T20 WC: आईसीसी के सामने घुटने टेके, पर मंच से गीदड़भभकी जारी! नकवी ने आसिम मुनीर का नाम लेकर दिखाई झूठी अकड़
भारत से मैच पर हफ्तों की तनातनी के बाद पाकिस्तान आखिर मैदान में उतरने को तैयार हुआ, लेकिन पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आसिम मुनीर का नाम लेकर ताकत दिखाने की कोशिश की। फैसलों में झुकने और बयानों में गरजने की इस दोहरी रणनीति ने पाकिस्तान की और किरकिरी करा दी। नकवी अपने ही देश को मजाक का विषय बनने से रोक नहीं पा रहे।
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विस्तार
भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच पर लंबे ड्रामे के बाद जब अंततः खेलने की सहमति बन गई, उसी समय पीसीबी अध्यक्ष और पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने ऐसा बयान दे दिया जिसने नई बहस छेड़ दी। समझौते के कुछ घंटों पहले उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान पर किसी का दबाव नहीं है।
उन्होंने कहा, 'न मैं भारत और आईसीसी की धमकियों से डरता हूं, न पाकिस्तान की सरकार डरती है, और जहां तक फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर का सवाल है, आप उन्हें जानते ही हैं, वह कभी नहीं डरते।' नकवी का यह बयान अब मजाक का विषय बन गया है। लोगों का कहना है कि जब अंत में मैदान में उतरना ही पड़ा, तब इस तरह की भाषा पाकिस्तान की स्थिति को मजबूत नहीं बल्कि विरोधाभासी बनाती है।
PCB chairman Mohsin Naqvi said “ Neither I am afraid of India’s threats nor the Pakistan government is. And you know the Field Marshal too” 🇵🇰🔥 pic.twitter.com/v5kUQWheti
विज्ञापन विज्ञापन— KHURUM ABBAS (@KHURUM455) February 9, 2026
🚨 Match is on. 🚨
— The Cricket Katha (@TheCricketKatha) February 10, 2026
Mohsin Naqvi has caused more damage to Pakistan cricket than Babar and Rizwan.
His actions have settled his own political score, effectively destroying Shebaz Sharif’s credibility.
pic.twitter.com/ddmbmuwn0Z
आसिम मुनीर का नाम पाकिस्तान में पिछले कुछ समय से शक्ति और सैन्य प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में पेश किया जाता रहा है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद उन्हें फील्ड मार्शल बनाए जाने को वहां बड़े राजनीतिक संदेश की तरह प्रचारित किया गया, लेकिन खेल के विवाद में सेना के शीर्ष पद का उल्लेख करना कई विशेषज्ञों को असहज करने वाला कदम लगा। उनके मुताबिक, इससे यह संकेत गया कि क्रिकेट से ज्यादा यह घरेलू राजनीतिक दर्शकों को संदेश देने की कोशिश थी। पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देने के लिए जाना जाता है। अपने देश में मुनीर से आतंकवादी खत्म नहीं किए जा रहे और नकवी बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। इस्लामाबाद में हाल ही में विस्फोट में कई लोग मारे गए थे। मुनीर और नकवी (जो कि पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं) अपने लोगों की हिफाजत कर नहीं पा रहे और दुनिया भर की बातें करने चले हैं।
हफ्तों तक बहिष्कार, शर्तें और बयानबाजी चलती रही। मगर आखिरकार बातचीत, राजनयिक संपर्क और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद पाकिस्तान को तय कार्यक्रम मानना पड़ा। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुआई में चर्चा के बाद टीम को 15 फरवरी को खेलने की अनुमति दी गई। सरकार ने इसे बहुपक्षीय संवाद का नतीजा बताया और कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भावना को बनाए रखना जरूरी था, लेकिन सवाल यही उठा- अगर खेलना ही था, तो फिर इतनी तीखी बयानबाजी किसके लिए? इतना ड्रामा किसके लिए?
🚨 Meet Mohsin Naqvi
— Tejash (@Tejashyyyyy) February 9, 2026
- Theft the Asia Cup Trophy
- Begged to play bilateral series with India
- Begged for increased revenue share
- Forced Bangladesh to withdraw from the World Cup
He even made fun of the PM Shehbaz Sharif in front of the whole world🤣 pic.twitter.com/3jn5FTGgwq
आईसीसी ने अपने स्तर पर हुई बैठकों को सकारात्मक बताया। माहौल को रचनात्मक कहा गया और किसी सजा की बात नहीं की गई। यानी अंत में मामला बातचीत से सुलझा, न कि दहाड़ से। साफ हो गया कि गीदड़भभकियों से न तो समाधान निकलता है और न ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर कोई प्रभावित होता है, उल्टा मजाक जरूर बनता है, आपका भी और आपके देश का भी। जिस बांग्लादेश के मुद्दे पर पाकिस्तान ने सख्ती का रुख दिखाने की कोशिश की, वही आखिरकार मैच खेलने के पक्ष में नजर आया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी ऊंची आवाज किसके लिए थी।