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भूमियाल देवता की भव्य जल कलश यात्रा और नदां देवी की पूजा अर्चना के साथ शुरू हुआ पांच दिवसीय नागिनी माता मेला
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:40 AM IST
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नारायणबगड़। रैंस गांव से भव्य जल कलश यात्रा के साथ भूमियाल देवता के नंदा धाम भारंकोटबार (भंगोटा) पहुंचने और हनुमान ध्वज की स्थापना के साथ पांच दिवसीय नागिनी माता नंदाष्टमी मेले का शुुभारंभ हुआ। इस दौरान जागर सम्राट बुद्धि सिंह दानू ने सुफल ह्वेई जैई तुम्हारी जात्रा..., नंदा जो जस देई, जसीली ह्वै जई ऋषियों की भूमि..., नंदा तेरा नैजा निशाण ऐगे भारंकोटबार मा..., हरियां-भरियां भादो मां माता त्वेते मैत बुल्यूला... आदि जागर गाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
रैंस गांव के पौराणिक नागिनी माता (नैणी देवी) के पुजारी विशंबर दत्त सती ने ब्रह्मबेला पर नंदा देवी, भूमियाल देवता, पंचनाम देवताओं की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। क्षेत्र के आराध्य भूमियाल देवता के पश्वा ने अवतरित होकर ढोल-दमाऊं की थाप पर 16 कलाओं पर आधारित देव नृत्य किया और श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस दौरान कड़ाकोट पट्टी के नौ गांवों के सैकड़ों भक्तों ने भूमियाल देवता को शृंगार सामग्री अर्पित की। इसके बाद आचार्य विशंबर दत्त सती ने रेंस के ऊपरी हिस्से में स्थित ढलकनी धार में पूजा की। दोपहर 12 बजे रैंस गांव से बाजे-गाजे और भव्य कलश यात्रा के साथ भूमियाल देवता के निशाण ने भारंकोटबार (भंगोटा) नंदा धाम के लिए प्रस्थान किया। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा के साथ भूमियाल देवता को गांव से विदा किया। भूमियाल देवता के नंदाधाम भारंकोटबार पहुंचने पर नंदा और भूमियाल देवता के जयकारों से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। आचार्यों ने हनुमान ध्वज को स्थापित कर भूमियाल देवता को नंदा देवी मंदिर में प्रतिस्थापित कर विधिवत पांच दिवसीय नागिनी माता (नैणी देवी) धार्मिक मेले का शुभारंभ हो गया है। इस मौके पर कड़ाकोट पट्टी के नौ गांवों सहित अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालुओं ने नागिनी माता मेले में प्रतिभाग किया।
रैंस गांव के पौराणिक नागिनी माता (नैणी देवी) के पुजारी विशंबर दत्त सती ने ब्रह्मबेला पर नंदा देवी, भूमियाल देवता, पंचनाम देवताओं की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। क्षेत्र के आराध्य भूमियाल देवता के पश्वा ने अवतरित होकर ढोल-दमाऊं की थाप पर 16 कलाओं पर आधारित देव नृत्य किया और श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस दौरान कड़ाकोट पट्टी के नौ गांवों के सैकड़ों भक्तों ने भूमियाल देवता को शृंगार सामग्री अर्पित की। इसके बाद आचार्य विशंबर दत्त सती ने रेंस के ऊपरी हिस्से में स्थित ढलकनी धार में पूजा की। दोपहर 12 बजे रैंस गांव से बाजे-गाजे और भव्य कलश यात्रा के साथ भूमियाल देवता के निशाण ने भारंकोटबार (भंगोटा) नंदा धाम के लिए प्रस्थान किया। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा के साथ भूमियाल देवता को गांव से विदा किया। भूमियाल देवता के नंदाधाम भारंकोटबार पहुंचने पर नंदा और भूमियाल देवता के जयकारों से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। आचार्यों ने हनुमान ध्वज को स्थापित कर भूमियाल देवता को नंदा देवी मंदिर में प्रतिस्थापित कर विधिवत पांच दिवसीय नागिनी माता (नैणी देवी) धार्मिक मेले का शुभारंभ हो गया है। इस मौके पर कड़ाकोट पट्टी के नौ गांवों सहित अन्य क्षेत्रों के श्रद्धालुओं ने नागिनी माता मेले में प्रतिभाग किया।
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