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महज 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी देवभूमि की ये वीरांगना, आइए जानते हैं इनकी कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 07 Jul 2018 06:58 PM IST
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तीलू रौतेली देवभूमि की वीरांगना
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तीलू रौतेली, गढ़वाल की ऐसी वीरांगना थीं, जो महज 15 वर्ष की उम्र में रणभूमि में कूद पड़ी थी। उनका जन्म आठ अगस्त सन 1661 को हुआ था।
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उनका बचपन बीरोंखाल के कांडा मल्ला गांव में बीता। उनके पिता भूप सिंह गढ़वाल नरेश की सेना में थे।
उन्होंने कई वर्ष तक दुश्मन राजाओं को छठी का दूध याद दिलाया था। 15 से 20 वर्ष की आयु तक सात युद्ध लड़ने वाली तीलू विश्व की एकमात्र वीरांगना हैं।
तीलू रौतेली
एक बार युद्ध में शत्रुओं को हराने के बाद वह वापस लौट रही थीं। कांडा गांव के पास हार से अपमानित रामू रजवार नाम के कन्त्यूरी सैनिक ने उन पर तलवार से हमला कर दिया था।
जिसके बाद 22 वर्ष की आयु में वह वीरगति को प्राप्त हुईं। उनकी याद में आज भी कांडा ग्राम व बीरोंखाल क्षेत्र के लोग कौथिग मेला आयोजित करते हैं।
जिसके बाद 22 वर्ष की आयु में वह वीरगति को प्राप्त हुईं। उनकी याद में आज भी कांडा ग्राम व बीरोंखाल क्षेत्र के लोग कौथिग मेला आयोजित करते हैं।
हर साल ढोल-दमाऊ तथा निशाण के साथ तीलू रौतेली की प्रतिमा का पूजन किया जाता है।