{"_id":"5aa82e534f1c1b00768b5663","slug":"141520971347-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"21 मार्च के बाद आंदोलन करेंगे उपनलकर्मी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
21 मार्च के बाद आंदोलन करेंगे उपनलकर्मी
Updated Wed, 14 Mar 2018 01:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
वेतन वृद्धि और सुरक्षित भविष्य की नीति की मांग कर रहे उपनल कर्मियों ने 21 मार्च के बाद उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुए समझौते के दो माह बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। अब 21 मार्च तक सकारात्मक फैसला न आने पर वह आंदोलन छेड़कर विरोध जताएंगे।
मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में उपनल कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने बैठक आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय की। प्रदेश अध्यक्ष दीपक चौहान ने कहा कि सरकार उपनलकर्मियों को भाड़े का मजदूर मानती है। यही कारण है कि वर्षों से उपनल में काम कर रहे कर्मियों को तय न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये भी नहीं दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कई मंत्री और अधिकारी उन्हें सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं। लंबा समय बीतने के बाद भी उनके मामले में कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है, जिससे कर्मियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बार उपनलकर्मी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उनके पक्ष में फैसला होने और उसका लाभ न मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार वह सरकार के बहकावे में नहीं आएंगे। बैठक में भावेश जगूड़ी, हेमंत रावत समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
वेतन वृद्धि और सुरक्षित भविष्य की नीति की मांग कर रहे उपनल कर्मियों ने 21 मार्च के बाद उग्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हुए समझौते के दो माह बाद भी सरकार ने उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। अब 21 मार्च तक सकारात्मक फैसला न आने पर वह आंदोलन छेड़कर विरोध जताएंगे।
मंगलवार को प्रदेश कार्यालय में उपनल कर्मचारी महासंघ की प्रदेश कार्यकारिणी ने बैठक आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय की। प्रदेश अध्यक्ष दीपक चौहान ने कहा कि सरकार उपनलकर्मियों को भाड़े का मजदूर मानती है। यही कारण है कि वर्षों से उपनल में काम कर रहे कर्मियों को तय न्यूनतम वेतन 18 हजार रुपये भी नहीं दिए जा रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कई मंत्री और अधिकारी उन्हें सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दे चुके हैं। लंबा समय बीतने के बाद भी उनके मामले में कोई फैसला नहीं लिया जा रहा है, जिससे कर्मियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बार उपनलकर्मी आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। उनके पक्ष में फैसला होने और उसका लाभ न मिलने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार वह सरकार के बहकावे में नहीं आएंगे। बैठक में भावेश जगूड़ी, हेमंत रावत समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन