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सेठ काशीराम पोद्दार धर्मशाला की गई जमींदोज
Updated Sat, 17 Jun 2017 11:35 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
धर्मनगरी की लगभग सौ साल पुरानी एक और धर्मशाला का नामोनिशान मिटा दिया गया है। यहां अब आलीशान आधुनिक सुख-सुविधायुक्त होटल बनाने की तैयारी है।
नए दौर में आश्रम, धर्मशालाओं की शहर की पहचान को मिटाकर होटलों में बदला जा रहा है। शहर के व्यस्त क्षेत्र भोलागिरी रोड पर गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु तीर्थयात्रियों को विश्राम तथा ठहरने के लिए मई महीने तक सेठ काशीराम पोद्दार धर्मशाला थी। बताया जाता है कि कई साल पहले यह धर्मशाला बिक गई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद दान के पैसों से बनी धर्मशाला पर घन बजना शुरू हो गया था। शुक्रवार तक धर्मशाला को ध्वस्त कर जमींदोज कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि धर्मशाला के स्थान पर अब बहुमंजिला होटल बनाने की योजना है। यह क्षेत्र निर्माण के लिए प्रतिबंधित गंगा जी के 200 मीटर की परिधि में है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण किसी भी प्रकार के निर्माण का मानचित्र पास नहीं कर सकता है। इसके बावजूद धर्मशाला को जमींदोज करने वाली शहर की बड़ी होटल लॉबी ने जैसे-तैसे होटल निर्माण की ठान रखी है। इससे पहले पूर्व प्राधिकअपर रोड पर भी एक धर्मशाला का नामोनिशान मिटाकर विशाल भीमकाय व्यावसायिक निर्माण पूरा करा दिया गया है। जिलाधिकारी दीपक रावत ने प्राधिकरण वीसी के रूप में अपने अधीनस्थों को अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवई को दो-दो पत्र लिखे। इसके बावजूद उस भीमकाय निर्माण की ओर अधिकारी आंखें मूंदे रहे।
हरिद्वार।
धर्मनगरी की लगभग सौ साल पुरानी एक और धर्मशाला का नामोनिशान मिटा दिया गया है। यहां अब आलीशान आधुनिक सुख-सुविधायुक्त होटल बनाने की तैयारी है।
नए दौर में आश्रम, धर्मशालाओं की शहर की पहचान को मिटाकर होटलों में बदला जा रहा है। शहर के व्यस्त क्षेत्र भोलागिरी रोड पर गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु तीर्थयात्रियों को विश्राम तथा ठहरने के लिए मई महीने तक सेठ काशीराम पोद्दार धर्मशाला थी। बताया जाता है कि कई साल पहले यह धर्मशाला बिक गई। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद दान के पैसों से बनी धर्मशाला पर घन बजना शुरू हो गया था। शुक्रवार तक धर्मशाला को ध्वस्त कर जमींदोज कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि धर्मशाला के स्थान पर अब बहुमंजिला होटल बनाने की योजना है। यह क्षेत्र निर्माण के लिए प्रतिबंधित गंगा जी के 200 मीटर की परिधि में है। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण किसी भी प्रकार के निर्माण का मानचित्र पास नहीं कर सकता है। इसके बावजूद धर्मशाला को जमींदोज करने वाली शहर की बड़ी होटल लॉबी ने जैसे-तैसे होटल निर्माण की ठान रखी है। इससे पहले पूर्व प्राधिकअपर रोड पर भी एक धर्मशाला का नामोनिशान मिटाकर विशाल भीमकाय व्यावसायिक निर्माण पूरा करा दिया गया है। जिलाधिकारी दीपक रावत ने प्राधिकरण वीसी के रूप में अपने अधीनस्थों को अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवई को दो-दो पत्र लिखे। इसके बावजूद उस भीमकाय निर्माण की ओर अधिकारी आंखें मूंदे रहे।