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सब मीटरों की रीडिंग गड़बड़ी की जांच बाहरी एजेंसी से
Updated Sat, 05 Aug 2017 10:32 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज/एचएनबी बेस अस्पताल के आवासीय परिसरों में स्थापित सब मीटरों की रीडिंग में गड़बड़ी की जांच बाहरी एजेंसियों से करवाई जाएगी। तकनीकी जांच में पॉलीटेक्निक और आईटीआई के विषय विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। मेडिकल कॉलेज/बेस अस्पताल का प्रतिमाह 10-12 लाख रुपये बिजली का बिल आता है। इसमें कॉलेज/अस्पताल के आवासीय परिसर का बिल भी शामिल है। गत वर्ष तक नियमविरुद्ध सरकारी खजाने से पूरे बिल का भुगतान होता था। मामला पकड़ में आने पर कॉलेज प्रशासन ने चिकित्सकों और अन्य स्टाफ को स्वयं बिजली बिल देने के आदेश जारी किए। इसके बाद आवासीय परिसरों में सब मीटर लगा दिए गए और मीटर रीडिंग के हिसाब से कॉलेज प्रशासन बिल वसूलने लगा। सब मीटरों की रीडिंग के अलावा कॉलेज के मुख्य विद्युत मीटर में जितनी रीडिंग दर्ज होती है, उसी के मुताबिक कॉलेज ऊर्जा निगम को भुगतान करता है। बावजूद इसके बिजली खपत में जब ज्यादा असर नहीं पड़ा तो कॉलेज प्रशासन ने सब मीटरों की रीडिंग संबंधी रजिस्टर चेक किए। इसमें कतिपय कर्मचारियों की एक माह की मीटर रीडिंग 2 से लेकर 20 यूनिट दर्ज थी। इस पर वित्त नियंत्रक ने बिजली अनुभाग से संबंधित सब मीटरों की जांच करवाई, लेकिन कारण स्पष्ट नहीं हो पाए। इस वजह से अब बाहरी एजेंसी से तकनीकी जांच करवाई जा रही है।
मीटर रीडिंग कम आने की जांच पॉलीटेक्निक या आईटीआई के मैकेनिकल/इलेक्ट्रिकल विभाग के तकनीशियनों से कराई जाएगी। गड़बड़ी होने पर अर्थदंड वसूला जाएगा।-विवेक स्वरुप, वित्त नियंत्रक मेडिकल कॉलेज श्रीनगर।
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