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आरटीआई के हथियार के सामने नतमस्तक हुई पुलिस
Updated Thu, 31 Aug 2017 10:15 PM IST
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आरटीआई के आगे झुकी पुलिस
एसएसपी ने शुल्क जमा कर लिए 18 विद्युत कनेक्शन
दशकों से बिजली की चोरी कर रहे थे पुलिस वाले
रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
आरटीआई (सूचना का अधिकार) के हथियार के सामने पुलिस विभाग को नतमस्तक होना पड़ा है। दशकों से बिजली की चोरी कर रहे पुलिस वालों पर आरटीआई के माध्यम से नकेल कसी गई। एसएसपी को विद्युत वितरण खंड में निर्धारित शुल्क जमा कराकर बिजली के 18 नए कनेक्शन लेने पड़े हैं। विद्युत वितरण खंड ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम पुलिस चौकी हरकी पैड़ी, पुलिस चौकी रोडी बेलवाला, खड़खड़ी, सप्तऋषि,चंडीघाट एवं श्यामपुर थाना सहित काशीपुरा, खड़खड़ी स्थित पुलिस आवास, सीओ सिटी, एसओ श्यामपुर के आवास, कमलदास कुटिया के पुलिस कार्यालय, सीओ ट्रैफिक के आवास, मायापुर स्थित डबल मंजिल भवन, कनखल व ज्वालापुर आदि स्थानों पर बिजली के कनेक्शन दिए हैं।
एसएसपी ने प्रत्येक विद्युुत कनेक्शन के लिए नियमानुसार 1400, 1600 और 3500 रुपये का शुल्क जमा कराकर अवैध कनेक्शनों को वैध करवाया है। बृहस्पतिवार को विद्युत वितरण खंड मायापुर हरिद्वार के अधिशासी अभियंता वीएस पंवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम किए गए पुलिस थानों, पुलिस चौकियों, पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के आवासों के नाम लिए गए नए विद्युत कनेक्शनों की सूची तथा जमा किए गए कनेक्शन शुल्क की रसीद मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह के न्यायालय में प्रस्तुत की है।
मुख्य सूचना आयुक्त ने 9 अगस्त को पुलिस कर्मियों की ओर से दशकों से बिजली की चोरी करने संबंधी सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दाखिल द्वितीय अपील की सुनवाई करते हुए ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता के प्रतिनिधि व अधिशासी अभियंता को फटकार लगाते हुए कानून के रखवालों द्वारा ही चोरी करने के विरुद्ध कार्रवाई कर 31 अगस्त को कार्रवाई कर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अधिशासी अभियंता वीएस पंवार ने मुख्य सूचना आयुक्त के न्यायालय में उपस्थित होकर एसएसपी की ओर से लिए गए बिजली के कनेक्शनों की सूची दाखिल की। सीआईसी इस पर कहा कि ऊर्जा निगम जिस चोरी को दशकों से नहीं रोक पा रहा था उसको आरटीआई के हथियार ने रोक दिया है।
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एसएसपी ने शुल्क जमा कर लिए 18 विद्युत कनेक्शन
दशकों से बिजली की चोरी कर रहे थे पुलिस वाले
रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
आरटीआई (सूचना का अधिकार) के हथियार के सामने पुलिस विभाग को नतमस्तक होना पड़ा है। दशकों से बिजली की चोरी कर रहे पुलिस वालों पर आरटीआई के माध्यम से नकेल कसी गई। एसएसपी को विद्युत वितरण खंड में निर्धारित शुल्क जमा कराकर बिजली के 18 नए कनेक्शन लेने पड़े हैं। विद्युत वितरण खंड ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम पुलिस चौकी हरकी पैड़ी, पुलिस चौकी रोडी बेलवाला, खड़खड़ी, सप्तऋषि,चंडीघाट एवं श्यामपुर थाना सहित काशीपुरा, खड़खड़ी स्थित पुलिस आवास, सीओ सिटी, एसओ श्यामपुर के आवास, कमलदास कुटिया के पुलिस कार्यालय, सीओ ट्रैफिक के आवास, मायापुर स्थित डबल मंजिल भवन, कनखल व ज्वालापुर आदि स्थानों पर बिजली के कनेक्शन दिए हैं।
एसएसपी ने प्रत्येक विद्युुत कनेक्शन के लिए नियमानुसार 1400, 1600 और 3500 रुपये का शुल्क जमा कराकर अवैध कनेक्शनों को वैध करवाया है। बृहस्पतिवार को विद्युत वितरण खंड मायापुर हरिद्वार के अधिशासी अभियंता वीएस पंवार ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नाम किए गए पुलिस थानों, पुलिस चौकियों, पुलिस अधिकारियों तथा कर्मचारियों के आवासों के नाम लिए गए नए विद्युत कनेक्शनों की सूची तथा जमा किए गए कनेक्शन शुल्क की रसीद मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह के न्यायालय में प्रस्तुत की है।
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मुख्य सूचना आयुक्त ने 9 अगस्त को पुलिस कर्मियों की ओर से दशकों से बिजली की चोरी करने संबंधी सूचना का अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दाखिल द्वितीय अपील की सुनवाई करते हुए ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता के प्रतिनिधि व अधिशासी अभियंता को फटकार लगाते हुए कानून के रखवालों द्वारा ही चोरी करने के विरुद्ध कार्रवाई कर 31 अगस्त को कार्रवाई कर आख्या प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अधिशासी अभियंता वीएस पंवार ने मुख्य सूचना आयुक्त के न्यायालय में उपस्थित होकर एसएसपी की ओर से लिए गए बिजली के कनेक्शनों की सूची दाखिल की। सीआईसी इस पर कहा कि ऊर्जा निगम जिस चोरी को दशकों से नहीं रोक पा रहा था उसको आरटीआई के हथियार ने रोक दिया है।
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