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ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगी प्रदेश की आत्मनिर्भरता
Updated Thu, 30 Aug 2018 01:52 AM IST
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ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ेगी प्रदेश की आत्मनिर्भरता
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
लखवाड़ और व्यासी परियोजना के संबंध में तीन राज्यों के बीच हुए एमओयू से प्रदेश की ऊर्जा क्षमता में विस्तार की काफी संभावना है। इन परियोजनाआें से क्रमश: 300 और 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन बढ़ेगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि उत्तराखंड-राजस्थान-हरियाणा-दिल्ली के बीच मंगलवार को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) हुआ है। इस समझौते के बाद लखवाड़ और व्यासी विद्युत परियोजनाओं से ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड की आत्मनिर्भरता बढ़ जाएगी। इन परियोजनाआें से क्रमश: 300 और 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन बढ़ेगा। परियोजना बनने से डाउनस्ट्रीम में स्थित ढकरानी ढालीपुर और कुल्हाल के उत्पादन में भी वृद्धि होगी। उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि लखवाड़ परियोजना के निर्माण के लिए केंद्र के साथ ही उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सरकार के बीच समझौता हुआ है। एमओयू हस्ताक्षर के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सचिव ऊर्जा राधिका झा, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लि. (यूजेवीएनएल) के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा के प्रयासों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
लखवाड़ और व्यासी परियोजना के संबंध में तीन राज्यों के बीच हुए एमओयू से प्रदेश की ऊर्जा क्षमता में विस्तार की काफी संभावना है। इन परियोजनाआें से क्रमश: 300 और 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन बढ़ेगा। इससे ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
गौरतलब है कि उत्तराखंड-राजस्थान-हरियाणा-दिल्ली के बीच मंगलवार को मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) हुआ है। इस समझौते के बाद लखवाड़ और व्यासी विद्युत परियोजनाओं से ऊर्जा क्षेत्र में उत्तराखंड की आत्मनिर्भरता बढ़ जाएगी। इन परियोजनाआें से क्रमश: 300 और 120 मेगावाट विद्युत का उत्पादन बढ़ेगा। परियोजना बनने से डाउनस्ट्रीम में स्थित ढकरानी ढालीपुर और कुल्हाल के उत्पादन में भी वृद्धि होगी। उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने बताया कि लखवाड़ परियोजना के निर्माण के लिए केंद्र के साथ ही उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सरकार के बीच समझौता हुआ है। एमओयू हस्ताक्षर के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, सचिव ऊर्जा राधिका झा, उत्तराखंड जल विद्युत निगम लि. (यूजेवीएनएल) के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा के प्रयासों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
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