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मेडिकल फीस बढ़ाने के विरोध में धरने पर बैठे छात्र
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:27 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज के छात्र मेडिकल की फीस बढ़ाने के विरोध में मंगलवार को धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्र हाथ में फीस बढ़ाने के विरोध में नारे लिखे पोस्टर लेकर नारेबाजी की। छात्र-छात्राएं देर रात तक धरने पर बैठे रहे। उधर, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला शुल्क समिति ने आय-व्यय का ब्योरा देने के बाद लिया गया है।
राज्य सरकार ने हाल ही में निजी मेडिकल कॉलेजों को यूनिवर्सिटी होने के नाते शुल्क निर्धारित करने का अधिकार दे दिया है। इसके बाद एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने पीजी और यूजी की फीस बढ़ा दी है। गत वर्ष जिन छात्रों ने दाखिला लिया था, उन्होंने शपथ पत्र दिया था कि वह बढ़ी हुई फीस देंगे तो कॉलेजों ने यह शुल्क गत वर्ष से लागू कर दी। इसे लेकर अब छात्रों ने विरोध तेज कर दिया। इसी क्रम में मंगलवार को एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने गेट पर धरना शुरू कर दिया। छात्रों ने कॉलेज में आने-जाने वाला मुख्य गेट बंद कर दिया। इसके अलावा हाथ में विभिन्न नारे लिखे पोस्टर लेकर एसजीआरआर प्रबंधन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध स्वरूप छात्रों ने शाम को मोमबत्तियां भी जलाईं।
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नीट के बाद देश भर के मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस फ ीस में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। कॉलेज के इन्फ्र ास्ट्रक्चर व सुविधाओं के मुताबिक एमबीबीएस की फ ीस 15 से 20 लाख हुई है। 2017 बैच के छात्र-छात्राओं का प्रवेश उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार हुआ था। छात्रों ने शपथपत्र भरकर यह शपथ ली थी कि जो भी फ ीस निर्धारित होगी, वह छात्र-छात्राओं को स्वीकार्य होगी। अब उत्तराखंड कैबिनेट व शुल्क नियामक समिति ने प्राईवेट विवि को अधिकार दिया है कि वह अपनी फीस खुद तय कर सकते हैं। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के चार्टड अकाउंटेंट ने कॉलेज की आय-व्यय के आधार पर मेडिकल की प्रति सीट के लिए आने वाले खर्च की रिपोर्ट तैयार की है। विवि की शुल्क निर्धारण समिति एवं वित्त समिति ने रिपोर्ट के आधार पर ही फ ीस निर्धारित की है। एमसीआई के मानकों के अनुसार संस्थान चलाने के लिए यह फ ीस बहुत अधिक नहीं है। जब छात्र-छात्राओं ने अनुबंध पत्र भरा था तब वह इस बात से अवगत व सहमत थे कि फ ीस बढ़ना निश्चित है। मेडिकल स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। हड़ताल व अन्य अनैतिक कार्य छात्र हित में नहीं हैं। उत्तराखंड के अन्य सभी निजी विवि अपने स्थापना दिवस से संचालित पाठ्यक्रमों की फ ीस स्वयं तय करते आ रहे हैं। एक राज्य में विश्वविद्यालयों के लिए दो व्यवस्थाएं लागू नहीं हो सकती है। इसीलिए सरकार ने निजी विवि को मेडिकल कॉलेजों की फ ीस निर्धारण की मान्यता दी है।
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-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज
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श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज के छात्र मेडिकल की फीस बढ़ाने के विरोध में मंगलवार को धरने पर बैठ गए। इस दौरान छात्र हाथ में फीस बढ़ाने के विरोध में नारे लिखे पोस्टर लेकर नारेबाजी की। छात्र-छात्राएं देर रात तक धरने पर बैठे रहे। उधर, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला शुल्क समिति ने आय-व्यय का ब्योरा देने के बाद लिया गया है।
राज्य सरकार ने हाल ही में निजी मेडिकल कॉलेजों को यूनिवर्सिटी होने के नाते शुल्क निर्धारित करने का अधिकार दे दिया है। इसके बाद एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने पीजी और यूजी की फीस बढ़ा दी है। गत वर्ष जिन छात्रों ने दाखिला लिया था, उन्होंने शपथ पत्र दिया था कि वह बढ़ी हुई फीस देंगे तो कॉलेजों ने यह शुल्क गत वर्ष से लागू कर दी। इसे लेकर अब छात्रों ने विरोध तेज कर दिया। इसी क्रम में मंगलवार को एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के छात्रों ने गेट पर धरना शुरू कर दिया। छात्रों ने कॉलेज में आने-जाने वाला मुख्य गेट बंद कर दिया। इसके अलावा हाथ में विभिन्न नारे लिखे पोस्टर लेकर एसजीआरआर प्रबंधन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध स्वरूप छात्रों ने शाम को मोमबत्तियां भी जलाईं।
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नीट के बाद देश भर के मेडिकल कॉलेजों की एमबीबीएस फ ीस में कई गुना बढ़ोतरी हुई है। कॉलेज के इन्फ्र ास्ट्रक्चर व सुविधाओं के मुताबिक एमबीबीएस की फ ीस 15 से 20 लाख हुई है। 2017 बैच के छात्र-छात्राओं का प्रवेश उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार हुआ था। छात्रों ने शपथपत्र भरकर यह शपथ ली थी कि जो भी फ ीस निर्धारित होगी, वह छात्र-छात्राओं को स्वीकार्य होगी। अब उत्तराखंड कैबिनेट व शुल्क नियामक समिति ने प्राईवेट विवि को अधिकार दिया है कि वह अपनी फीस खुद तय कर सकते हैं। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के चार्टड अकाउंटेंट ने कॉलेज की आय-व्यय के आधार पर मेडिकल की प्रति सीट के लिए आने वाले खर्च की रिपोर्ट तैयार की है। विवि की शुल्क निर्धारण समिति एवं वित्त समिति ने रिपोर्ट के आधार पर ही फ ीस निर्धारित की है। एमसीआई के मानकों के अनुसार संस्थान चलाने के लिए यह फ ीस बहुत अधिक नहीं है। जब छात्र-छात्राओं ने अनुबंध पत्र भरा था तब वह इस बात से अवगत व सहमत थे कि फ ीस बढ़ना निश्चित है। मेडिकल स्टूडेंट्स अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें। हड़ताल व अन्य अनैतिक कार्य छात्र हित में नहीं हैं। उत्तराखंड के अन्य सभी निजी विवि अपने स्थापना दिवस से संचालित पाठ्यक्रमों की फ ीस स्वयं तय करते आ रहे हैं। एक राज्य में विश्वविद्यालयों के लिए दो व्यवस्थाएं लागू नहीं हो सकती है। इसीलिए सरकार ने निजी विवि को मेडिकल कॉलेजों की फ ीस निर्धारण की मान्यता दी है।
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-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज