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सड़क बनी, मगर ग्रामीण फकिर भी नाप रहे पगडंडियां

Sat, 09 Sep 2017 01:19 AM IST
Updated Sat, 09 Sep 2017 01:19 AM IST
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सड़क बनी, मगर ग्रामीण फकिर भी नाप रहे पगडंडियां
‘मेरी गांव मेरी सड़क’ योजना में अफसरों की मनमानी
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-- यमकेश्वर ब्लॉक के जुड्डा गांव में बनाई सड़क से ग्रामीणों को फायदा नहीं
-- डीपीआर में सड़क की लागत 80 लाख तो नोटिस में 35 लाख दर्शायी

हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश।
राज्य सरकार की ‘मेरी गांव मेरी सड़क’ योजना गांवों में मनमाने ढंग से लागू की जा रही है, जिससे योजना के जरिए गांवों को जोड़ने का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पौड़ी जिले के यमकेश्वर प्रखंड स्थित जुड्डा ग्राम सभा की मई 2015 में हुई खुली बैठक में गांव के जमरखोली तोक से गांव तक ‘मेरा गांव मेरी सड़क’ योजना के तहत सड़क निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। निर्माण एजेंसी ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग (आरइएस) द्वारा सड़क की कटिंग जमरखोली तोक की बजाए खैरखाल से कराई गई। इसके लिए बाकायदा ग्राम सभा के जिम्मेदार प्रतिनिधियों की ओर से विभाग को एनओसी जारी कर दी गई, जिसमें मूल प्रस्ताव में ग्रामीणों की सहमति की अनदेखी की गई।
स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो 800 मी. मार्ग कटिंग का कार्य के बाद निर्माण जुड्डा गांव के पंप हाउस पर रोक दिया गया है। जबकि स्वीकृत मार्ग व धनराशि एक किलोमीटर की है। जहां पर सड़क का कार्य रोका गया है, उक्त स्थान की दूरी गांव से आधा किमी.से अधिक है। ऐसे में जुड्डा के ग्रामीणों को मेरा गांव मेरी सड़क योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। लिहाजा उन्हें सड़क योजना के बावजूद पैदल नापना पड़ रहा है।
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सीसी वर्क हुआ नहीं, वेबरेटर की हो गई बिलिंग
जुड्डा गांव के आरटीआई कार्यकर्ता अनुसूया सिंह भंडारी द्वारा सूचना का अधिकार के तहत योजना की जानकारी मांगने पर ग्रामसभा व ब्लॉक कार्यालय द्वारा बताया गया है कि सड़क निर्माण कार्य में कंप्रेशर मशीन, वेबरेटर मशीन, डाइनामाइट का उपयोग किया गया है, जिसके हजारों रुपये के बिल भी भुगतान किए गए। जबकि भंडारी का कहना है कि सड़क पर न तो उक्त मशीनों का कहीं भी उपयोग नहीं हुआ, ऐसे में सवाल यह है कि मार्ग पर सीसी निर्माण नहीं हुआ तब कंप्रेशर व वेबरेटर मशीन का उपयोग कहां किया गया। मार्ग की डीपीआर 80 लाख की है, जबकि मौके पर चस्पा नोटिस में इसकी लागत 35 लाख दर्शायी गई है। केंद्रीय अंशदान से निर्माणाधीन राज्य सरकार की इस योजना का कार्य छह महीने में पूरा होना था, मगर मार्ग का निर्माण शुरू हुए साल भर हो चुके हैं, फिलहाल इसका कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
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सड़क बनने से पुराने रास्ते हुए बंद
आरटीआई कार्यकर्ता भंडारी ने बताया कि सड़क की कटिंग और मलबा गिराए जाने से गांव के मूल रास्ते बंद हो चुके हैं, जिससे आम रास्तों पर लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। उन्हें खेतों में पानी लगाने, घास-लकड़ी लेने के लिए आने जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
विभाग ने स्वीकृत सड़क के तहत निर्माण कार्य किया है। निर्माण में मूल प्रस्ताव में स्थान परिवर्तन किए जाने के लिए ग्रामसभा जिम्मेदार है। सड़क का कार्य पूरा हो चुका है। यह बात सही है कि सड़क से गांव नहीं जुड़ पाया है।

-- संजीव वर्मा, जेई आरईएस, यमकेश्वर ब्लॉक।

मूल प्रस्ताव के स्थल पर बरसाती नाले से सड़क की सुरक्षा के कारण कटिंग जमरखोली तोक की जगह खैरखाल से कराई गई। जिसकी दूरी करीब 80-90 मीटर है। इससे एक किमी. सड़क गांव से पौन किमी. दूरी तक बन पाई है। सड़क निर्माण में एक स्थान पर हार्ड रॉक के कारण डायनामाइट व कंप्रेशर का मामूली इस्तेमाल हुआ है, वेबरेटर मशीन का फिलहाल नहीं हुआ। उसका उपयोग सीसी निर्माण में किया जाएगा।
-- सरोप सिंह भंडारी, ग्राम प्रधान जुड्डा।
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