भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी अभी जारी है। दोनों ही टीमों ने एक-एक मुकाबले जीते हैं और सीरीज में बराबरी पर हैं। हालांकि सिडनी और ब्रिस्बेन में होने वाले बाकी के दो टेस्ट मैचों से पहले ही विवाद शुरू हो गया। भारतीय टीम के पांच खिलाड़ियों पर जहां कोविड-19 प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगा है वहीं ब्रिस्बेन टेस्ट में कोरोना नियमों की वजह से टीम इंडिया और वहां के प्रशासन के बीच तकरार शुरू हो गई है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कोई विवाद हुआ है, इससे पहले भी कई बार दोनों टीमें आपस में उलझी हैं। ऐसे में आइए जानते हैं भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए चर्चित विवादों के बारे में।
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच होते रहे हैं विवाद, कभी अंपायरों का फैसला तो कभी खिलाड़ियों में तकरार
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कप्तान गावस्कर ने गुस्से में छोड़ दिया मैदान
1981 में भारतीय टीम सुनील गावस्कर की अगुवाई में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थी। मेलबर्न में खेले गए रोमांचक टेस्ट मैच में टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की थी। हालांकि यह मैच गावस्कर के गुस्से की वजह से भी काफी सुर्खियों में रहा। दरअसल डेनिस लिली की गेंद पर अंपायर रेक्स व्हाइटहेड द्वारा आउट दिए जाने के फैसले से गावस्कर बेहद नाराज हो गए और उस वक्त साथ में बल्लेबाजी कर रहे चेतन चौहान को लेकर पवेलियन लौट गए। बाद में हालात को काबू करते हुए टीम प्रबंधन ने चौहान को दोबारा मैदान पर भेजा। वैसे इस पूरे वाकये के बारे में गावस्कर ने बाद में बताया कि उनकी नाराजगी फैसले से नहीं बल्कि लिली द्वारा की गई निजी टिप्पणियों से थी।
मैक्ग्रा का बाउंसर और तेंदुलकर एलबीडब्ल्यू आउट
ऑस्ट्रेलिया में 1999-00 में खेली गई सीरीज में सचिन तेंदुलकर और ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ग्लेन मैक्ग्रा के बीच एक जोरदार मुकाबला देखने को मिला था। मैक्ग्रा सचिन के विकेट के लिए उतावले थे और उन्हें आउट करने के लिए पूरी प्लानिंग कर चुके थे। उन्होंने एडिलेड में खेले गए टेस्ट मैच में सचिन को आउट भी किया लेकिन उस आउट ने एक नए विवाद को जन्म दिया। दरअसल मैक्ग्रा ने एक पटकी हुई गेंद फेंकी जिसे सचिन ने बाउंसर समझकर छोड़ना चाहा लेकिन गेंद ने उछाल नहीं लिया और सचिन के कंधे से टकराई। इसपर मैक्ग्रा की अपील पर अंपायर डेरल हार्पर ने सचिन को एलबीडब्ल्यू आउट दिया।
स्लेटर की बदतमीजी
ऑस्ट्रेलियाई टीम 2001 में भारत के दौरे पर थी और भारतीय टीम पर भारी पड़ी थी। इसी दौरान मुंबई में खेले गए टेस्ट मैच में आउट के एक फैसले को लेकर विवाद हो गया। दरअसल मैच के दौरान राहुल द्रविड़ ने एक पुल शॉट खेला लेकिन गेंद बल्ले पर सही से नहीं लगी और हवा में उठ गई, जिसे माइकल स्लेटर ने डाइव लगाकर लपक लिया। हालांकि द्रविड़ कैच से संतुष्ट नहीं दिखे और क्रीज पर ही रुके रहे, पूर्व अंपायर एस वेंकटराघवन ने भी उन्हें नॉट आउट करार दिया, यहां तक कि टीवी रिप्ले में भी स्लेटर के कैच पर संशय था। इन सबके बीच स्लेटर ने अंपायर से बहस करना शुरू कर दिया और द्रविड़ को भी अपशब्द कहे। बाद में स्लेटर के बर्ताव के लिए उनपर जुर्माना लगाया गया।
हरभजन-सायमंड्स मंकीगेट विवाद
2008 का भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा कई वजहों से विवादों में रहा। खराब अंपायरिंग, निजी टिप्पणियां जैसे कई वाकये ऐसे हुए जिसने पूरे क्रिकेट जगत को हिलाकर रख दिया। इसमें ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर एंड्रयू सायमंड्स और भारतीय गेंदबाज हरभजन सिंह के बीच की बहस ने ज्यादा माहौल खराब किया। नौबत यहां तक आ गई थी कि बीसीसीआई ने दौरे को बीच में ही खत्म करने की धमकी दे डाली। दरअसल सायमंड्स ने यह आरोप लगाया कि हरभजन ने उन्हें मंकी (बंदर) कहा था और यह नस्लभेदी टिप्पणी है। मामला सिडनी कोर्ट तक पहुंचा जहां आरोपों की जांच के लिए एक अनुशासनात्मक पैनल का गठन किया गया। इस दौरान ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भज्जी के बारे में उल्टी-सीधी बातें लिखी। पूरे मामले में हरभजन पर पहले तीन टेस्ट मैच का बैन लगा जिसे बाद में हटा लिया गया।