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ठेके के सेल्समैनों, संचालकों से नोकझोेंक, धक्कामुक्की
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:11 PM IST
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कर्णप्रयाग (ब्यूरो)। शराब का ठेका बंद करने की मांग को लेकर शराब विरोधी संघर्ष समिति का दुकान के सेल्समैनों और संचालकों से नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने भीड़ को समझाया लेकिन वह नहीं माने और प्रदर्शन करने लगे। बाद में तहसील प्रशासन की ओर से ठेके के मानकों की जांच एक सप्ताह में करने के आश्वासन पर प्रदर्शनकारी माने। इस पर समिति ने एक सप्ताह तक आंदोलन स्थगित कर दिया। समिति ने कहा यदि मानकों के विरुद्ध चल रही शराब की दुकान नहीं हटाई गई फिर आंदोलन किया जाएगा।
समिति के लोग दोपहर 12 बजे मुख्य बाजार के तिराहे से नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए ठेके के पहुंच मार्ग तक पहुंचे। यहां शराब लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रदर्शनकारियों ने दुकान तक नहीं जाने दिया। कई उपभोक्ताओं ने ठेके में जाने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं ने जाने नहीं दिया। महिलाओं की शराब के सेल्समैनों, संचालकों से नोकझोंक और धक्का मुक्की भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आबकारी अधिनियम के तहत शराब की दुकान के बाहर कोई भी आंदोलन होता है तो शराब की दुकान को सीज किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को धक्के लगते रहे और पुलिस देखती रही। सूचना पर कोतवाली निरीक्षक पंकज पोखरियाल मौके पर पहुंचे और यहां से पुलिस ने भीड़ को हटाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पौने दो बजे तहसीलदार विपिन चंद्र पंत मौके पर पहुंचे। तहसीलदार पंत ने आंदोलनकारियों को एक सप्ताह में शराब के ठेके के मानकों की जांच का आश्वासन दिया, जिस पर प्रदर्शनकारी माने। इस अवसर पर शराब विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अंशी देवी, इंद्रेश मैखुरी, रेनू नेगी, संजय रावत, सुभाष रावत, शीला देवी, अरविंद चौहान सहित महिलाएं मौजूद थीं।
इंसेट
बाजार में आंदोलन पर व्यापारी नाराज
कर्णप्रयाग। यहां चल रहे आंदोलनों का व्यापार पर असर पड़ने पर व्यापारियों ने बाजार में आंदोलन रोकने की मांग प्रशासन से की। भाजपा के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी और होटल संचालक हरनाम लूथरा, जगदीश नैनवाल, हरीश पुरोहित, देवेंद्र कठैत सहित कई व्यापारियों ने कहा कि बाजार में रोज हो रहे शराब विरोधी हो या अन्य आंदोलनों से बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है। कहा कि आंदोलन से जहां बाजार में अनावश्यक भीड़ जमा हो रही है। वहीं यातायात बाधित होने के साथ ही ग्राहक भी आंदोलनों में उलझ रहे हैं। कहा कि मांगों के अनुरूप प्रदर्शन संबंधित विभाग अथवा प्रशासनिक इकाई के परिसर में किया जाना चाहिए। इन दिनों शराब के ठेके को बंद करने की मांग को लेकर बाजार में दो दिनों से प्रदर्शन किया जा रहा है।
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समिति के लोग दोपहर 12 बजे मुख्य बाजार के तिराहे से नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए ठेके के पहुंच मार्ग तक पहुंचे। यहां शराब लेने वाले उपभोक्ताओं को प्रदर्शनकारियों ने दुकान तक नहीं जाने दिया। कई उपभोक्ताओं ने ठेके में जाने की कोशिश की, लेकिन महिलाओं ने जाने नहीं दिया। महिलाओं की शराब के सेल्समैनों, संचालकों से नोकझोंक और धक्का मुक्की भी हुई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आबकारी अधिनियम के तहत शराब की दुकान के बाहर कोई भी आंदोलन होता है तो शराब की दुकान को सीज किया जा सकता है, लेकिन महिलाओं को धक्के लगते रहे और पुलिस देखती रही। सूचना पर कोतवाली निरीक्षक पंकज पोखरियाल मौके पर पहुंचे और यहां से पुलिस ने भीड़ को हटाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से वार्ता की, लेकिन वह नहीं माने। इसके बाद पौने दो बजे तहसीलदार विपिन चंद्र पंत मौके पर पहुंचे। तहसीलदार पंत ने आंदोलनकारियों को एक सप्ताह में शराब के ठेके के मानकों की जांच का आश्वासन दिया, जिस पर प्रदर्शनकारी माने। इस अवसर पर शराब विरोधी आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अंशी देवी, इंद्रेश मैखुरी, रेनू नेगी, संजय रावत, सुभाष रावत, शीला देवी, अरविंद चौहान सहित महिलाएं मौजूद थीं।
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बाजार में आंदोलन पर व्यापारी नाराज
कर्णप्रयाग। यहां चल रहे आंदोलनों का व्यापार पर असर पड़ने पर व्यापारियों ने बाजार में आंदोलन रोकने की मांग प्रशासन से की। भाजपा के पूर्व जिला मीडिया प्रभारी और होटल संचालक हरनाम लूथरा, जगदीश नैनवाल, हरीश पुरोहित, देवेंद्र कठैत सहित कई व्यापारियों ने कहा कि बाजार में रोज हो रहे शराब विरोधी हो या अन्य आंदोलनों से बाजार पर बुरा असर पड़ रहा है। कहा कि आंदोलन से जहां बाजार में अनावश्यक भीड़ जमा हो रही है। वहीं यातायात बाधित होने के साथ ही ग्राहक भी आंदोलनों में उलझ रहे हैं। कहा कि मांगों के अनुरूप प्रदर्शन संबंधित विभाग अथवा प्रशासनिक इकाई के परिसर में किया जाना चाहिए। इन दिनों शराब के ठेके को बंद करने की मांग को लेकर बाजार में दो दिनों से प्रदर्शन किया जा रहा है।
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