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जागर प्रस्तुति से दिया लोक संस्कृति बचाने का संदेश
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पहाड़ से पलायन कर चुके लोगों को एकजुट करने के लिए शनिवार को नत्थनपुर, जोगीवाला स्थित विवाह स्थल पर अपणु पहाड़ अपणी संस्कति मंच की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पद्मश्री जागर सम्राट बसंती बिष्ट ने जागर की प्रस्तुति से लोक संस्कृति को बचाने का संदेश दिया। इसके अलावा कई अन्य लोक गायकों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र वीरेंद्र रावत ने शिरकत की।
नौकरी और अन्य कारणों से पहाड़ से पलायन कर चुके लोगों के लिए एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में लोक गायक किशन महिपाल, बीरू जोशी, मृणाल रतूड़ी, विक्रम और लोक गायिका हेमा करासी ने गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी प्रस्तुतियां पर जमकर नृत्य किया। इस अवसर पर मंच के पदाधिकारियों ने पहाड़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
मंच के अध्यक्ष प्रवीन पुरोहित ने कहा कि पहाड़ से पलायन होने के साथ ही पहाड़ की संस्कृति भी समाप्त होने की कगार पर है। नई पीढ़ी शहर की परंपराओं में ढल चुकी है। ऐसे में प्रदेश की संस्कृति को बचाने के लिए सबको सहयोग देना होगा। मंच का उद्देश्य पहाड़ के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। रोजगार की तलाश में लगभग 70 प्रतिशत गांव खाली हो चुके हैं।
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पूर्व काबीना मंत्री राजेंद्र भंडारी ने कहा कि पहाड़ में सुविधाओं से ही पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में स्वास्थ्य, शिक्षा बेहतर होनी चाहिए। जिससे पहाड़ का युवा शहर का रुख नहीं करेगा। हेमा पुरोहित ने कहा कि पहाड़ के पलायन और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। मंच की ओर से गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर मंच के संरक्षक कुलदीप सिंह रावत, उपाध्यक्ष आशीष राणा, सचिव अंकुर रौथाण आदि मौजूद रहे।
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पहाड़ से पलायन कर चुके लोगों को एकजुट करने के लिए शनिवार को नत्थनपुर, जोगीवाला स्थित विवाह स्थल पर अपणु पहाड़ अपणी संस्कति मंच की ओर से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पद्मश्री जागर सम्राट बसंती बिष्ट ने जागर की प्रस्तुति से लोक संस्कृति को बचाने का संदेश दिया। इसके अलावा कई अन्य लोक गायकों ने प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र वीरेंद्र रावत ने शिरकत की।
नौकरी और अन्य कारणों से पहाड़ से पलायन कर चुके लोगों के लिए एकजुट करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम में लोक गायक किशन महिपाल, बीरू जोशी, मृणाल रतूड़ी, विक्रम और लोक गायिका हेमा करासी ने गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी प्रस्तुतियां पर जमकर नृत्य किया। इस अवसर पर मंच के पदाधिकारियों ने पहाड़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया गया।
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मंच के अध्यक्ष प्रवीन पुरोहित ने कहा कि पहाड़ से पलायन होने के साथ ही पहाड़ की संस्कृति भी समाप्त होने की कगार पर है। नई पीढ़ी शहर की परंपराओं में ढल चुकी है। ऐसे में प्रदेश की संस्कृति को बचाने के लिए सबको सहयोग देना होगा। मंच का उद्देश्य पहाड़ के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। रोजगार की तलाश में लगभग 70 प्रतिशत गांव खाली हो चुके हैं।
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पूर्व काबीना मंत्री राजेंद्र भंडारी ने कहा कि पहाड़ में सुविधाओं से ही पलायन को रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहाड़ में स्वास्थ्य, शिक्षा बेहतर होनी चाहिए। जिससे पहाड़ का युवा शहर का रुख नहीं करेगा। हेमा पुरोहित ने कहा कि पहाड़ के पलायन और संस्कृति को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। मंच की ओर से गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस अवसर पर मंच के संरक्षक कुलदीप सिंह रावत, उपाध्यक्ष आशीष राणा, सचिव अंकुर रौथाण आदि मौजूद रहे।