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चार माह में जैविक शौचालय स् थाप ति नहीं कर पाया निकाय
Updated Tue, 19 Dec 2017 01:57 AM IST
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चार माह में जैविक शौचालय स्थापित नहीं कर पाया निकाय
-- जो शौचालय स्थापित हुए उनमें बिजली और पानी के कनेक्शन नहीं लगे
-- स्वच्छ भारत अभियान के तहत 57 लाख से की गई है खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत तीर्थनगरी को खुुले में शौचमुक्त बनाने की जैविक शौचालय (बॉयो टॉयलेट) योजना चार महीने बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। नगर निकाय क्षेत्रांतर्गत शौचालयों के अभाव वाले स्थानों पर 57 लाख की लागत से 47 सीटर जैविक शौचालय लगाए जाने हैं, लेकिन योजना शुरू होने के चार महीने बाद भी लाखों के शौचालयों में पानी, सीवर व बिजली के कनेक्शन नहीं लग पाए हैं। ऋषिकेश व गंगा तटों को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए नगर पालिका बोर्ड मीटिंग में बायो टॉयलेट लगाने का प्रस्ताव पास किया गया था। करीब 57 लाख की लागत के जैविक शौचालय स्थापित होने से गरीब, निर्धन व शौचालय बनाने में असमर्थ लोगों को सुविधा दी जानी थी।
नगर में खुले में शौच करने वाले लोगों की सबसे अधिक संख्या गंगा व उसकी सहायक नदियों के आसपास रहने वालों की है। लिहाजा, सबसे अधिक जैविक शौचालय नदी तटीय क्षेत्रों में स्थापित जाने हैं, लेकिन चार माह बाद भी 47 सीटर जैविक शौचालयों में से केवल 25 बायो टॉयलेट्स बनाए जा सके हैं। जो टायलेट्स बने भी हैं उनमें अभी तक पानी, बिजली व सीवर संयोजन की व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। जिसके कारण शौचालय बनाने में असमर्थ लोगों को खुले में ही शौच करने को विवश होना पड़ रहा है। इससे गंगा व उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन निकाय के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी इस मामले में फिक्रमंद नहीं दिख रहे हैं।
बायोटॉयलेट के फायदे
- कोई दुर्गंध नहीं आती है
- कीड़े नहीं पनपते हैं
- प्रोडक्ट में कोई सॉलिड वेस्ट नहीं होता
- मेंटीनेंस जरूरी नहीं
- बहुत कम स्थान पर लगाए जा सकते हैं
पारंपरिक टॉयलेट से समस्या
- आसपास संक्रमण का खतरा
- जलस्रोत दूषित होने का खतरा
- कॉलेरा, जॉडिंस जैसी बीमारियां फैलती हैं
- बहुत अधिक जगह घेरते हैं
- मेंटीनेस बहुत जरूरी है
चुनाव से पहले तैयार होंगे
क्षेत्र में कुल 47 बॉयो टॉयलेट बनाए जाने हैं। जिनमें से 11 बनाए जाने शेष रह गए हैं। साथ ही शौचालय में सीवर, बिजली व पानी के कनेक्शन लगाए जाने हैं। जिसके लिए कागजी कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम चुनाव से पहले जैविक शौचालय तैयार कराकर सुचारु कराए जाएंगे।
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-- अरविंद डिमरी, सफाई निरीक्षक, ऋषिकेश
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-- जो शौचालय स्थापित हुए उनमें बिजली और पानी के कनेक्शन नहीं लगे
-- स्वच्छ भारत अभियान के तहत 57 लाख से की गई है खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत तीर्थनगरी को खुुले में शौचमुक्त बनाने की जैविक शौचालय (बॉयो टॉयलेट) योजना चार महीने बाद भी धरातल पर नहीं उतर पाई है। नगर निकाय क्षेत्रांतर्गत शौचालयों के अभाव वाले स्थानों पर 57 लाख की लागत से 47 सीटर जैविक शौचालय लगाए जाने हैं, लेकिन योजना शुरू होने के चार महीने बाद भी लाखों के शौचालयों में पानी, सीवर व बिजली के कनेक्शन नहीं लग पाए हैं। ऋषिकेश व गंगा तटों को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए नगर पालिका बोर्ड मीटिंग में बायो टॉयलेट लगाने का प्रस्ताव पास किया गया था। करीब 57 लाख की लागत के जैविक शौचालय स्थापित होने से गरीब, निर्धन व शौचालय बनाने में असमर्थ लोगों को सुविधा दी जानी थी।
नगर में खुले में शौच करने वाले लोगों की सबसे अधिक संख्या गंगा व उसकी सहायक नदियों के आसपास रहने वालों की है। लिहाजा, सबसे अधिक जैविक शौचालय नदी तटीय क्षेत्रों में स्थापित जाने हैं, लेकिन चार माह बाद भी 47 सीटर जैविक शौचालयों में से केवल 25 बायो टॉयलेट्स बनाए जा सके हैं। जो टायलेट्स बने भी हैं उनमें अभी तक पानी, बिजली व सीवर संयोजन की व्यवस्था तक नहीं हो सकी है। जिसके कारण शौचालय बनाने में असमर्थ लोगों को खुले में ही शौच करने को विवश होना पड़ रहा है। इससे गंगा व उसकी सहायक नदियों में प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन निकाय के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी इस मामले में फिक्रमंद नहीं दिख रहे हैं।
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बायोटॉयलेट के फायदे
- कोई दुर्गंध नहीं आती है
- कीड़े नहीं पनपते हैं
- प्रोडक्ट में कोई सॉलिड वेस्ट नहीं होता
- मेंटीनेंस जरूरी नहीं
- बहुत कम स्थान पर लगाए जा सकते हैं
पारंपरिक टॉयलेट से समस्या
- आसपास संक्रमण का खतरा
- जलस्रोत दूषित होने का खतरा
- कॉलेरा, जॉडिंस जैसी बीमारियां फैलती हैं
- बहुत अधिक जगह घेरते हैं
- मेंटीनेस बहुत जरूरी है
चुनाव से पहले तैयार होंगे
क्षेत्र में कुल 47 बॉयो टॉयलेट बनाए जाने हैं। जिनमें से 11 बनाए जाने शेष रह गए हैं। साथ ही शौचालय में सीवर, बिजली व पानी के कनेक्शन लगाए जाने हैं। जिसके लिए कागजी कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम चुनाव से पहले जैविक शौचालय तैयार कराकर सुचारु कराए जाएंगे।
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-- अरविंद डिमरी, सफाई निरीक्षक, ऋषिकेश