मोदी के मुरीद हुए नीतीश, नोटबंदी को बताया 'शेर की सवारी' जैसा फैसला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोटबंदी के फैसले पर जहां पूरा विपक्ष सरकार के खिलाफ सदन से लेकर सड़क तक विरोध कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस फैसले का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। अब ऐसी खबर आ रही है कि नीतीश इस फैसले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी के मुरीद हो गए हैं। उन्होंने कहा है कि नोटबंदी का फैसला 'शेर की सवारी' करने जैसा है।
एनडीटीवी के मुताबिक, नीतीश ने अपनी पार्टी (जेडीयू) के नेताओं से कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब ऐसे शेर की सवारी कर रहे हैं, जो उनके गठबंधनों को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन उनके इस कदम के पक्ष में जोरदार समर्थन है, और हमें उस समर्थन का सम्मान करना चाहिए।" हालांकि नीतीश नोटबंदी से हो रही परेशानी से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इस ओर सरकार का ध्यान दिलाती रहेगी।
नीतीश ने पार्टी नेताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि पार्टी इन दिक्कतों को उजगार करने और उठाने में कतई पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि पीएम से इस बात का आग्रह करते रहेंगे कि बेनामी संपत्ति रखने वालों पर भी कार्रवाई करें, जहां काले धन को बड़ी मात्रा में खपाया जाता है। उनकी पार्टी के नेताओं ने तुरंत यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ग्रामीण भारत के लोगों को हो रही दिक्कतों के प्रति चिंतित भी हैं।
इससे पहले मधुबनी में 'निश्चय यात्रा' के दौरान रैली को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा था कि अब सरकार को बेनामी संपत्ति रखने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए। कई लोग दो नंबर का कारोबार कर ऐश कर रहे हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई करने की जरूरत है।
इससे पहले 8 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के एलान के बाद भी नीतीश ने इस फैसले का खुलकर समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि कालेधन को लेकर पीएम मोदी का फैसला काबिलेतारीफ है। लोगों को केंद्र सरकार द्वारा उठाये गये इस कदम से थोड़ी समस्या तो जरूर होगी लेकिन यह हमारी भविष्य की आर्थिक मजबूती के लिये लाभकारी सिद्ध होगा।
बीजेपी के नजदीक आ रहे हैं नीतीश ?
वहीं दूसरी तरफ सियासी हलके में बीजेपी और जेडीयू के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर चर्चा का विषय बना है। पहली बार यह सवाल चर्चा का विषय तब बना था जब बीजेपी ने अपने राष्ट्रीय परिषद में घोषित की गई दीनदयाल जन्म शताब्दी वर्ष संबंधी समिति में नीतीश कुमार को इकलौते मुख्यमंत्री के रूप में जगह दी थी।
दूसरी बार इस पर चर्चा शुरू होने का कारण तमाम विपक्षी दलों के विरोध के बीच नीतीश का मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के समर्थन में खड़ा होना है। चर्चा यह भी है कि बीते एक नवंबर को नीतीश कुमार ने भाजपा के एक शीर्ष नेता से मुलाकात भी की थी, मगर इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई। गौरतलब है कि जदयू करीब दो दशक तक बीजेपी समर्थित एनडीए का हिस्सा रहा है। बिहार में आठ साल तक दोनों दलों की गठबंधन सरकार थी।
दरअसल, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सत्ता बचाने के लिए नीतीश ने अपने धुर विरोधी आरजेडी के मुखिया लालू प्रसाद यादव से हाथ मिला कर विधानसभा चुनाव में बीजेपी को पटखनी तो दे दी, मगर साझा सरकार बनाने के बाद दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर तीखे मतभेद हैं। मतभेद की शुरुआत बाहुबली पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत दिए जाने के बाद हुई राजनीति से शुरू हुई।