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शहर से लेकर देहात तक डायरिया का हमला
Updated Fri, 24 Aug 2018 02:24 AM IST
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शहर से देहात तक डायरिया का हमला
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया के साथ ही जिले में डायरिया का भी प्रकोप बढ़ गया है। दो सप्ताह में दून और कोरोनेशन जैसे अस्पतालोें में डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा अन्य अस्पतालों में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। दून अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक ओपीडी में प्रतिदिन 75 से लेकर 100 तक ऐसे बच्चे आ रहे हैं जिन्हें डायरिया है। डाक्टरों का कहना है कि गनीमत ये है कि अभी तक डायरिया संक्रामक बीमारी के रूप में नहीं दिख रही है।
दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. व्यास कुमार के मुताबिक पिछले 15 दिन में ओपीडी में डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में प्रतिदिन 200 बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं तो उसमें 100 बच्चे डायरिया पीड़ित हैं। कुछ गंभीर बच्चाेें को अस्पताल में भर्ती कर इलाज करना पड़ा है।
डॉ. व्यास के मुताबिक डायरिया ऐसी बीमारी है जो बारिश के मौसम में सबसे खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में बीमारियों से होने वाली मौत में सबसे अधिक डायरिया से होती हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्रतिवर्ष 334000 ऐसे बच्चों की मौत डायरिया से होती है, जिनकी उम्र पांच साल से कम होती है।
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जीवाणुओं के संक्रमण से होता है डायरिया
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. व्यास कुमार के मुताबिक डायरिया जीवाणुओं के संक्रमण से होता है। डायरिया के लिए रोटा वायरस, सालमोनेला, ई कोलाई जैसे खतरनाक वायरस जिम्मेदार हैं। यदि शीगेला नामक वायरस और अमीबा का संक्रमण हो तो बच्चों में खूनी पेचिश हो जाती है जिससे जान तक चली जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसर सतर्क
एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि वैसे तो अभी डायरिया संक्रामक बीमारी के रूप में नहीं नजर आया है। डायरिया के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन अभी संक्रामक बीमारी के तौर पर कोई प्रकरण सामने नहीं आया है। डायरिया संक्रामक बीमारी के तौर पर न फैलने पाए इसके लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। डायरिया से बचाव के लिए तमाम सीएचसी और पीएचसी में भी ओआरएस मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।
ऐसे करें बीमारी से बचाव
- पानी उबालकर पीना चाहिए। पानी में क्लोरीन की गोलियां डालें।
- बासी खाना न खाएं। हमेशा ताजा पका हुआ भोजन ही करें।
- खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोएं।
- खाने पीने की चीजों को ढककर रखें।
- पत्तेदार सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही पकाएं।
- सड़क के किनारे खुले में बिक रही खाने पीने की चीजों का इस्तेमाल न करें।
- बड़े बच्चों को शिकंजी, लस्सी, नींबू पानी पिलाएं।
- डायरिया होने के बावजूद प्रसूता बच्चों को दुग्धपान कराती रहें।
- डायरिया होने पर तत्काल ओआरएस का घोल लें और कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। बारिश के मौसम में डेंगू, मलेरिया के साथ ही जिले में डायरिया का भी प्रकोप बढ़ गया है। दो सप्ताह में दून और कोरोनेशन जैसे अस्पतालोें में डायरिया पीड़ित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है, जिनमें बच्चों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा अन्य अस्पतालों में भी इन बीमारियों के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। दून अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञों के मुताबिक ओपीडी में प्रतिदिन 75 से लेकर 100 तक ऐसे बच्चे आ रहे हैं जिन्हें डायरिया है। डाक्टरों का कहना है कि गनीमत ये है कि अभी तक डायरिया संक्रामक बीमारी के रूप में नहीं दिख रही है।
दून मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. व्यास कुमार के मुताबिक पिछले 15 दिन में ओपीडी में डायरिया पीड़ित बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ओपीडी में प्रतिदिन 200 बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं तो उसमें 100 बच्चे डायरिया पीड़ित हैं। कुछ गंभीर बच्चाेें को अस्पताल में भर्ती कर इलाज करना पड़ा है।
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डॉ. व्यास के मुताबिक डायरिया ऐसी बीमारी है जो बारिश के मौसम में सबसे खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में बीमारियों से होने वाली मौत में सबसे अधिक डायरिया से होती हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्रतिवर्ष 334000 ऐसे बच्चों की मौत डायरिया से होती है, जिनकी उम्र पांच साल से कम होती है।
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जीवाणुओं के संक्रमण से होता है डायरिया
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. व्यास कुमार के मुताबिक डायरिया जीवाणुओं के संक्रमण से होता है। डायरिया के लिए रोटा वायरस, सालमोनेला, ई कोलाई जैसे खतरनाक वायरस जिम्मेदार हैं। यदि शीगेला नामक वायरस और अमीबा का संक्रमण हो तो बच्चों में खूनी पेचिश हो जाती है जिससे जान तक चली जाती है।
स्वास्थ्य विभाग के अफसर सतर्क
एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि वैसे तो अभी डायरिया संक्रामक बीमारी के रूप में नहीं नजर आया है। डायरिया के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन अभी संक्रामक बीमारी के तौर पर कोई प्रकरण सामने नहीं आया है। डायरिया संक्रामक बीमारी के तौर पर न फैलने पाए इसके लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। डायरिया से बचाव के लिए तमाम सीएचसी और पीएचसी में भी ओआरएस मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है।
ऐसे करें बीमारी से बचाव
- पानी उबालकर पीना चाहिए। पानी में क्लोरीन की गोलियां डालें।
- बासी खाना न खाएं। हमेशा ताजा पका हुआ भोजन ही करें।
- खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोएं।
- खाने पीने की चीजों को ढककर रखें।
- पत्तेदार सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही पकाएं।
- सड़क के किनारे खुले में बिक रही खाने पीने की चीजों का इस्तेमाल न करें।
- बड़े बच्चों को शिकंजी, लस्सी, नींबू पानी पिलाएं।
- डायरिया होने के बावजूद प्रसूता बच्चों को दुग्धपान कराती रहें।
- डायरिया होने पर तत्काल ओआरएस का घोल लें और कुशल चिकित्सक से संपर्क करें।