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गंगा से विलुप्त हो रही डॉल्फिन को बचाने का काम शुरू

Thu, 09 Aug 2018 02:12 AM IST
Updated Thu, 09 Aug 2018 02:12 AM IST
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गंगा से विलुप्त हो रही डॉल्फिन को बचाने का काम शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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गंगा से विलुप्त हो रही डॉल्फिन बचाई जाएगी। दो साल पहले नमामि गंगे अभियान के तहत वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) की ओर से तैयार की गई 20 हजार करोड़ रुपये की डीपीआर पर काम शुरू हो गया है। इसके तहत, पांच राज्यों में पौधों की 150 से ज्यादा प्रजातियां रोपी जाएंगी। राजभवन में चल रहे टॉपर्स कॉन्क्लेव में एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता ने यह जानकारी दी।
बुधवार को कॉन्क्लेव के तीसरे दिन डॉ. सविता ने गंगा के जीर्णोद्धार के लिए तैयार की गई डीपीआर की जानकारी मेधावियों को दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1982 में गंगा में लगभग पांच हजार डॉल्फिन मछलियां थीं, जिनकी संख्या घटकर महज 1800 रह गई है। अब केंद्र सरकार ने डॉल्फिन को बचाने के लिए काम शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि गंगा के जीर्णोद्धार के लिए नदी के दोनों किनारों पर दो से पांच किलोमीटर तक वनीकरण करना होगा। गंगा के 2525 किलोमीटर लंबे किनारों पर छोटे-बड़े 172 शहर हैं। इन सभी जगहों पर पौधरोपण के 41 प्लांटेशन मॉडल तैयार किए गए हैं।
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उन्होंने बताया कि योजना के तहत नदी के दोनों ओर वनीकरण को बढ़ावा देकर औषधीय गुणों से युक्त पौधे रोपे जाएंगे। इससे नदी के औषधीय गुणों में भी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने बताया कि गंगा की अविरलता को बनाए रखने के लिए वाराणसी, इलाहाबाद और कानपुर में रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना शुरू करने की जरूरत है। इसके बाद कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौरियाल ने अचीविंग प्रोफेशनल सक्सेज विषय पर होनहारों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सफ लता प्राप्त करने के लिए उच्च प्रदर्शन की आवश्यकता होती है। नकारात्मक सोच को भी अपने पक्ष में ले जाकर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
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पांच राज्यों में छह हजार खास क्षेत्र
एफआरआई की निदेशक डॉ. सविता ने बताया कि नमामि गंगा के तहत पांच राज्यों में वैसे तो आठ हजार साइट्स को चिह्नित किया गया है, लेकिन इनमें से छह हजार खास क्षेत्र ऐसे हैं, जहां बडे़ पैमाने पर प्राथमिकता के तौर पर पौधरोपण किया जाएगा। पर्वतीय क्षेत्रों में अलग और मैदानी इलाकों में अलग से तरह के पौधे रोपे जाएंगे।

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इनसेट- फोटो अलग से है
होनहारों ने लिया विज्ञान का व्यवहारिक ज्ञान
टॉपर्स कॉन्क्लेव के तीसरे दिन दो सत्र के बाद टॉपर्स ने आंचलिक विज्ञान केंद्र, झाझरा का भ्रमण किया। उन्होंने यहां स्थापित गैलरी, थ्रीडी फिल्म और तारामंडल शो में भी हिस्सा लिया। केंद्र प्रभारी डॉ. डीपी उनियाल ने उन्हें यूकॉस्ट और केंद्र के विषय में जानकारी दी। इस मौके पर ग्लोबन वॉर्मिंग : कारण, प्रभाव एवं न्यूनीकरण उपाय विषय पर भी उन्हें जानकारी दी गई।
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