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Gautam Gambhir: 'यह गलत है', गंभीर ने की इस टेस्ट की आलोचना, बताया टीम में जगह बनाने को फिटनेस सिर्फ पैमाना
Thu, 13 Jun 2024 01:39 PM IST
Mayank Tripathi
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Mayank Tripathi
Updated Thu, 13 Jun 2024 01:39 PM IST
सार
भारतीय क्रिकेट में यो-यो टेस्ट पिछले कई वर्षों से चर्चा का विषय बना रहा है। इसकी शुरुआत विराट कोहली की कप्तानी में हुई थी। कोरोना से पहले तक टीम इंडिया में चयन के लिए इस टेस्ट को पास करना जरूरी था।
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गंभीर-टीम इंडिया
- फोटो : ICC/T20 World Cup/BCCI
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विस्तार
टीम इंडिया के पू्र्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने यो-यो टेस्ट की आलोचना की है। उन्होंने बताया कि भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए सिर्फ फिटनेस एक पैमाना होना चाहिए। बता दें कि, गंभीर भारतीय टीम के मुख्य कोच की दौड़ में आगे चल रहे हैं। मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ का कार्यकाल इस विश्व कप के बाद समाप्त हो जाएगा।
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टीम इंडिया
- फोटो : BCCI
कई खिलाड़ी हो चुके बाहर
भारतीय क्रिकेट में यो-यो टेस्ट पिछले कई वर्षों से चर्चा का विषय बना रहा है। इसकी शुरुआत विराट कोहली की कप्तानी में हुई थी। कोरोना से पहले तक टीम इंडिया में चयन के लिए इस टेस्ट को पास करना जरूरी था। कोरोना के समय इसमें ढील दी गई। इस टेस्ट में युवराज सिंह, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, मोहम्मद शमी, संजू सैमसन और वरुण चक्रवर्ती जैसे कई खिलाड़ी फेल हो चुके हैं।
भारतीय क्रिकेट में यो-यो टेस्ट पिछले कई वर्षों से चर्चा का विषय बना रहा है। इसकी शुरुआत विराट कोहली की कप्तानी में हुई थी। कोरोना से पहले तक टीम इंडिया में चयन के लिए इस टेस्ट को पास करना जरूरी था। कोरोना के समय इसमें ढील दी गई। इस टेस्ट में युवराज सिंह, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, मोहम्मद शमी, संजू सैमसन और वरुण चक्रवर्ती जैसे कई खिलाड़ी फेल हो चुके हैं।
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गौतम गंभीर-केएल राहुल
- फोटो : BCCI
गंभीर ने की यो-यो टेस्ट की आलोचना
गंभीर ने इस टेस्ट की आलोचना की। उन्होंने बताया कि सिर्फ इस टेस्ट को पास नहीं करने की वजह से खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर देना गलत है। उन्होंने फिटनेस एक पैमाना होना चाहिए, लेकिन मैं इस बात से भी सहमत नहीं हूं कि फिट कहलाने के लिए हमें फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। मैं इससे सहमत नहीं हूं। फिटनेस का सीधा संबंध ट्रेनर से होना चाहिए। अगर एक ट्रेनर को लगता है कि आप काफी फिट हैं, तो कुछ लोग शारीरिक रूप से इतने मजबूत होते हैं कि वे जिम में काफी वजन उठा सकते है।''
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अगर आप सिर्फ यो-यो टेस्ट के कारण किसी का चयन नहीं करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है। आप खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा, उनके संघर्ष कौशल, उनकी गेंदबाजी कौशल के आधार पर चुनते हैं और यह प्रशिक्षक का काम है उनकी फिटनेस पर काम करते रहना और उन्हें शारीरिक रूप से भी बेहतर बनाते रहना, सिर्फ इसलिए कि कोई यो-यो टेस्ट पास नहीं कर पाता और उसका चयन नहीं हो पाता, मुझे लगता है कि यह थोड़ा अनुचित है।"
गंभीर ने इस टेस्ट की आलोचना की। उन्होंने बताया कि सिर्फ इस टेस्ट को पास नहीं करने की वजह से खिलाड़ियों को टीम से बाहर कर देना गलत है। उन्होंने फिटनेस एक पैमाना होना चाहिए, लेकिन मैं इस बात से भी सहमत नहीं हूं कि फिट कहलाने के लिए हमें फिटनेस टेस्ट पास करना होगा। मैं इससे सहमत नहीं हूं। फिटनेस का सीधा संबंध ट्रेनर से होना चाहिए। अगर एक ट्रेनर को लगता है कि आप काफी फिट हैं, तो कुछ लोग शारीरिक रूप से इतने मजबूत होते हैं कि वे जिम में काफी वजन उठा सकते है।''
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन अगर आप सिर्फ यो-यो टेस्ट के कारण किसी का चयन नहीं करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि यह सही तरीका है। आप खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा, उनके संघर्ष कौशल, उनकी गेंदबाजी कौशल के आधार पर चुनते हैं और यह प्रशिक्षक का काम है उनकी फिटनेस पर काम करते रहना और उन्हें शारीरिक रूप से भी बेहतर बनाते रहना, सिर्फ इसलिए कि कोई यो-यो टेस्ट पास नहीं कर पाता और उसका चयन नहीं हो पाता, मुझे लगता है कि यह थोड़ा अनुचित है।"
टीम इंडिया
- फोटो : BCCI
क्या है यो-यो टेस्ट?
यो-यो टेस्ट बीप टेस्ट जैसा होता है। यह एक रनिंग टेस्ट होता है जिसमें दो सेटों के बीच दौड़ लगानी होती है। दो सेटों के बीच की दूरी 20 मीटर होती है। यह करीब-करीब क्रिकेट पिच की लंबाई के बराबर है। इस दौरान खिलाड़ियों को एक सेट से दूसरे सेट तक दौड़ना होता है और फिर दूसरे सेट से पहले सेट तक आना होता है। एक बार इस दूरी को तय करने पर एक शटल पूरा होता है। टेस्ट की शुरुआत पांचवें लेवल से होती है। यह 23वें लेवल तक चलता रहता है। हर एक शटल के बाद दौड़ने का समय कम होते रहता है, लेकिन दूरी में कमी नहीं होती है। भारतीय खिलाड़ियों के यो-यो टेस्ट में 23 में से 16.5 स्कोर लाना होता है। यो-यो टेस्ट का आविष्कार डेनमार्क के फुटबॉल फिजियोलॉजिस्ट डॉ जेन्स बैंग्सबो ने 1990 के दशक में किया था। इसे इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट (यो-यो टेस्ट) कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य खेलों ने यो-यो टेस्ट को अपनाना शुरू कर दिया। भारतीय क्रिकेट टीम में यह टेस्ट 2017 में जुड़ा था। तब स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने इस टेस्ट को भारतीय टीम पर लागू किया था।
यो-यो टेस्ट बीप टेस्ट जैसा होता है। यह एक रनिंग टेस्ट होता है जिसमें दो सेटों के बीच दौड़ लगानी होती है। दो सेटों के बीच की दूरी 20 मीटर होती है। यह करीब-करीब क्रिकेट पिच की लंबाई के बराबर है। इस दौरान खिलाड़ियों को एक सेट से दूसरे सेट तक दौड़ना होता है और फिर दूसरे सेट से पहले सेट तक आना होता है। एक बार इस दूरी को तय करने पर एक शटल पूरा होता है। टेस्ट की शुरुआत पांचवें लेवल से होती है। यह 23वें लेवल तक चलता रहता है। हर एक शटल के बाद दौड़ने का समय कम होते रहता है, लेकिन दूरी में कमी नहीं होती है। भारतीय खिलाड़ियों के यो-यो टेस्ट में 23 में से 16.5 स्कोर लाना होता है। यो-यो टेस्ट का आविष्कार डेनमार्क के फुटबॉल फिजियोलॉजिस्ट डॉ जेन्स बैंग्सबो ने 1990 के दशक में किया था। इसे इंटरमिटेंट रिकवरी टेस्ट (यो-यो टेस्ट) कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य खेलों ने यो-यो टेस्ट को अपनाना शुरू कर दिया। भारतीय क्रिकेट टीम में यह टेस्ट 2017 में जुड़ा था। तब स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच शंकर बसु ने इस टेस्ट को भारतीय टीम पर लागू किया था।