{"_id":"5a4be77a4f1c1bce6d8b78a7","slug":"101514923898-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोपहर तक हड़ताल पर रहे प्राइवेट डॉक्टर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोपहर तक हड़ताल पर रहे प्राइवेट डॉक्टर
Updated Wed, 03 Jan 2018 01:45 AM IST
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
नेशनल मेडिकल कमीशन को लागू किए जाने के निर्णय के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े प्राइवेट चिकित्सक मंगलवार को दोपहर तक हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों ने पहले शाम छह बजे तक हड़ताल पर जाने का एलान किया था। हालांकि लोक सभा से बिल को प्रवर समिति में भेजे जाने के बाद उन्होंने दोपहर तीन बजे हड़ताल वापस ले ली। चिकित्सकों के हड़ताल वापस लेने से मरीजों ने राहत की सांस ली।
मंगलवार सुबह छह बजे से आईएमए से जुड़े राजधानी के अधिकांश चिकित्सक हड़ताल पर रहे। आईएमए से जुड़े अस्पतालों में भी हड़ताल का असर दिखा। उन्होंने ओपीडी का बहिष्कार किया। हालांकि भर्ती मरीजों और इमरजेंसी में सेवाएं मिलने से हड़ताल का बहुत ज्यादा असर नहीं दिखा। दोपहर बाद जैसे ही बिल समिति को भेजे जाने की जानकारी मिली, केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रदेश संगठन ने राज्य में हड़ताल वापस ले ली। इसके बाद सभी अस्पतालों में सामान्य कामकाज हुआ। आईएमए सचिव डीडी चौधरी ने बताया कि संगठन बिल प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग कर रहा था। बिल समिति को भेजे जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने एक दिवसीय हड़ताल समय से पहले समाप्त कर दी है।
प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी पर भी देखा गया। शहर के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ रही। दून, कोरोनेशन और प्रेमनगर अस्पताल में अन्य दिनों की तुलना में 50 से 100 मरीज तक अतिरिक्त रहे।
विज्ञापन
................................
विसंगतियों को दूर किए बिना स्वीकार नहीं बिल
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा मौजूदा प्रावधानों के साथ बिल का होगा विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पदाधिकारियों ने मौजूदा प्रावधानों के साथ नेशनल मेडिकल कमीशन को लागू किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विसंगितयों को दूर किए बिना बिल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बिल की विसंगतियों और खामियों को दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के सुझावों को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए आईएमए के सचिव डीडी चौधरी ने कहा कि कमीशन भविष्य के लिहाज से ठीक नहीं है। बिल लागू होने से गरीब और अपवंचित वर्ग के प्रतिभावान युवाओं को नुकसान झेलना पड़ेगा। पत्रकार वार्ता में डा. बीएस जज, डा. संजय उप्रेती, डा. अजय खन्ना, डा. आलोक सेमवाल, डा. गिरीश गोयल, डा. एसएस असवाल और डा. जेपी शर्मा समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
....................
बिल में यह बताई खामियां
-बिल में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज खोलने वालों को छूट दी गई है, इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
-नए मेडिकल कॉलेज की अनुमति लेने की प्रक्रिया में कठोर नियम न होने से छात्रों को नुकसान होगा।
-कॉलेज प्रबंधन 60 फीसदी सीटों पर फीस खुद तय करेगा। इससे गरीब व मेधावी छात्रों को नुकसान होगा।
-फीस बढ़ने से सामान्य घरों के बच्चों को परेशानी होगी।
-बढ़ी हुई फीस का असर उपचार पर भी पड़ेगा। उपचार भी महंगा होगा।
-सख्त नियम न होने के चलते मेडिकल कॉलेज जमकर मनमानी करेंगे।
-कमीशन में केवल पांच राज्यों को प्रतिनिधित्व मिलेगा, अन्य राज्यों की बात नहीं सुनी जाएगी।
-राज्य में काउंसिल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। छोटे-मोटे काम के लिए भी दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ेगी।
..........................
ब्रिज कोर्स का भी विरोध
पदाधिकारियों ने कहा कि बीएएमएस चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स के बाद एमबीबीएस के समकक्ष मान्यता दिए जाने का निर्णय पूरी तरह गलत है। इससे कोई भी छात्र एमबीबीएस के बजाय बीएएमएस और ब्रिज कोर्स को ज्यादा तवज्जो देगा। इससे कई तरह की दिक्कतें पैदा होगी।
विज्ञापन
नेशनल मेडिकल कमीशन को लागू किए जाने के निर्णय के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े प्राइवेट चिकित्सक मंगलवार को दोपहर तक हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों ने पहले शाम छह बजे तक हड़ताल पर जाने का एलान किया था। हालांकि लोक सभा से बिल को प्रवर समिति में भेजे जाने के बाद उन्होंने दोपहर तीन बजे हड़ताल वापस ले ली। चिकित्सकों के हड़ताल वापस लेने से मरीजों ने राहत की सांस ली।
मंगलवार सुबह छह बजे से आईएमए से जुड़े राजधानी के अधिकांश चिकित्सक हड़ताल पर रहे। आईएमए से जुड़े अस्पतालों में भी हड़ताल का असर दिखा। उन्होंने ओपीडी का बहिष्कार किया। हालांकि भर्ती मरीजों और इमरजेंसी में सेवाएं मिलने से हड़ताल का बहुत ज्यादा असर नहीं दिखा। दोपहर बाद जैसे ही बिल समिति को भेजे जाने की जानकारी मिली, केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रदेश संगठन ने राज्य में हड़ताल वापस ले ली। इसके बाद सभी अस्पतालों में सामान्य कामकाज हुआ। आईएमए सचिव डीडी चौधरी ने बताया कि संगठन बिल प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग कर रहा था। बिल समिति को भेजे जाने के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने एक दिवसीय हड़ताल समय से पहले समाप्त कर दी है।
विज्ञापन
प्राइवेट चिकित्सकों की हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों की ओपीडी पर भी देखा गया। शहर के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में भीड़ रही। दून, कोरोनेशन और प्रेमनगर अस्पताल में अन्य दिनों की तुलना में 50 से 100 मरीज तक अतिरिक्त रहे।
विज्ञापन
................................
विसंगतियों को दूर किए बिना स्वीकार नहीं बिल
आईएमए पदाधिकारियों ने कहा मौजूदा प्रावधानों के साथ बिल का होगा विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पदाधिकारियों ने मौजूदा प्रावधानों के साथ नेशनल मेडिकल कमीशन को लागू किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विसंगितयों को दूर किए बिना बिल को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बिल की विसंगतियों और खामियों को दूर करने की मांग की। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन के सुझावों को इसमें अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए। मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए आईएमए के सचिव डीडी चौधरी ने कहा कि कमीशन भविष्य के लिहाज से ठीक नहीं है। बिल लागू होने से गरीब और अपवंचित वर्ग के प्रतिभावान युवाओं को नुकसान झेलना पड़ेगा। पत्रकार वार्ता में डा. बीएस जज, डा. संजय उप्रेती, डा. अजय खन्ना, डा. आलोक सेमवाल, डा. गिरीश गोयल, डा. एसएस असवाल और डा. जेपी शर्मा समेत अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।
....................
बिल में यह बताई खामियां
-बिल में प्राइवेट मेडिकल कॉलेज खोलने वालों को छूट दी गई है, इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
-नए मेडिकल कॉलेज की अनुमति लेने की प्रक्रिया में कठोर नियम न होने से छात्रों को नुकसान होगा।
-कॉलेज प्रबंधन 60 फीसदी सीटों पर फीस खुद तय करेगा। इससे गरीब व मेधावी छात्रों को नुकसान होगा।
-फीस बढ़ने से सामान्य घरों के बच्चों को परेशानी होगी।
-बढ़ी हुई फीस का असर उपचार पर भी पड़ेगा। उपचार भी महंगा होगा।
-सख्त नियम न होने के चलते मेडिकल कॉलेज जमकर मनमानी करेंगे।
-कमीशन में केवल पांच राज्यों को प्रतिनिधित्व मिलेगा, अन्य राज्यों की बात नहीं सुनी जाएगी।
-राज्य में काउंसिल का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। छोटे-मोटे काम के लिए भी दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ेगी।
..........................
ब्रिज कोर्स का भी विरोध
पदाधिकारियों ने कहा कि बीएएमएस चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स के बाद एमबीबीएस के समकक्ष मान्यता दिए जाने का निर्णय पूरी तरह गलत है। इससे कोई भी छात्र एमबीबीएस के बजाय बीएएमएस और ब्रिज कोर्स को ज्यादा तवज्जो देगा। इससे कई तरह की दिक्कतें पैदा होगी।