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Amar Ujala Samvad: सहवाग का बड़ा बयान- गंभीर के लिए नहीं कोई चुनौती, खिलाड़ियों के लिए अग्नि परीक्षा का समय
Mon, 02 Sep 2024 01:19 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Mon, 02 Sep 2024 01:19 PM IST
सार
इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व ओपनर और मुल्तान के सुल्तान के नाम से मशहूर वीरेंद्र सहवाग ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने क्रिकेट से जुड़ी कुछ दिलचस्प घटनाओं पर बातचीत की।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
साइबर सिटी गुरुग्राम में हो रहे अमर उजाला के वैचारिक संवाद कार्यक्रम में देश की जानी मानी शख्सियतों, नीति नियंताओं, विचारकों और विशेषज्ञों के विचार जानने और उनसे रूबरू होने का मौका मिल रहा है। इस कार्यक्रम में खेल और फिल्म जगत की हस्तियों से लेकर राजनीति के पुरोधा जुटे हैं। इस कार्यक्रम में भारत के पूर्व ओपनर और मुल्तान के सुल्तान के नाम से मशहूर वीरेंद्र सहवाग भी पहुंचे और क्रिकेट से जुड़ी कुछ दिलचस्प घटनाओं पर बातचीत की। वर्ष 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट में तिहरा शतक लगाते हुए 319 रन बनाने वाले भारतीय टीम के पूर्व क्रिकेटर सहवाग से अमर उजाला के मंच पर खेलों पर विस्तार से चर्चा की।
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वीरेंद्र सहवाग
- फोटो : PTI
आइये जानते हैं कि अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में वीरेंद्र सहवाग किन मुद्दों पर चर्चा की...
सवाल: क्रिकेटर की जिंदगी कठिन होती है। अनुशासन में बंधकर काम करना होता है रिटायरमेंट के बाद क्या क्रिकेटर की लाइफ बदल जाती है?
जवाब: ऐसा नहीं है। 16-17 साल की उम्र से जब खेलना शुरू करता है तो उसे अनुशासन में रहना पड़ता है। सुबह उठना पड़ता है, व्यायाम के लिए जाना पड़ता है, प्रैक्टिस करनी पड़ती है क्योंकि वह एक अनुशासन में रहता है। हालांकि, जब उसे टीम इंडिया के लिए खेलना होता है तो उसे अलग तरह के अनुशासन का सामना करना पड़ता है। तब उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता, ताकि शरीर बेहतर रहे और मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सके। जब एक खिलाड़ी रिटायर होता है, तो उसके बाद लाइफ में बदलाव होता है। तब भी आप भी व्यस्त होते हैं। लेकिन आजकल कमेंटेटर बॉक्स में भी बहुत स्कोप है। इतने सारे लैंग्वेज में कमेंट्री होती है तो बहुत सारे क्रिकेटरों को आना पड़ता है। तो बहुत व्यस्त जिंदगी हो गई है। हालांकि, मैं 35 साल की उम्र में रिटायर हुआ और जो काम मैं खेलते हुए नहीं कर सका, मैं चौके छक्के मारकर लोगों को खुशी जरूर देता था, लेकिन लोगों को हंसा नहीं पाता था, कमेंट्री बॉक्स में जरूर किस्से कहानियां सुनाता हूं, जिससे लोग आनंद भी लेते हैं और हंसते भी हैं।
सवाल: सोशल मीडिया पर आप बहुत ज्यादा चर्चित हैं। वहां के चौके-छक्के मैदान के चौके-छक्कों से ज्यादा चर्चित हैं?
जवाब: सोशल मीडिया को पहले इतना अहमियत कोई देता नहीं था। लेकिन अब सोशल मीडिया एक्टिव हो गया है। फिर मैंने भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना शुरू किया। फिर मैंने सोचा कि सोशल मीडिया पर मैं क्या कर सकता हूं, किस तरह लोगों का मनोरंजन कर सकता हूं। मैंने ऐसी विशेष सत्र शुरू की ताकि लोगों को लगे कि हां ये कुछ नया है। तो मैंने पहला पोस्ट रोहित शर्मा को लेकर किया। उसमें लिखा कि जब रोहित पैदा हुए तो डॉक्टर ने कहा लड़का नहीं हुआ है, हिटमैन हुआ है। तो ये काफी चर्चित हुआ। तो लोगों को लगा हां यार ये कुछ नया है। तो पांच छह मिलियन की फॉलोइंग हुई। मुझे नहीं पता था कि लोग इतना पसंद करेंगे और उन्हें खुशी मिलेगी। तो मैंने इसी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। तो मेरे मन में जो आता है उसे लिख देता हूं। मैं वो पोस्ट करता हूं, जो मुझे लगता है कि ये सही है और ये लोगों को पसंद आती है। कई विवाद भी हुए, क्योंकि अच्छी चीजें कम हाइलाइट किया जाता है, खराब चीजें ज्यादा हाइलाइट की जाती हैं।
सवाल: क्रिकेट की जो आज की प्रगति है, उसे किस प्रकार देखते हैं?
जवाब: क्रिकेट में बहुत बदलाव आया है। क्रिकेट बहुत फास्ट हो गई है, देखने में मजा आने लगा है। क्रिकेट फाइनेंशियली भी मजबूत हो गई है। भारतीय टीम सबसे ज्यादा मजबूत है, भारतीय खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पैसे मिलते हैं। बहुत बदलाव है। भारत के घरेलू क्रिकेट में भी बदलाव आया है। अब सेलेक्टर्स के पास ज्यादा ऑप्शंस हैं। आईपीएल से भी भारतीय क्रिकेट मजबूत हुई है। अब इसका प्रदर्शन भी मायने रखता है और चयन के लिए अहम पैमाना है। हालांकि, अभी भी कुछ लोग बोलते हैं कि इसका चयन हुआ और उसका चयन नहीं हुआ है। तो ये कुछ बदलाव हैं जो मैंने पिछले 10 वर्षों में देखे हैं।
सवाल: क्या आपको लगता है कि एक समय ऐसा आएगा जब महिला क्रिकेटर ज्यादा चर्चित हो जाएंगी?
जवाब: ज्यादा तो नहीं कहूंगा, लेकिन एक अच्छी चीज है कि जो सैलरी भारतीय पुरुष खिलाड़ियों को मिलती है, उतनी ही भारतीय महिलाओं क्रिकेटरों को भी मिलती है। अगर वह बेहतर क्रिकेट खेलेंगी और विश्व कप जीतेंगी तो उनका नाम और होगा। भारत में जो लड़कियां हैं वह इस खेल को अपनाएं ताकि बेहतर करियर बन सके।
सवाल: क्या टी20 क्रिकेट का असर टेस्ट क्रिकेट पर पड़ रहा है कि खिलाड़ी जल्दी जल्दी खेलकर आउट हो जा रहे हैं?
जवाब: बल्लेबाजों का माइंड जरूर चेंज हुआ है टी20 से, क्योंकि टी20 में आप 20 ओवर में 200 रन बनाते हो। तो ये माइंडसेट टेस्ट क्रिकेट में जरूर बदला है। पहले तीन रन प्रति ओवर बनते थे और अब पांच या छह रन प्रति ओवर भी बनने लगे हैं। जिससे कि जल्दी रन बनते हैं और खिलाड़ी आउट भी होते हैं। इससे विकेट भी बहुत मिल रहे। तीन दिन में मैच भी खत्म हो रहे। ये एंटरटेनिंग भी है क्योंकि आप अगर एक टेस्ट मैच खेलने जा रहे हो तो मजा आ रहा है क्योंकि रन भी बन रहे हैं विकेट भी गिर रहे हैं तो मजा आ रहा है। मुझे भी टेस्ट क्रिकेट देखने में मजा आ रहा और जब ये मैच होते हैं तो टीवी के आगे बैठ जाता हूं।
सवाल: भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को बहुत अच्छा खेलते थे। एक समय भारतीय बल्लेबाजों को स्पिनर्स के खिलाफ सबसे मजबूत माना जाता था, लेकिन हालिया दिनों में देखा गया कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को अच्छा नहीं खेल पा रहे और उनके सामने बेबस नजर आते?
जवाब: इसका एक कारण यह है कि जितनी व्हाइट बॉल क्रिकेट ज्यादा होगी, उतने स्पिनर्स कम आएंगे, क्योंकि टी20 क्रिकेट में आप 24 गेंद डालते हो फ्लाइट नहीं करते हो, तो आपके अंदर स्किल नहीं आती कि आप बल्लेबाज को आउट कर सको। मुझे लगता कि वो एक कारण हो सकता है। भारतीय खिलाड़ी डोमैस्टिक क्रिकेट भी कम खेलते हैं। डोमैस्टिक क्रिकेट में आपको ज्यादा स्पिन खेलने को मिलती बजाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के। तो वो भी एक कारण हो सकता है। मुझे लगता है कि क्वालिटी स्पिनर हैं नहीं भारत में अभी जिनको मैं देख रहा हूं कि वो फ्लाइट अच्छी करते हैं और विकेट ले सकें। हमारे समय में द्रविड़, सचिन, गांगुली, लक्ष्मण, युवराज, हम सभी डोमैस्टिक क्रिकेट भी खेलते थे, चाहे वह वनडे खेलें या फोर डे खेलें तो काफी डोमैस्टिक क्रिकेट खेलते थे। उसमें हम काफी स्पिनरों को खेलते थे, लेकिन आज के व्यस्त कार्यक्रम में खिलाड़ियों को समय कम मिल रहा है। अलग अलग लीग हैं, जिसकी वजह से खिलाड़ी के स्पिन को खेलने की स्किल डेवलप नहीं हो पा रही।
सवाल: टी20 का असर टेस्ट क्रिकेट पर बहुत ज्यादा पड़ा है। आईसीसी भी सहमत है इस बात से। MCC के सुझाव भी आ रहे हैं, किस तरह के बदलाव आप देखते हैं?
जवाब: नहीं मैं तो किसी तरह का बदलाव नहीं देखना चाहता। टेस्ट क्रिकेट एक ऐसा फॉर्मेट है, जिसे लोग दिलचस्पी से देखने आते हैं, भले ही वह पांच दिन का हो।
सवाल: गंभीर हेड कोच बन गए हैं। आप किस तरह की जिम्मेदारी उन पर देखते हैं?
जवाब: मुझे लगता नहीं कि ज्यादा कुछ चुनौती है, क्योंकि वहां और भी प्रोफेशनल्स हैं। हाल ही में खिलाड़ियों ने टी20 विश्व कप जीता है, खिलाड़ियों को पता है कि उनका रोल क्या है। गंभीर के आने से खिलाड़ियों को एक क्लैरिटी मिल जाएगी कि ये रोल है, आपको ये करना है। तो ये एक बेनिफिट मिलेगा भारतीय टीम को। गंभीर की चुनौतियां कम होंगी और खिलाड़ियों की चुनौतियां ज्यादा होंगी क्योंकि उन्हें लगेगा कि हमने टी20 विश्व कप जीता है तो अब हम चैंपियंस ट्रॉफी जीतें या फिर वनडे विश्व कप जीतें या फिर टेस्ट चैंपियनशिप जीतें। तो खिलाड़ियों पर ज्यादा चुनौतियां होंगी बजाय कोच के। क्योंकि गंभीर उनकी मदद करने के लिए वहां हैं।
सवाल: क्या आपको आईपीएल में या फिर भारतीय टीम के कोच के तौर पर देखेंगे?
जवाब: मुझे लगता है कि भारतीय टीम के लिए तो नहीं, लेकिन आईपीएल टीम के लिए किसी के लिए मौका आता है तो जरूर मैं देख सकता हूं। क्योंकि मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो वापस से वही रुटीन होगी जो मैंने 15 साल में किया है। 15 साल आप भारतीय टीम के लिए खेले, साल में आठ महीने घर से बाहर रहे। अभी मेरे बच्चे 14 और 16 साल के हैं और उन्हें मेरी जरूरत है। दोनों क्रिकेट खेलते हैं। एक ऑफ स्पिनर है और एक ओपनिंग बल्लेबाज है। उन्हें क्रिकेट सिखानी है और खिलानी है। उनके साथ समय बिताना है। अगर मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो टीम इंडिया के खिलाड़ी आठ महीने बाहर रहते हैं तो ये मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाएगी। फिर मैं अपना समय बच्चों को नहीं दे पाऊंगा। लेकिन हां अगर आईपीएल में किसी कोच की या मेंटर का रोल मुझे मिलता है तो जरूर मैं इस पर सोचूंगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि व्हाइट बॉल और रेड बॉल टीम के कप्तान अलग-अलग हों और दो टीमें खेलें?
जवाब: हो सकता है और हमारे समय में भी ऐसा था। वनडे और टेस्ट टीम के खिलाड़ी बदलते थे। कुछ खिलाड़ी टेस्ट और वनडे दोनों खेलते थे, कुछ टेस्ट खेलते थे और कुछ सिर्फ वनडे खेलते थे। वो बदलाव जरूर लाया जा सकता है और इस तरह से खिलाड़ियों को रेस्ट भी दिया जा सकता है। होना चाहिए ये। और देशों में भी ऐसा होता है, कुछ देशों ने तीन कप्तान बनाए हैं। टेस्ट का अलग, वनडे और टी20 के अलग-अलग। तो भारत भी इस बारे में सोच सकता है, क्योंकि बदलाव तो होता रहता है और बदलाव करना कोई बुरी बात नहीं है।
सवाल: जब आप पिच पर होते थे और रन नहीं बना पाते थे तो भजन गाने लगते थे। कौन सा फेवरेट भजन था आपका?
जवाब: ऐसा होता है कि जब हम बुरे वक्त में होते हैं तो भगवान को याद करते हैं। अभी तो हम अच्छे वक्त में बैठे हैं, कौन भगवान को याद कर रहा है यहां? तो मेरे भी जब रन बनते थे तो मैं भी गाना गाता था चिट्टियां कलाइयां वे, जब रन नहीं बनते थे तो भगवान याद आते थे, 300 साल, गुरु दे नाल..तो ये भी गुनगुना था मैं। मुझे लगता था कि गुरु को याद करने से मेरे रन बन जाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एक दिन के गुनगान से कुछ नहीं मिलने वाला। जिंदगी में आपको हर रोज भगवान को याद करना होगा तभी कुछ मिलता है। तो वो समय भी देखा है मैंने कि जब रन नहीं बनते थे तो प्रार्थना शुरू हो जाती थी। एक अच्छी चीज यह रही है कि ऐसा समय मेरे जीवन में कम रहा है तो यह अच्छी बात रही है। भगवान की कृपा रही है, लोगों का प्यार मिला है तो भजन कम गाए हैं मैंने।
सवाल: जब आपने पाकिस्तान में 300 रन बनाए तो आपको मुल्तान के सुल्तान की उपाधि दी गई। क्या आपको याद है कि किसने ये उपाधि दी थी?
जवाब: ये तो याद नहीं, अगले दिन मीडिया में आया था। तो मुझे लगता है कि मीडिया में किसी ने ये लाइन दी थी तो फेमस हो गया मुल्तान का सुल्तान। फिर होड़ लग गई थी कि सहवाग को अगला नाम क्या दें, तो उन्होंने नजफगढ़ का नवाब रख दिया। मीडिया के नाम दिए हुए हैं। मुझे नाम याद नहीं, लेकिन काम मीडिया का ही है।
सवाल: जब आप मैदान पर होते थे तो किस गेंदबाज को भूत बनाने में मजा आता था?
जवाब: वैसे तो सभी का भूत बनाने में मजा आया, लेकिन अगर किसी एक खास गेंदबाज की बात करें तो वह शोएब अख्तर थे। क्योंकि वो इतनी तेज डालते थे तो हमें डरा के रखते थे। जब भी हम प्रैक्टिस में मिलते थे तो कहते थे कल मिल तेरा हेल्मेट तोड़ूंगा। और जब मैं 300 रन बनाता था तो मैं कहता था भाई हेल्मेट क्या बैट भी नहीं टूटा। तू हेल्मेट तोड़ने की बात करता था। तो उनके साथ मजा आता था गुफ्तगु करके। दोस्ती भी थी, खाना भी लाते थे हमारे लिए। पाकिस्तान में जब हम गए तो हमारे लिए खूब ढेर सारा खाना लाए थे। मटन लाए थे और पूरी भारतीय टीम ने खाया था, लेकिन उसमें बच गया था। तो जब अख्तर डेक्ची लेने आए तो हमसे कहा कि ये क्या तुम इतना भी नहीं खा पाए, इतना तो मैं और मिस्बाह उल हक अकेले खा जाते। तो वो और मिस्बाह खूब खाते थे। फिर अगले दिन जब मैं रन बनाता था तो कहते थे कि यार मैंने खाना भी खिलाया और तू मुझे ही रन मार रहा है। मैंने कहा खाना खिलाया है इसलिए प्यार से मार रहा हूं, नहीं खिलाया होता तो बदतमीजी से मारता।
सवाल: जब आप छोटे थे तो अपने स्कूटर पर खूब घूमते थे और इस स्कूटर पर नेहरा को बैठाकर घूमते थे। मेरा सवाल यह है कि क्या आपका चालान कभी काटा पुलिस ने या फिर सेटिंग करके बच निकले?
जवाब: जब मैं छोटा था तो स्कूटर क्या साइकिल नहीं मिली थी। स्कूटर तब मिला जब मैं 18 से ऊपर हो गया और रणजी में डेब्यू हुआ था। क्योंकि उस समय 40-50 हजार रुपये मिलते थे। जो स्कूटर आया था उसमें भी दोस्त से उधार लिए थे। मैं नजफगढ़ से फिरोजशाह कोटला जाता था तो काफी दूरी तय करनी पड़ती थी। फिर नेहरा को पता चला तो कहता है कि तू नजफगढ़ से आता है तो दिल्ली कैंट से क्यों नहीं आता। मैंने कहा दिल्ली कैंट दूर पड़ता है। तो उसने कहा नहीं दिल्ली कैंट से आ। मैंने रूट बदला और जब मैं उसके घर पहुंचता था तो उसे जगाता था भाई उठ ले अब जाना है। उनके पिता ऑमलेट और दूध लाते थे तो मेरे लिए भी ले आते थे और मैं भी खाता था। फिर उनके पिता कपड़े वगैरह प्रेस करते थे तो नेहरा कहता था मेरा खाना भी खा ले, तो मैं उसके खाने भी खाता था। उनके पिता कहते थे कि वाह यार दोनों ने खा लिया, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि मैं ही खा गया। फिर मैं उसे बिठाकर ले जाता था। शर्त यह थी कि जाते वक्त मैं ले जाऊंगा और आते वक्त नेहरा चलाएगा। चलान सुबह सुबह कौन पुलिस वाला खड़ा होता है चलान काटने के लिए। आते वक्त हम अपने क्रिकेट के हेलमेट पहनते थे। हमने कभी रेड लाइट जंप नहीं की। हां कभी किट बैग के लिए रोकता था तो हमारी शक्ल देखकर छोड़ देता था कहते थे कि खिलाड़ी लोग हैं जाने दो।
सवाल: हरियाणा में आप स्कूल चलाते हैं। स्कूल में आमतौर पर पढ़ाई होती है, लेकिन क्या आपके स्कूल में स्पोर्ट्स पर जोर है?
जवाब: मैं शुक्रगुजार हूं भूपिंदर सिंह हुड्डा जी का जिन्होंने मुझे बुलाकर जमीन दी वहां पर। मुझे सहवाग क्रिकेट एकेडमी और सहवाग इंटरनेशनल स्कूल खोलने का मौका दिया। मेरा स्कूल बेसिकली स्पोर्ट्स ओरियेंटेड स्कूल है। सीबीएसई की पढ़ाई होती है। सुबह नौ से तीन पढ़ाई होती है और शाम चार से छह खेल को तरजीह देते हैं। क्रिकेट खास खेला जाता है। वहां 25-26 विकेट हैं क्रिकेट के लिए प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड है। झज्जर की जिला टीम में ज्यादातर हमारे बच्चे खेलते हैं। हरियाणा के लिए भी हर साल दो या तीन बच्चे सेलेक्ट होते हैं। मेरा मानना है कि हर बच्चे को स्पोर्ट्स जरूर खेलना चाहिए। अगर आप स्पोर्ट्स खेलते हैं तो आपकी मसल पावर बढ़ती है और मेमरी बढ़ती है। पढ़ाई के लिए आपको चेयर पर बैठना होता है और अगर आप फिट हैं तभी चेयर पर बैठ सकते हैं। स्पोर्ट्स जरूर खेलने चाहिए बच्चों को। हमारे स्कूल में क्रिकेट के अलावा फुटबॉल, स्विमिंग, बास्केटबॉल और बैडमिंटन, लॉन टेनिस की फैसिलिटी मौजूद है और बच्चे खेलते हैं।
सवाल: क्रिकेटर की जिंदगी कठिन होती है। अनुशासन में बंधकर काम करना होता है रिटायरमेंट के बाद क्या क्रिकेटर की लाइफ बदल जाती है?
जवाब: ऐसा नहीं है। 16-17 साल की उम्र से जब खेलना शुरू करता है तो उसे अनुशासन में रहना पड़ता है। सुबह उठना पड़ता है, व्यायाम के लिए जाना पड़ता है, प्रैक्टिस करनी पड़ती है क्योंकि वह एक अनुशासन में रहता है। हालांकि, जब उसे टीम इंडिया के लिए खेलना होता है तो उसे अलग तरह के अनुशासन का सामना करना पड़ता है। तब उसे स्कूल नहीं जाना पड़ता, ताकि शरीर बेहतर रहे और मैच में बेहतर प्रदर्शन कर सके। जब एक खिलाड़ी रिटायर होता है, तो उसके बाद लाइफ में बदलाव होता है। तब भी आप भी व्यस्त होते हैं। लेकिन आजकल कमेंटेटर बॉक्स में भी बहुत स्कोप है। इतने सारे लैंग्वेज में कमेंट्री होती है तो बहुत सारे क्रिकेटरों को आना पड़ता है। तो बहुत व्यस्त जिंदगी हो गई है। हालांकि, मैं 35 साल की उम्र में रिटायर हुआ और जो काम मैं खेलते हुए नहीं कर सका, मैं चौके छक्के मारकर लोगों को खुशी जरूर देता था, लेकिन लोगों को हंसा नहीं पाता था, कमेंट्री बॉक्स में जरूर किस्से कहानियां सुनाता हूं, जिससे लोग आनंद भी लेते हैं और हंसते भी हैं।
सवाल: सोशल मीडिया पर आप बहुत ज्यादा चर्चित हैं। वहां के चौके-छक्के मैदान के चौके-छक्कों से ज्यादा चर्चित हैं?
जवाब: सोशल मीडिया को पहले इतना अहमियत कोई देता नहीं था। लेकिन अब सोशल मीडिया एक्टिव हो गया है। फिर मैंने भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना शुरू किया। फिर मैंने सोचा कि सोशल मीडिया पर मैं क्या कर सकता हूं, किस तरह लोगों का मनोरंजन कर सकता हूं। मैंने ऐसी विशेष सत्र शुरू की ताकि लोगों को लगे कि हां ये कुछ नया है। तो मैंने पहला पोस्ट रोहित शर्मा को लेकर किया। उसमें लिखा कि जब रोहित पैदा हुए तो डॉक्टर ने कहा लड़का नहीं हुआ है, हिटमैन हुआ है। तो ये काफी चर्चित हुआ। तो लोगों को लगा हां यार ये कुछ नया है। तो पांच छह मिलियन की फॉलोइंग हुई। मुझे नहीं पता था कि लोग इतना पसंद करेंगे और उन्हें खुशी मिलेगी। तो मैंने इसी को आगे बढ़ाने की कोशिश की। तो मेरे मन में जो आता है उसे लिख देता हूं। मैं वो पोस्ट करता हूं, जो मुझे लगता है कि ये सही है और ये लोगों को पसंद आती है। कई विवाद भी हुए, क्योंकि अच्छी चीजें कम हाइलाइट किया जाता है, खराब चीजें ज्यादा हाइलाइट की जाती हैं।
सवाल: क्रिकेट की जो आज की प्रगति है, उसे किस प्रकार देखते हैं?
जवाब: क्रिकेट में बहुत बदलाव आया है। क्रिकेट बहुत फास्ट हो गई है, देखने में मजा आने लगा है। क्रिकेट फाइनेंशियली भी मजबूत हो गई है। भारतीय टीम सबसे ज्यादा मजबूत है, भारतीय खिलाड़ियों को सबसे ज्यादा पैसे मिलते हैं। बहुत बदलाव है। भारत के घरेलू क्रिकेट में भी बदलाव आया है। अब सेलेक्टर्स के पास ज्यादा ऑप्शंस हैं। आईपीएल से भी भारतीय क्रिकेट मजबूत हुई है। अब इसका प्रदर्शन भी मायने रखता है और चयन के लिए अहम पैमाना है। हालांकि, अभी भी कुछ लोग बोलते हैं कि इसका चयन हुआ और उसका चयन नहीं हुआ है। तो ये कुछ बदलाव हैं जो मैंने पिछले 10 वर्षों में देखे हैं।
सवाल: क्या आपको लगता है कि एक समय ऐसा आएगा जब महिला क्रिकेटर ज्यादा चर्चित हो जाएंगी?
जवाब: ज्यादा तो नहीं कहूंगा, लेकिन एक अच्छी चीज है कि जो सैलरी भारतीय पुरुष खिलाड़ियों को मिलती है, उतनी ही भारतीय महिलाओं क्रिकेटरों को भी मिलती है। अगर वह बेहतर क्रिकेट खेलेंगी और विश्व कप जीतेंगी तो उनका नाम और होगा। भारत में जो लड़कियां हैं वह इस खेल को अपनाएं ताकि बेहतर करियर बन सके।
सवाल: क्या टी20 क्रिकेट का असर टेस्ट क्रिकेट पर पड़ रहा है कि खिलाड़ी जल्दी जल्दी खेलकर आउट हो जा रहे हैं?
जवाब: बल्लेबाजों का माइंड जरूर चेंज हुआ है टी20 से, क्योंकि टी20 में आप 20 ओवर में 200 रन बनाते हो। तो ये माइंडसेट टेस्ट क्रिकेट में जरूर बदला है। पहले तीन रन प्रति ओवर बनते थे और अब पांच या छह रन प्रति ओवर भी बनने लगे हैं। जिससे कि जल्दी रन बनते हैं और खिलाड़ी आउट भी होते हैं। इससे विकेट भी बहुत मिल रहे। तीन दिन में मैच भी खत्म हो रहे। ये एंटरटेनिंग भी है क्योंकि आप अगर एक टेस्ट मैच खेलने जा रहे हो तो मजा आ रहा है क्योंकि रन भी बन रहे हैं विकेट भी गिर रहे हैं तो मजा आ रहा है। मुझे भी टेस्ट क्रिकेट देखने में मजा आ रहा और जब ये मैच होते हैं तो टीवी के आगे बैठ जाता हूं।
सवाल: भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को बहुत अच्छा खेलते थे। एक समय भारतीय बल्लेबाजों को स्पिनर्स के खिलाफ सबसे मजबूत माना जाता था, लेकिन हालिया दिनों में देखा गया कि भारतीय बल्लेबाज स्पिनर्स को अच्छा नहीं खेल पा रहे और उनके सामने बेबस नजर आते?
जवाब: इसका एक कारण यह है कि जितनी व्हाइट बॉल क्रिकेट ज्यादा होगी, उतने स्पिनर्स कम आएंगे, क्योंकि टी20 क्रिकेट में आप 24 गेंद डालते हो फ्लाइट नहीं करते हो, तो आपके अंदर स्किल नहीं आती कि आप बल्लेबाज को आउट कर सको। मुझे लगता कि वो एक कारण हो सकता है। भारतीय खिलाड़ी डोमैस्टिक क्रिकेट भी कम खेलते हैं। डोमैस्टिक क्रिकेट में आपको ज्यादा स्पिन खेलने को मिलती बजाय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के। तो वो भी एक कारण हो सकता है। मुझे लगता है कि क्वालिटी स्पिनर हैं नहीं भारत में अभी जिनको मैं देख रहा हूं कि वो फ्लाइट अच्छी करते हैं और विकेट ले सकें। हमारे समय में द्रविड़, सचिन, गांगुली, लक्ष्मण, युवराज, हम सभी डोमैस्टिक क्रिकेट भी खेलते थे, चाहे वह वनडे खेलें या फोर डे खेलें तो काफी डोमैस्टिक क्रिकेट खेलते थे। उसमें हम काफी स्पिनरों को खेलते थे, लेकिन आज के व्यस्त कार्यक्रम में खिलाड़ियों को समय कम मिल रहा है। अलग अलग लीग हैं, जिसकी वजह से खिलाड़ी के स्पिन को खेलने की स्किल डेवलप नहीं हो पा रही।
सवाल: टी20 का असर टेस्ट क्रिकेट पर बहुत ज्यादा पड़ा है। आईसीसी भी सहमत है इस बात से। MCC के सुझाव भी आ रहे हैं, किस तरह के बदलाव आप देखते हैं?
जवाब: नहीं मैं तो किसी तरह का बदलाव नहीं देखना चाहता। टेस्ट क्रिकेट एक ऐसा फॉर्मेट है, जिसे लोग दिलचस्पी से देखने आते हैं, भले ही वह पांच दिन का हो।
सवाल: गंभीर हेड कोच बन गए हैं। आप किस तरह की जिम्मेदारी उन पर देखते हैं?
जवाब: मुझे लगता नहीं कि ज्यादा कुछ चुनौती है, क्योंकि वहां और भी प्रोफेशनल्स हैं। हाल ही में खिलाड़ियों ने टी20 विश्व कप जीता है, खिलाड़ियों को पता है कि उनका रोल क्या है। गंभीर के आने से खिलाड़ियों को एक क्लैरिटी मिल जाएगी कि ये रोल है, आपको ये करना है। तो ये एक बेनिफिट मिलेगा भारतीय टीम को। गंभीर की चुनौतियां कम होंगी और खिलाड़ियों की चुनौतियां ज्यादा होंगी क्योंकि उन्हें लगेगा कि हमने टी20 विश्व कप जीता है तो अब हम चैंपियंस ट्रॉफी जीतें या फिर वनडे विश्व कप जीतें या फिर टेस्ट चैंपियनशिप जीतें। तो खिलाड़ियों पर ज्यादा चुनौतियां होंगी बजाय कोच के। क्योंकि गंभीर उनकी मदद करने के लिए वहां हैं।
सवाल: क्या आपको आईपीएल में या फिर भारतीय टीम के कोच के तौर पर देखेंगे?
जवाब: मुझे लगता है कि भारतीय टीम के लिए तो नहीं, लेकिन आईपीएल टीम के लिए किसी के लिए मौका आता है तो जरूर मैं देख सकता हूं। क्योंकि मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो वापस से वही रुटीन होगी जो मैंने 15 साल में किया है। 15 साल आप भारतीय टीम के लिए खेले, साल में आठ महीने घर से बाहर रहे। अभी मेरे बच्चे 14 और 16 साल के हैं और उन्हें मेरी जरूरत है। दोनों क्रिकेट खेलते हैं। एक ऑफ स्पिनर है और एक ओपनिंग बल्लेबाज है। उन्हें क्रिकेट सिखानी है और खिलानी है। उनके साथ समय बिताना है। अगर मैं भारतीय टीम का कोच बनता हूं तो टीम इंडिया के खिलाड़ी आठ महीने बाहर रहते हैं तो ये मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती हो जाएगी। फिर मैं अपना समय बच्चों को नहीं दे पाऊंगा। लेकिन हां अगर आईपीएल में किसी कोच की या मेंटर का रोल मुझे मिलता है तो जरूर मैं इस पर सोचूंगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि व्हाइट बॉल और रेड बॉल टीम के कप्तान अलग-अलग हों और दो टीमें खेलें?
जवाब: हो सकता है और हमारे समय में भी ऐसा था। वनडे और टेस्ट टीम के खिलाड़ी बदलते थे। कुछ खिलाड़ी टेस्ट और वनडे दोनों खेलते थे, कुछ टेस्ट खेलते थे और कुछ सिर्फ वनडे खेलते थे। वो बदलाव जरूर लाया जा सकता है और इस तरह से खिलाड़ियों को रेस्ट भी दिया जा सकता है। होना चाहिए ये। और देशों में भी ऐसा होता है, कुछ देशों ने तीन कप्तान बनाए हैं। टेस्ट का अलग, वनडे और टी20 के अलग-अलग। तो भारत भी इस बारे में सोच सकता है, क्योंकि बदलाव तो होता रहता है और बदलाव करना कोई बुरी बात नहीं है।
सवाल: जब आप पिच पर होते थे और रन नहीं बना पाते थे तो भजन गाने लगते थे। कौन सा फेवरेट भजन था आपका?
जवाब: ऐसा होता है कि जब हम बुरे वक्त में होते हैं तो भगवान को याद करते हैं। अभी तो हम अच्छे वक्त में बैठे हैं, कौन भगवान को याद कर रहा है यहां? तो मेरे भी जब रन बनते थे तो मैं भी गाना गाता था चिट्टियां कलाइयां वे, जब रन नहीं बनते थे तो भगवान याद आते थे, 300 साल, गुरु दे नाल..तो ये भी गुनगुना था मैं। मुझे लगता था कि गुरु को याद करने से मेरे रन बन जाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। एक दिन के गुनगान से कुछ नहीं मिलने वाला। जिंदगी में आपको हर रोज भगवान को याद करना होगा तभी कुछ मिलता है। तो वो समय भी देखा है मैंने कि जब रन नहीं बनते थे तो प्रार्थना शुरू हो जाती थी। एक अच्छी चीज यह रही है कि ऐसा समय मेरे जीवन में कम रहा है तो यह अच्छी बात रही है। भगवान की कृपा रही है, लोगों का प्यार मिला है तो भजन कम गाए हैं मैंने।
सवाल: जब आपने पाकिस्तान में 300 रन बनाए तो आपको मुल्तान के सुल्तान की उपाधि दी गई। क्या आपको याद है कि किसने ये उपाधि दी थी?
जवाब: ये तो याद नहीं, अगले दिन मीडिया में आया था। तो मुझे लगता है कि मीडिया में किसी ने ये लाइन दी थी तो फेमस हो गया मुल्तान का सुल्तान। फिर होड़ लग गई थी कि सहवाग को अगला नाम क्या दें, तो उन्होंने नजफगढ़ का नवाब रख दिया। मीडिया के नाम दिए हुए हैं। मुझे नाम याद नहीं, लेकिन काम मीडिया का ही है।
सवाल: जब आप मैदान पर होते थे तो किस गेंदबाज को भूत बनाने में मजा आता था?
जवाब: वैसे तो सभी का भूत बनाने में मजा आया, लेकिन अगर किसी एक खास गेंदबाज की बात करें तो वह शोएब अख्तर थे। क्योंकि वो इतनी तेज डालते थे तो हमें डरा के रखते थे। जब भी हम प्रैक्टिस में मिलते थे तो कहते थे कल मिल तेरा हेल्मेट तोड़ूंगा। और जब मैं 300 रन बनाता था तो मैं कहता था भाई हेल्मेट क्या बैट भी नहीं टूटा। तू हेल्मेट तोड़ने की बात करता था। तो उनके साथ मजा आता था गुफ्तगु करके। दोस्ती भी थी, खाना भी लाते थे हमारे लिए। पाकिस्तान में जब हम गए तो हमारे लिए खूब ढेर सारा खाना लाए थे। मटन लाए थे और पूरी भारतीय टीम ने खाया था, लेकिन उसमें बच गया था। तो जब अख्तर डेक्ची लेने आए तो हमसे कहा कि ये क्या तुम इतना भी नहीं खा पाए, इतना तो मैं और मिस्बाह उल हक अकेले खा जाते। तो वो और मिस्बाह खूब खाते थे। फिर अगले दिन जब मैं रन बनाता था तो कहते थे कि यार मैंने खाना भी खिलाया और तू मुझे ही रन मार रहा है। मैंने कहा खाना खिलाया है इसलिए प्यार से मार रहा हूं, नहीं खिलाया होता तो बदतमीजी से मारता।
सवाल: जब आप छोटे थे तो अपने स्कूटर पर खूब घूमते थे और इस स्कूटर पर नेहरा को बैठाकर घूमते थे। मेरा सवाल यह है कि क्या आपका चालान कभी काटा पुलिस ने या फिर सेटिंग करके बच निकले?
जवाब: जब मैं छोटा था तो स्कूटर क्या साइकिल नहीं मिली थी। स्कूटर तब मिला जब मैं 18 से ऊपर हो गया और रणजी में डेब्यू हुआ था। क्योंकि उस समय 40-50 हजार रुपये मिलते थे। जो स्कूटर आया था उसमें भी दोस्त से उधार लिए थे। मैं नजफगढ़ से फिरोजशाह कोटला जाता था तो काफी दूरी तय करनी पड़ती थी। फिर नेहरा को पता चला तो कहता है कि तू नजफगढ़ से आता है तो दिल्ली कैंट से क्यों नहीं आता। मैंने कहा दिल्ली कैंट दूर पड़ता है। तो उसने कहा नहीं दिल्ली कैंट से आ। मैंने रूट बदला और जब मैं उसके घर पहुंचता था तो उसे जगाता था भाई उठ ले अब जाना है। उनके पिता ऑमलेट और दूध लाते थे तो मेरे लिए भी ले आते थे और मैं भी खाता था। फिर उनके पिता कपड़े वगैरह प्रेस करते थे तो नेहरा कहता था मेरा खाना भी खा ले, तो मैं उसके खाने भी खाता था। उनके पिता कहते थे कि वाह यार दोनों ने खा लिया, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि मैं ही खा गया। फिर मैं उसे बिठाकर ले जाता था। शर्त यह थी कि जाते वक्त मैं ले जाऊंगा और आते वक्त नेहरा चलाएगा। चलान सुबह सुबह कौन पुलिस वाला खड़ा होता है चलान काटने के लिए। आते वक्त हम अपने क्रिकेट के हेलमेट पहनते थे। हमने कभी रेड लाइट जंप नहीं की। हां कभी किट बैग के लिए रोकता था तो हमारी शक्ल देखकर छोड़ देता था कहते थे कि खिलाड़ी लोग हैं जाने दो।
सवाल: हरियाणा में आप स्कूल चलाते हैं। स्कूल में आमतौर पर पढ़ाई होती है, लेकिन क्या आपके स्कूल में स्पोर्ट्स पर जोर है?
जवाब: मैं शुक्रगुजार हूं भूपिंदर सिंह हुड्डा जी का जिन्होंने मुझे बुलाकर जमीन दी वहां पर। मुझे सहवाग क्रिकेट एकेडमी और सहवाग इंटरनेशनल स्कूल खोलने का मौका दिया। मेरा स्कूल बेसिकली स्पोर्ट्स ओरियेंटेड स्कूल है। सीबीएसई की पढ़ाई होती है। सुबह नौ से तीन पढ़ाई होती है और शाम चार से छह खेल को तरजीह देते हैं। क्रिकेट खास खेला जाता है। वहां 25-26 विकेट हैं क्रिकेट के लिए प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड है। झज्जर की जिला टीम में ज्यादातर हमारे बच्चे खेलते हैं। हरियाणा के लिए भी हर साल दो या तीन बच्चे सेलेक्ट होते हैं। मेरा मानना है कि हर बच्चे को स्पोर्ट्स जरूर खेलना चाहिए। अगर आप स्पोर्ट्स खेलते हैं तो आपकी मसल पावर बढ़ती है और मेमरी बढ़ती है। पढ़ाई के लिए आपको चेयर पर बैठना होता है और अगर आप फिट हैं तभी चेयर पर बैठ सकते हैं। स्पोर्ट्स जरूर खेलने चाहिए बच्चों को। हमारे स्कूल में क्रिकेट के अलावा फुटबॉल, स्विमिंग, बास्केटबॉल और बैडमिंटन, लॉन टेनिस की फैसिलिटी मौजूद है और बच्चे खेलते हैं।
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सहवाग
- फोटो : PTI
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में बतौर विशेषज्ञ हिस्सा लेने वाले सहवाग ने हरियाणा में खेलों की संभावनाओं और विकास पर अपने विचार रखे। विश्व क्रिकेट के सबसे विस्फोटक ओपनर्स में शुमार रहे सहवाग आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स और घरेलू क्रिकेट में दिल्ली और हरियाणा के लिए भी खेल चुके हैं। नजफगढ़ के नवाब और आधुनिक क्रिकेट के जेन मास्टर के रूप में पहचाने जाने वाले सहवाग दाएं हाथ के आक्रामक सलामी बल्लेबाज रहे हैं। वह टेस्ट मैच की एक पारी में 300 या उससे अधिक रन बनाने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने यह कारनामा दो बार किया है।
2004 में मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 309 रन बनाए, जबकि 2008 में चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 319 रन बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में यह उनका सबसे तेज तिहरा शतक था, जिसमें उन्होंने 300 रन सिर्फ 278 गेंदों पर बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज भी सहवाग हैं। सहवाग ने कुल 90 छक्के लगाए हैं। उनके बाद दूसरे नंबर पर 84 छक्कों के साथ मौजूदा टेस्ट कप्तान रोहित शर्मा और 78 छक्कों के साथ महेंद्र सिंह धोनी हैं। वीरेंद्र सहवाग का वनडे मैचों में बैटिंग औसत 35.05 का है। वनडे में उनका सवांधिक स्कोर 219 रन है।
2004 में मुल्तान में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने 309 रन बनाए, जबकि 2008 में चेन्नई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 319 रन बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में यह उनका सबसे तेज तिहरा शतक था, जिसमें उन्होंने 300 रन सिर्फ 278 गेंदों पर बनाए थे। टेस्ट क्रिकेट में भारत की ओर से सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज भी सहवाग हैं। सहवाग ने कुल 90 छक्के लगाए हैं। उनके बाद दूसरे नंबर पर 84 छक्कों के साथ मौजूदा टेस्ट कप्तान रोहित शर्मा और 78 छक्कों के साथ महेंद्र सिंह धोनी हैं। वीरेंद्र सहवाग का वनडे मैचों में बैटिंग औसत 35.05 का है। वनडे में उनका सवांधिक स्कोर 219 रन है।
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दिलचस्प बात यह भी है कि सहवाग की आक्रामक खेल शैली वनडे या टी20 क्रिकेट के अनुकूल है, जबकि वह टेस्ट मैचों में अधिक सफल रहे हैं। उन्होंने अब तक 104 टेस्ट में 40.34 की औसत से 8586 रन, 251 वनडे मैचों में 35.05 की औसत से 8273 रन और 19 टी20 अंतरराष्ट्रीय में 145.38 के स्ट्राइक रेट से 394 रन बनाए हैं। टेस्ट में सहवाग के नाम 23 शतक और 32 अर्धशतक, वनडे में 15 शतक और 38 अर्धशतक और टी20 में दो अर्धशतक हैं। इसके अलावा वह दाएं हाथ के पार्ट टाइम स्पिनर भी थे। सहवाग ने टेस्ट में 40 विकेट और वनडे में 96 विकेट भी लिए हैं। टेस्ट में उनकी सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी 104 रन देकर पांच विकेट रही है। वहीं, वनडे में उन्होंने छह रन देकर चार विकेट झटके हैं।
सहवाग
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सहवाग ने अंतरराष्ट्रीय डेब्यू 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ किया था। यह एक वनडे मैच था। वहीं, पहला टेस्ट वीरू ने 2001 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। टी20 डेब्यू सहवाग ने 2006 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किया था। उन्होंने आखिरी टेस्ट मार्च 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, आखिरी वनडे जनवरी 2013 में ही पाकिस्तान के खिलाफ और आखिरी टी20 अक्तूबर 2012 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला था। वह कुछ मैचों में भारतीय टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं। इसके अलावा वीरू ने 104 आईपीएल मैचों में 155.44 के स्ट्राइक रेट से 2728 रन बना चुके हैं और छह विकेट ले चुके हैं। आईपीएल में सहवाग ने दिल्ली डेयरडेविल्स, पंजाब किंग्स जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व किया है।