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जैव विविधता वाले क्षेत्र में न हो बांधों का निर्माण: पंडित हिमालय जल इतिहास,
Updated Sat, 24 Mar 2018 02:19 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से सहस्त्रधारा रोड स्थित सॉग्स्टन पुस्तकालय में ‘हिमालय जल इतिहास, वर्तमान एवं भविष्य’ विषय पर आयोजित सेमिनार में जैव विविधता वाले क्षेत्र में बांध न बनाए जाने पर जोर दिया गया। तीन दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ शुक्रवार को मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के पूर्व अध्यक्ष महाराज कुमार पंडित ने किया।
इस अवसर पर महाराज कुमार पंडित ने कहा कि बांध निर्माण से पूर्व कुछ बातों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यह देखा जाना चाहिए कि वे क्षेत्र जहां बांधों का निर्माण किया जा रहा है वे जैव विविधता से परिपूर्ण क्षेत्र तो नहीं है। इन क्षेत्रों में बांध निर्माण से जैव विविधता को नुकसान होगा। सेमिनार में ऊर्जा के अन्य विकल्पों सौर एवं विंड एनर्जी को बढ़ावा दिए जाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि राजनीति से जुड़े लोग केवल पांच साल को देखते हुए योजनाओं पर काम करते हैं। ऐसे में पर्यावरणविदें और शोधकर्ताओं को आगे आना होगा। सेमिनार में शनिवार को जल की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे, एन रविशंकर, प्रोफेसर एमपी जोशी, मनोज पंजानी आदि मौजूद रहे।
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दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से सहस्त्रधारा रोड स्थित सॉग्स्टन पुस्तकालय में ‘हिमालय जल इतिहास, वर्तमान एवं भविष्य’ विषय पर आयोजित सेमिनार में जैव विविधता वाले क्षेत्र में बांध न बनाए जाने पर जोर दिया गया। तीन दिवसीय सेमिनार का शुभारंभ शुक्रवार को मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के पूर्व अध्यक्ष महाराज कुमार पंडित ने किया।
इस अवसर पर महाराज कुमार पंडित ने कहा कि बांध निर्माण से पूर्व कुछ बातों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है। यह देखा जाना चाहिए कि वे क्षेत्र जहां बांधों का निर्माण किया जा रहा है वे जैव विविधता से परिपूर्ण क्षेत्र तो नहीं है। इन क्षेत्रों में बांध निर्माण से जैव विविधता को नुकसान होगा। सेमिनार में ऊर्जा के अन्य विकल्पों सौर एवं विंड एनर्जी को बढ़ावा दिए जाने पर भी जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि राजनीति से जुड़े लोग केवल पांच साल को देखते हुए योजनाओं पर काम करते हैं। ऐसे में पर्यावरणविदें और शोधकर्ताओं को आगे आना होगा। सेमिनार में शनिवार को जल की वर्तमान स्थिति एवं भविष्य पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पांडे, एन रविशंकर, प्रोफेसर एमपी जोशी, मनोज पंजानी आदि मौजूद रहे।
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