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नीट पीजी काउंसिलिंग में दाखिले से वंचित सात छात्र पहुंचे हाईकोर्ट
Updated Sat, 14 Apr 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
एमडी, एमएस की सीटों पर नीट पीजी काउंसिलिंग से सीट आवंटित होने के बावजूद पुरानी फीस पर दाखिला नहीं मिलने पर सात छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुल्क को लेकर पैदा हुए असमंजस के बीच पहले चरण की काउंसिलिंग में 40 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं। हालांकि, हिमालयन मेडिकल कॉलेज का दावा है कि उसने आवंटित सीटों पर सभी छात्रों को पुराने शुल्क पर ही दाखिला दिया है।
प्रदेश में नीट पीजी की काउंसिलिंग के पहले चरण में स्टेट कोटे की 206 सीटों में से 163 सीटें आवंटित हुई थीं। जिसमें से 88 छात्रों ने ही फीस जमा कराई है। इनमें से 81 छात्रों का ही प्रवेश हुआ। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के सात छात्र ऐसे हैं, जिन्हें सीट आवंटित होने के बावजूद दाखिला नहीं मिला है। छात्रों का कहना था कि वे पुराने शुल्क पर ही दाखिला लेंगे। उनका आरोप है कि एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने नया शुल्क मांगा था। लिहाजा सभी छात्र शुक्रवार को हाईकोर्ट की शरण में चले गए। विवि ने पहले ही कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रत्याशा में पुराने शुल्क पर ही फिलहाल दाखिले होंगे, जबकि निजी मेडिकल कॉलेज का कहना था कि 11 जनवरी के अंतरिम आदेश के तहत नए शुल्क पर दाखिले ले रहे हैं।
वहीं, हिमालयन मेडिकल कॉलेज के दाखिलों पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार और विवि के निर्देशानुसार उन्होंने सभी छात्रों को फिलहाल पुराने शुल्क पर ही दाखिला दिया है। साथ ही छात्रों से शपथ पत्र लिया है कि हाईकोर्ट जो शुल्क तय करेगा, वह छात्रों को देय होगा। उन्होंने बताया कि सभी आवंटित सीटों पर प्रवेश दे दिया गया है। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि अब 15 अप्रैल से दूसरे चरण की काउंसिलिंग शुरू होगी। इसके तहत आवंटित सीटों पर तीन मई तक दाखिले लेने होंगे।
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नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में नहीं दिखा रुझान
नीट पीजी काउंसिलिंग के पहले चरण में अभ्यर्थियों का रुझान नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में कम नजर आया। कई वर्ष से नॉन क्लीनिकल कोर्सेज की सीटें खाली चल रही हैं। बृहस्पतिवार तक एसजीआरआर में पांच, हिमालयन विवि में तीन और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में तीन दाखिले हुए हैं। यही वजह है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में बांड की व्यवस्था खत्म करने और नॉन बांडेड अभ्यर्थियों के लिए शुल्क कम करने तक की सिफारिश कर चुका है।
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हमने सभी छात्रों को आवंटित सीटों पर दाखिले का प्रयास किया है। हाईकोर्ट के आदेश हमारे के लिए सर्वमान्य हैं। उच्च न्यायालय जो आदेश करेगा, उसके तहत ही हम शुल्क लेंगे।
-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज
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एमडी, एमएस की सीटों पर नीट पीजी काउंसिलिंग से सीट आवंटित होने के बावजूद पुरानी फीस पर दाखिला नहीं मिलने पर सात छात्रों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शुल्क को लेकर पैदा हुए असमंजस के बीच पहले चरण की काउंसिलिंग में 40 प्रतिशत सीटें ही भर पाई हैं। हालांकि, हिमालयन मेडिकल कॉलेज का दावा है कि उसने आवंटित सीटों पर सभी छात्रों को पुराने शुल्क पर ही दाखिला दिया है।
प्रदेश में नीट पीजी की काउंसिलिंग के पहले चरण में स्टेट कोटे की 206 सीटों में से 163 सीटें आवंटित हुई थीं। जिसमें से 88 छात्रों ने ही फीस जमा कराई है। इनमें से 81 छात्रों का ही प्रवेश हुआ। एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के सात छात्र ऐसे हैं, जिन्हें सीट आवंटित होने के बावजूद दाखिला नहीं मिला है। छात्रों का कहना था कि वे पुराने शुल्क पर ही दाखिला लेंगे। उनका आरोप है कि एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज ने नया शुल्क मांगा था। लिहाजा सभी छात्र शुक्रवार को हाईकोर्ट की शरण में चले गए। विवि ने पहले ही कहा था कि हाईकोर्ट के आदेश की प्रत्याशा में पुराने शुल्क पर ही फिलहाल दाखिले होंगे, जबकि निजी मेडिकल कॉलेज का कहना था कि 11 जनवरी के अंतरिम आदेश के तहत नए शुल्क पर दाखिले ले रहे हैं।
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वहीं, हिमालयन मेडिकल कॉलेज के दाखिलों पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि सरकार और विवि के निर्देशानुसार उन्होंने सभी छात्रों को फिलहाल पुराने शुल्क पर ही दाखिला दिया है। साथ ही छात्रों से शपथ पत्र लिया है कि हाईकोर्ट जो शुल्क तय करेगा, वह छात्रों को देय होगा। उन्होंने बताया कि सभी आवंटित सीटों पर प्रवेश दे दिया गया है। एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि अब 15 अप्रैल से दूसरे चरण की काउंसिलिंग शुरू होगी। इसके तहत आवंटित सीटों पर तीन मई तक दाखिले लेने होंगे।
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नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में नहीं दिखा रुझान
नीट पीजी काउंसिलिंग के पहले चरण में अभ्यर्थियों का रुझान नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में कम नजर आया। कई वर्ष से नॉन क्लीनिकल कोर्सेज की सीटें खाली चल रही हैं। बृहस्पतिवार तक एसजीआरआर में पांच, हिमालयन विवि में तीन और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में तीन दाखिले हुए हैं। यही वजह है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग नॉन क्लीनिकल कोर्सेज में बांड की व्यवस्था खत्म करने और नॉन बांडेड अभ्यर्थियों के लिए शुल्क कम करने तक की सिफारिश कर चुका है।
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हमने सभी छात्रों को आवंटित सीटों पर दाखिले का प्रयास किया है। हाईकोर्ट के आदेश हमारे के लिए सर्वमान्य हैं। उच्च न्यायालय जो आदेश करेगा, उसके तहत ही हम शुल्क लेंगे।
-भूपेंद्र रतूड़ी, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी, एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज