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दीवाली पर 28 साल बाद ये दुर्लभ योग, जान लीजिए लक्ष्मी पूजन का मुहूर्त
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 28 Oct 2016 01:50 AM IST
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लक्ष्मी देवी
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इस साल मां लक्ष्मी की आराधना का विशेष पर्व दीवाली विशेष तथा दुर्लभ संयोगों के साथ आएगा। दीपावली का पर्व इस बार स्वाति नक्षत्र में दिन के नौ बजकर 2 मिनट पर शुरू हो रहा है। प्रीति योग में प्रदोष रात्रिकाल और आंशिक काल में अमावस्या होने के कारण इस वर्ष की दीपावली का विशेष महत्व है।
पूजन में अमावस्या तिथि प्रदोष काल रात्रिकाल और और महारात्रिकाल और तुला का सूर्य, तुला राशि का चंद्रमा रविवार का दिन प्रीति योग होने के कारण 28 वर्षों के बाद ऐसा योग आ रहा है।
सेक्टर-30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि यह समय एवं चौघड़िया मुहूर्त महालक्ष्मी, कुबेर और महाकाली पूजन, यंत्र मंत्र की साधाना व हवन अनुष्ठान के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
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बीरेंद्र नारायण के अनुसार 30 अक्तूबर को चंडीगढ़ में सूर्यास्त शाम पांच बजकर 32 मिनट पर है।
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पूजन में अमावस्या तिथि प्रदोष काल रात्रिकाल और और महारात्रिकाल और तुला का सूर्य, तुला राशि का चंद्रमा रविवार का दिन प्रीति योग होने के कारण 28 वर्षों के बाद ऐसा योग आ रहा है।
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सेक्टर-30 के भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि यह समय एवं चौघड़िया मुहूर्त महालक्ष्मी, कुबेर और महाकाली पूजन, यंत्र मंत्र की साधाना व हवन अनुष्ठान के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।
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बीरेंद्र नारायण के अनुसार 30 अक्तूबर को चंडीगढ़ में सूर्यास्त शाम पांच बजकर 32 मिनट पर है।
‘28 वर्षों के बाद आता है लक्ष्मीपूजन का ऐसा विशेष मुहूर्त’
दिवाली
प्रदोष काल शाम पांच बजकर 32 मिनट से लेकर रात आठ बजकर 20 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल में वृष लग्न और तुला राशि का सूर्य चंद्रमा होने के कारण बहुत ही शुभ माना गया है।
शाम को छह बजकर 25 मिनट से रात आठ बजकर 53 मिनट तक वृष लग्न, शुभ और अमृत की चौघड़िया एवं प्रदोष काल होने के कारण इस योग में दीपक जलाना महालक्ष्मी, कुबेर और गणेश पूजन व खाता बही पूजन शुभ है।
अन्य मुहूर्त...
रात आठ बजे से आठ बजकर 53 मिनट तक अमृत की चौघड़िया रहेगी। इसके बाद रात 10 बजकर 32 मिनट तक चर की चौघड़िया भी शुभ रहेगी। इस वर्ष अमावस्या रात्रि में 11 बजकर 8 मिनट तक रहने से रात्रिकाल का विशेष महत्व है। इस समय तक पूजा कर लेना चाहिए।
शाम को छह बजकर 25 मिनट से रात आठ बजकर 53 मिनट तक वृष लग्न, शुभ और अमृत की चौघड़िया एवं प्रदोष काल होने के कारण इस योग में दीपक जलाना महालक्ष्मी, कुबेर और गणेश पूजन व खाता बही पूजन शुभ है।
अन्य मुहूर्त...
रात आठ बजे से आठ बजकर 53 मिनट तक अमृत की चौघड़िया रहेगी। इसके बाद रात 10 बजकर 32 मिनट तक चर की चौघड़िया भी शुभ रहेगी। इस वर्ष अमावस्या रात्रि में 11 बजकर 8 मिनट तक रहने से रात्रिकाल का विशेष महत्व है। इस समय तक पूजा कर लेना चाहिए।