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महिलाओं के लिए शोध की अवधि बढ़ी
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शोधरत महिला अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब वह पांच साल के अतिरिक्त अधिकतम आठ साल में शोध पूरा कर सकती हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने महिला सशक्तीकरण अभियान के अंतर्गत अन्य सभी विश्वविद्यालयों से पहले यह कदम उठाया है। पीएचडी में समयावधि बढ़ने के साथ ही महिलाएं शोध कार्य के क्षेत्र में बहुमुखी विकास भी कर सकती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के शोध नियमावली 2016 को विश्वविद्यालय में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। इस नियमावली में महिलाओं को बहुत सारी प्राथमिकताएं दी गई हैं, जिनका सही रूप में महिलाएं लाभ उठा सकती है। विशेष बात यह है कि शोध कार्य करने में बहुत अधिक समय लगता है और पांच साल की अवधि का पता ही नहीं चलता है। विज्ञान क्षेत्र में पीएचडी करने में डाटा संकलन और नए-नए सांख्यिकीय विश्लेषणों से शोधार्थी का गुजरना पड़ता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि महिला शोधार्थियों के लिए यह खुशी की बात है। मोदी सरकार का महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र यह नया प्रयोग है। महिला सशक्तीकरण को विश्वविद्यालय में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने भी इसे महिला शोधार्थियों के लिए लाभकारी बताया। महिला सशक्तीकरण अभियान की संयोजिका प्रो. नमिता जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय में महिला शोधार्थियों के लिए शोध में समयावधि बढ़ने से निश्चित ही लाभ मिलेगा।
हरिद्वार।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में शोधरत महिला अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। अब वह पांच साल के अतिरिक्त अधिकतम आठ साल में शोध पूरा कर सकती हैं। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने महिला सशक्तीकरण अभियान के अंतर्गत अन्य सभी विश्वविद्यालयों से पहले यह कदम उठाया है। पीएचडी में समयावधि बढ़ने के साथ ही महिलाएं शोध कार्य के क्षेत्र में बहुमुखी विकास भी कर सकती हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के शोध नियमावली 2016 को विश्वविद्यालय में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। इस नियमावली में महिलाओं को बहुत सारी प्राथमिकताएं दी गई हैं, जिनका सही रूप में महिलाएं लाभ उठा सकती है। विशेष बात यह है कि शोध कार्य करने में बहुत अधिक समय लगता है और पांच साल की अवधि का पता ही नहीं चलता है। विज्ञान क्षेत्र में पीएचडी करने में डाटा संकलन और नए-नए सांख्यिकीय विश्लेषणों से शोधार्थी का गुजरना पड़ता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डा. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि महिला शोधार्थियों के लिए यह खुशी की बात है। मोदी सरकार का महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र यह नया प्रयोग है। महिला सशक्तीकरण को विश्वविद्यालय में पूरी तरह से लागू कर दिया गया है। कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने भी इसे महिला शोधार्थियों के लिए लाभकारी बताया। महिला सशक्तीकरण अभियान की संयोजिका प्रो. नमिता जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय में महिला शोधार्थियों के लिए शोध में समयावधि बढ़ने से निश्चित ही लाभ मिलेगा।
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