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सीमा विस्तार के कैबिनेट के फैसले से जनप्रतिनिधि उहापोह में फंसे
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:19 AM IST
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निकाय विस्तार पर भाजपा कांग्रेस आमने-सामने
-- नप डोईवाला में पंचायतों के कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपनाए बागी सुर
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
निकायों के विस्तार के कैबिनेट के निर्णय के बाद पंचायतों के जनप्रतिनिधि उहापोह की स्थिति में हैं। भाजपा से जुडे़ जनप्रतिनिधि फैसले का स्वागत कर रहे हैं जबकि कांग्रेस पूरी तरह से मुखर हो गई है। नगर पालिका डोईवाला में के ग्राम सभा लच्छीवाला, मारखम ग्रांट, घिसरपडी, डैशवाला, कान्हरवाला, भानियावाला, अठूरवाला और जौलीग्रांट के गांवों को जोड़कर नगर पालिका डोईवाला का सीमा विस्तार किए जाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि यदि अगले साल निकाय के चुनाव कराने हैं तो अभी से प्रक्रिया को गति देनी होगी। कैबिनेट द्वारा सीमा विस्तार का फैसला लेना इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।
आठ ग्राम सभाओं में अधिकांश जनप्रतिनिधि सत्तारूढ़ भाजपा से जुडे़ हुए हैं। ऐसे भी कई जनप्रतिनिधि हैं जो विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में आ गए थे। अब सीमा विस्तार के निर्णय पर अलग-अलग तर्क दे रहें हैं। भाजपा के प्रतिनिधि सरकार के साथ हैं तो कांग्रेस से जुड़े जनप्रतिनिधि सीमा विस्तार के मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक की बात कह रहें हैं। सीमा विस्तार की प्रक्रिया में नोटिफिकेशन से लेकर आपत्ति और उनकी सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय होगा, लेकिन अभी से जनप्रतिनिधियों के तर्क राजनीतिक संगठनों की भाषा बोलते दिखाई दे रहें हैं।
सरकार का शहरीकरण को बढ़ावा देना स्वागत योग्य है। लेकिन कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं। मसलन, जौलीग्रांट, अठूरवाला, कान्हरवाला, भानियावाला ग्राम सभा में कलस्टर के तहत एक अरब की विकास योजनाओं पर काम होना प्रस्तावित है। शहरीकरण होने पर उक्त धनराशि व्यय नहीं हो सकेगी। गांवों का विकास भी सरकार की प्राथमिकता में है। ऐसे में सीमा विस्तार के निर्णय पर संवदेनशीलता जरूरी है।
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- डबल सिंह भंडारी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भाजपा।
गांवों की बेहतरी के लिए सरकार ने मजबूती से काम करने के बजाए सीमा विस्तार कर गांवों को शहर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। हम निकाय से जुड़ने का विरोध करेंगे। कांग्रेस संगठन को विश्वास में लेकर कोर्ट भी जाएंगे।
- टीना चौधरी, सदस्य जिला पंचायत मारखम ग्रांट। कांग्रेस
शहरीकरण को बढ़ावा देना सरकार का उचित प्रयास है। सीमा विस्तार पर जनपक्षीय राय भी जरूरी है। यदि जनता को आपत्ति हो तो सरकार को विचार भी करना चाहिए।
- नरेंद्र नेगी, ग्राम प्रधान कान्हरवाला, भाजपा ।
शहरीकरण करने से गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। गांवों के शहरों में तब्दील होने से कई प्रकार की समस्याओं में इजाफा होना भी तय है। सीमा विस्तार के फैसले की पुरजोर शब्दों में निंदा करते हुए हर स्तर पर इसका विरोध करेंगे।
- शेर सिंह सैनी, ग्राम प्रधान भानियावाला कांग्रेस ।
सागर मनवाला प्रधान जौलीग्रांट
गांवो के विकास के लिए पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा जौलीग्रांट को आदर्श गांव बनाने की मुहिम शुरू की गई थी। शहरीकरण होने से प्रभाव पडेगा। सीमा विस्तार के लिए जनता का क्या मन है। सरकार को भांपना चाहिए। सीमा विस्तार पर सरकार की ओर से तस्वीर साफ होने पर ही कुछ कहा जा सकता है।
सागर मनवाल, ग्राम प्रधान, जौलीग्रांट।
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-- नप डोईवाला में पंचायतों के कुछ जनप्रतिनिधियों ने अपनाए बागी सुर
अमर उजाला ब्यूरो
डोईवाला।
निकायों के विस्तार के कैबिनेट के निर्णय के बाद पंचायतों के जनप्रतिनिधि उहापोह की स्थिति में हैं। भाजपा से जुडे़ जनप्रतिनिधि फैसले का स्वागत कर रहे हैं जबकि कांग्रेस पूरी तरह से मुखर हो गई है। नगर पालिका डोईवाला में के ग्राम सभा लच्छीवाला, मारखम ग्रांट, घिसरपडी, डैशवाला, कान्हरवाला, भानियावाला, अठूरवाला और जौलीग्रांट के गांवों को जोड़कर नगर पालिका डोईवाला का सीमा विस्तार किए जाने का प्रस्ताव है। माना जा रहा है कि यदि अगले साल निकाय के चुनाव कराने हैं तो अभी से प्रक्रिया को गति देनी होगी। कैबिनेट द्वारा सीमा विस्तार का फैसला लेना इसी कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है।
आठ ग्राम सभाओं में अधिकांश जनप्रतिनिधि सत्तारूढ़ भाजपा से जुडे़ हुए हैं। ऐसे भी कई जनप्रतिनिधि हैं जो विधानसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में आ गए थे। अब सीमा विस्तार के निर्णय पर अलग-अलग तर्क दे रहें हैं। भाजपा के प्रतिनिधि सरकार के साथ हैं तो कांग्रेस से जुड़े जनप्रतिनिधि सीमा विस्तार के मुद्दे पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तक की बात कह रहें हैं। सीमा विस्तार की प्रक्रिया में नोटिफिकेशन से लेकर आपत्ति और उनकी सुनवाई के बाद ही अंतिम निर्णय होगा, लेकिन अभी से जनप्रतिनिधियों के तर्क राजनीतिक संगठनों की भाषा बोलते दिखाई दे रहें हैं।
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सरकार का शहरीकरण को बढ़ावा देना स्वागत योग्य है। लेकिन कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं। मसलन, जौलीग्रांट, अठूरवाला, कान्हरवाला, भानियावाला ग्राम सभा में कलस्टर के तहत एक अरब की विकास योजनाओं पर काम होना प्रस्तावित है। शहरीकरण होने पर उक्त धनराशि व्यय नहीं हो सकेगी। गांवों का विकास भी सरकार की प्राथमिकता में है। ऐसे में सीमा विस्तार के निर्णय पर संवदेनशीलता जरूरी है।
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- डबल सिंह भंडारी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भाजपा।
गांवों की बेहतरी के लिए सरकार ने मजबूती से काम करने के बजाए सीमा विस्तार कर गांवों को शहर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। हम निकाय से जुड़ने का विरोध करेंगे। कांग्रेस संगठन को विश्वास में लेकर कोर्ट भी जाएंगे।
- टीना चौधरी, सदस्य जिला पंचायत मारखम ग्रांट। कांग्रेस
शहरीकरण को बढ़ावा देना सरकार का उचित प्रयास है। सीमा विस्तार पर जनपक्षीय राय भी जरूरी है। यदि जनता को आपत्ति हो तो सरकार को विचार भी करना चाहिए।
- नरेंद्र नेगी, ग्राम प्रधान कान्हरवाला, भाजपा ।
शहरीकरण करने से गांवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। गांवों के शहरों में तब्दील होने से कई प्रकार की समस्याओं में इजाफा होना भी तय है। सीमा विस्तार के फैसले की पुरजोर शब्दों में निंदा करते हुए हर स्तर पर इसका विरोध करेंगे।
- शेर सिंह सैनी, ग्राम प्रधान भानियावाला कांग्रेस ।
सागर मनवाला प्रधान जौलीग्रांट
गांवो के विकास के लिए पूर्व प्रदेश सरकार द्वारा जौलीग्रांट को आदर्श गांव बनाने की मुहिम शुरू की गई थी। शहरीकरण होने से प्रभाव पडेगा। सीमा विस्तार के लिए जनता का क्या मन है। सरकार को भांपना चाहिए। सीमा विस्तार पर सरकार की ओर से तस्वीर साफ होने पर ही कुछ कहा जा सकता है।
सागर मनवाल, ग्राम प्रधान, जौलीग्रांट।