नियमितीकरण कराने के लिए भी प्रस्ताव भेजा हुआ है।
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विजय शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 6।
पेंशन पिछले एक साल से नहीं मिल सकी है, जिसके लिए पार्षद के घर पर कई बार चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो सकी। इससे घर का काम नहीं चलाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य कुछ बुजुुर्गों की पेंशन ही नहीं बन सकी। राशन भी सही नहीं मिल पाता है।
मीना विश्वास, स्थानीय निवासी।
बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या बहुत अधिक है। ऐसे में पानी की आपूर्ति बाधित होने के बाद टैंकर आदि का कोई इंतजाम नहीं किया जाता। इसके अलावा रेलवे ट्रैक के नीचे सीवर बहने के साथ कूड़ा न उठने की बड़ी समस्या है। नालों की कभी सफाई नहीं होती है, ऐसे में गदंगी रुकने से बदबू रहती है।
राजेंद्र तेश्वर, स्थानीय निवासी।
क्षेत्र में तीन अस्पतालों के साथ ब्लडबैंक एवं टीबी अस्पताल है। इनके साथ स्वास्थ्य विभाग के आवास है। इन आवासों में तो पार्षद ने कभी आकर भी नहीं देखा, लेकिन अस्पतालों की अव्यवस्था के लिए पार्षद ने कभी अधिकारियों से पूछा तक नहीं। जबकि पार्षद से बड़ी उम्मीद की जाती है। पार्षद अपनी दुकान चलाने तक ही सीमित है।
मनोज चंद, स्थानीय निवासी।
हरिद्वार।
वार्ड नंबर 6 ब्रह्मपुरी में जनपद के सभी अस्पताल, नगर कोतवाली, मनसा देवी समेत अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल होने से यहां विकास कार्यों पर जोर रहता है। बावजूद इसके क्षेत्र में सीवर लाइन, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। वार्डों में सबसे बड़ी समस्या नालों की साफ-सफाई न होने और बारिश में पूरा वार्ड क्षेत्र पहाड़ों से आई सिल्ट से बदरंग हो जाता है। पार्षद अपने क्षेत्र में अस्पताल जैसी व्यवस्था होने की बात करते हैं, लेकिन अस्पतालों में अव्यवस्था होने पर कभी आवाज नहीं उठाई।
वार्ड नंबर 6 में भाजपा पार्षद विजय शर्मा है। वार्ड में ब्रह्मपुरी, काशीपुरा, जोगिया मंडी, भूरे की खोल, हाथी खाना, नाथों की गलिया, जोगीवाड़ा, बिल्केश्वर मंदिर, मेला, जिला एवं महिला अस्पताल, नगर कोतवाली, मा मनसा देवी है। वार्ड में करीब 8 हजार मतदाता है। वार्ड में अधिकांश लोग वन विभाग की भूमि पर कब्जा कर बसेे हुए हैं, लेकिन इनके लिए सीवर, पेयजल की समुचित व्यवस्था की हुई है। कुछ क्षेत्रों में पुरानी सीवर लाइन होने से सीवर ओवर फ्लो हो जाता है। पार्षद की मानें तो जहां पर सीवर लाइन की समस्या दूर करने के लिए प्रस्ताव भेज रखा है। क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या बारिश के दौरान पहाड़ों से आने वाली सिल्ट है। सिल्ट आने से अपर रोड क्षेत्र के साथ अन्य कालोनी पूरी तरह से बदरंग हो जाती है। वार्ड नंबर पांच और छह के मुख्य मार्ग रेलवे ट्रैक के नीचे बने पुल पर पूरे साल सीवर और पानी बहने की समस्या से निजात नहीं मिल सकी। इसी पुल के पास ब्रह्मपुरी का पूरा कूड़ा डाल दिया जाता है। ऐसे में मनसा देवी के साथ बिल्वकेश्वर मंदिर पर जाने वाले यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। जनपद के मुख्य अस्पताल मेला, जिला एवं महिला अस्पताल में डाक्टर हो न हो, या दवा गोली पूरी तरह से समाप्त हो जाती हो। पार्षद ने कभी इसके लिए आवाज नहीं उठाई। मेला अस्पताल बंद होने के कगार पर खड़ा है, लेकिन पार्षद को इस संबंध में कोई जानकारी तक नहीं है।
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नगर निगम से करीब 20 लाख के बजट के साथ जिला योजना एवं विधायक निधि से काम कराए। किसी भी कालोनी में पानी एवं सीवर की समस्या नहीं है। पेंशन, राशन कार्ड बनवाने के साथ पथ प्रकाश की समुचित व्यवस्था कराई। पहाड़ों से बारिश के साथ सिल्ट आने से साफ सफाई का बुरा हाल हो जाता है। पुरानी सीवर लाइन और कुछ सड़क बनवाने के लिए नगर निगम के साथ विधायक को प्रस्ताव दिए हुए हैं। कालोनियों में किराएदारों के अधिक संख्या में रहने से बड़ी समस्या है। पहाड़ पर हुए कब्जों को नियमितीकरण कराने के लिए भी प्रस्ताव भेजा हुआ है।
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विजय शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 6।
पेंशन पिछले एक साल से नहीं मिल सकी है, जिसके लिए पार्षद के घर पर कई बार चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो सकी। इससे घर का काम नहीं चलाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य कुछ बुजुुर्गों की पेंशन ही नहीं बन सकी। राशन भी सही नहीं मिल पाता है।
मीना विश्वास, स्थानीय निवासी।
बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या बहुत अधिक है। ऐसे में पानी की आपूर्ति बाधित होने के बाद टैंकर आदि का कोई इंतजाम नहीं किया जाता। इसके अलावा रेलवे ट्रैक के नीचे सीवर बहने के साथ कूड़ा न उठने की बड़ी समस्या है। नालों की कभी सफाई नहीं होती है, ऐसे में गदंगी रुकने से बदबू रहती है।
राजेंद्र तेश्वर, स्थानीय निवासी।
क्षेत्र में तीन अस्पतालों के साथ ब्लडबैंक एवं टीबी अस्पताल है। इनके साथ स्वास्थ्य विभाग के आवास है। इन आवासों में तो पार्षद ने कभी आकर भी नहीं देखा, लेकिन अस्पतालों की अव्यवस्था के लिए पार्षद ने कभी अधिकारियों से पूछा तक नहीं। जबकि पार्षद से बड़ी उम्मीद की जाती है। पार्षद अपनी दुकान चलाने तक ही सीमित है।
मनोज चंद, स्थानीय निवासी।