{"_id":"5ade4c9f4f1c1b3c0a8b632c","slug":"111524518047-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को किया नमन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को किया नमन
Updated Tue, 24 Apr 2018 02:44 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को किया नमन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
एसएफआई और डीवाईएफआई की ओर से गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली समेत पेशावर विद्रोह में शामिल सभी सैनिकों को नमन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता शिक्षाविद बच्चीराम कंसवाल ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली अंतिम दिनों तक समाज की भलाई के लिए कार्य करते रहे। वे अंग्रेजों की सेना में थे। अपने अधिकारी के सख्त आदेश के बावजूद उन्होंने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में विद्रोह होने पर आजादी के लिए संघर्ष कर रहे पठानों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। इसके लिए उन्हें 11 वर्ष जेल की सजा काटनी पड़ी थी। जहां से सन् 1942 में वे रिहा हुए। उन्होंने सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन और सन् 1948 में टिहरी राजशाही के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पूर्व अजय शर्मा, डीएवी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष लेखराज, शंभू प्रसाद ममगाईं ने युवाओं से सांप्रदायिक सौहार्द, शिक्षा और रोजगार के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
इस अवसर पर एसएफआई के प्रदेश सचिव और डीवाईएफआई के प्रदेश सचिव देवेंद्र रावल एवं अभिषेक भंडारी ने पेशावर विद्रोह में शामिल सैनिकों को याद करते हुए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दौरान विजय भट्ट, कमलेश खंतवाल, साहित्यकार जितेंद्र भारती, अनंत आकाश, महावीर शर्मा, अधिवक्ता रंजन सोलंकी, सतीश दौलाखंडी, शैलेंद्र, मोहित, सोनल आदि उपस्थित थे। संचालन एसएफआई के जिला सह सचिव हिमांशु चौहान और डीवाईएफआई के जिला अध्यक्ष गगन गर्ग ने किया।
विज्ञापन
उधर नेताजी संघर्ष समिति ने पेशावर कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि सभा में समिति के उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल, अरविंद गुप्ता, प्रभात डंडरियाल, राम सिंह प्रधान, सुशील बिरमानी, नवनीत गुसाईं, पंकज नेगी, प्रदीप कुकरेती, सतीश कुमार, रामलाल खंडूडी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
एसएफआई और डीवाईएफआई की ओर से गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली समेत पेशावर विद्रोह में शामिल सभी सैनिकों को नमन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता शिक्षाविद बच्चीराम कंसवाल ने कहा कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली अंतिम दिनों तक समाज की भलाई के लिए कार्य करते रहे। वे अंग्रेजों की सेना में थे। अपने अधिकारी के सख्त आदेश के बावजूद उन्होंने 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में विद्रोह होने पर आजादी के लिए संघर्ष कर रहे पठानों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। इसके लिए उन्हें 11 वर्ष जेल की सजा काटनी पड़ी थी। जहां से सन् 1942 में वे रिहा हुए। उन्होंने सन् 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन और सन् 1948 में टिहरी राजशाही के खात्मे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे पूर्व अजय शर्मा, डीएवी छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष लेखराज, शंभू प्रसाद ममगाईं ने युवाओं से सांप्रदायिक सौहार्द, शिक्षा और रोजगार के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
विज्ञापन
इस अवसर पर एसएफआई के प्रदेश सचिव और डीवाईएफआई के प्रदेश सचिव देवेंद्र रावल एवं अभिषेक भंडारी ने पेशावर विद्रोह में शामिल सैनिकों को याद करते हुए उनके संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दौरान विजय भट्ट, कमलेश खंतवाल, साहित्यकार जितेंद्र भारती, अनंत आकाश, महावीर शर्मा, अधिवक्ता रंजन सोलंकी, सतीश दौलाखंडी, शैलेंद्र, मोहित, सोनल आदि उपस्थित थे। संचालन एसएफआई के जिला सह सचिव हिमांशु चौहान और डीवाईएफआई के जिला अध्यक्ष गगन गर्ग ने किया।
विज्ञापन
उधर नेताजी संघर्ष समिति ने पेशावर कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। श्रद्धांजलि सभा में समिति के उपाध्यक्ष प्रभात डंडरियाल, अरविंद गुप्ता, प्रभात डंडरियाल, राम सिंह प्रधान, सुशील बिरमानी, नवनीत गुसाईं, पंकज नेगी, प्रदीप कुकरेती, सतीश कुमार, रामलाल खंडूडी आदि मौजूद रहे।