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मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2018: 44 साल से अजेय नेता ने इस बार बहू पर लगाया दांव

Sat, 24 Nov 2018 08:01 PM IST
नमित शुक्ला, अमर उजाला, नई दिल्ली
नमित शुक्ला, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 24 Nov 2018 08:01 PM IST
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Madhya Pradesh Assembly Elections 2018: Litmus test for Krishna gaur in Govindpura seat
बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को गोविंदपुरा सीट से मिला है टिक

मध्य प्रदेश में भोपाल की एक सीट भाजपा के लिए किले से कम नहीं है। यहां 10 बार से भाजपा का ही विधायक बनता आ रहा है। वह भी एक ही व्यक्ति। उनका नाम है बाबूलाल गौर। प्रदेश के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री रह चुके बाबूलाल गोविंदपुरा सीट से लगातार 44 सालों तक विधायक रहे। अब इस अजेय किले को बचाने की जिम्मेदारी उनकी बहू को दी गई है, जो विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं। लेकिन उनके लिए बागियों से निपटना ही बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

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कृष्णा गौर को मिला टिकट

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में काफी उतार-चढ़ाव के बाद बीजेपी ने आखिरकार पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर को टिकट दिया। टिकट मिलने के बाद ही विरोध तेज हो गया। पार्टी में मनोरंजन मिश्रा और तपन भौमिक के समर्थकों ने गौर की बहू को टिकट दिए जाने के खिलाफ धरना दिया। काफी मान मनौव्वल का दौर चलता रहा। पार्टी में सब ठीकठाक करने की कोशिश की गई। लोगों के सामने यह दर्शाया भी गया, लेकिन अब भी अंदुरूनी हालत ठीक नहीं हैं। 
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बाबूलाल गौर के खिलाफ वंशवाद फैलाने के नारे भी लगाए जा चुके हैं। टिकट वितरण से पहले बाबूलाल गौर ने भी विरोधी तेवर दिखाए थे। हालांकि बहू को टिकट मिलने के बाद सामान्य स्थिति बनाने की कोशिश की गई। लेकिन पार्टी के  भीतर अभी बगावती स्वर गूंज रहे हैं। वैसे ये सीट अब तक अजेय रही है और कांग्रेस के दिग्गज सूरमाओं को बाबूलाल ने पराजित किया। 
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जीत का फॉर्मूला

दरअसल, इस सीट में चुनाव में जीत का फॉर्मूला बाबूलाल के पास है। गोविंदपुरा विधानसभा में 20 फीसदी हिस्सा भेल में आता है। जिसके चलते यहां यूपी-बिहार के करीब 15 से 20 हजार वोटर्स हैं। असमिया 8 हजार, मलियाली 8 से 10 हजार और ईसाई 10 हजार हैं। बाबूलाल गौर खुद उत्तर प्रदेश से भेल में काम करने आए थे। वे कुछ सालों में ही भेल में मजदूरों के बड़े नेता बन गए। देखते-देखते राजनीति में बड़ा नाम हो गया। वे भोपाल से विधानसभा चुनाव लड़े और जीत गए। इस चुनाव के बाद बाबूलाल गौर ने मुड़कर नहीं देखा। मध्य प्रदेश में लगातार कद बढ़ता गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री तक बने।  

 

कांग्रेस में भी घमासान

Madhya Pradesh Assembly Elections 2018: Litmus test for Krishna gaur in Govindpura seat
गोविंदपुरा - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस में भी घमासान

वहीं कांग्रेस में भी कम घमासान नहीं है। जिसके चलते ही गोविंदपुरा सीट के लिए प्रत्याशी घोषित करने में पार्टी ने काफी वक्त लगाया। सभी की सहमति के बाद कांग्रेस ने युवा गिरीश शर्मा को बाबूलाल गौर की बहू के सामने मैदान में उतारा है। गिरीश दो बार के पार्षद हैं। इस सीट में 30 से 35 हजार ब्राम्हण मतदाता हैं, जो चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा लगभग 22 हजार मुस्लिम मतदाता भी हैं। दलित वर्ग का लगभग 20 हजार मतदाता है। आदिवासी मतदाताओं की संख्या भी लगभग 20 हजार के करीब है। इन आंकड़ों को देखते हुए ही कांग्रेस से शायद ब्राह्मण कार्ड खेला है।  

यहां वोटिंग का बहिष्कार, रोड नहीं तो वोट नहीं

राजधानी के गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र की कॉलोनियों के रहवासियों ने मतदान का बहिष्कार कर दिया है। रहवासियों ने कॉलोनी के मेन गेट और पूरे इलाके में बैनर पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। पोस्टर पर बहिष्कार का कारण लिखा गया है। पोस्टर में कुछ इस तरह के स्लोगन है कि 'रोड नहीं तो वोट नहीं', 'क्षेत्र को है विकास की दरकार', 'जनप्रतिनिधियों की बेरूखी से आहत वार्ड 60 और 61 के मतदाता', इन स्लोगन के साथ मतदाता के चुनाव बहिष्कार की बात कही जा रही है। इन कॉलोनियों में करीब एक हजार परिवार रहते हैं। जिनमें लगभग ढाई से तीन हजार मतदाता हैं। इनका चुनाव में बहिष्कार करना दोनों ही दलों के प्रत्याशियों के लिए मुश्किल बढ़ा रहा है।

गोविन्दपुरा के वार्ड नंबर 60 और 61 में तुलसी विहार फेज़ वन, फेज़ टू, आस्था विहार, सौम्या पार्कलैंड, रीगल टाउन, रीगल कस्तूरी, रीगल पैराडाइज, सरला इस्टेट, कुंदन नगर, निर्मल पैलेस के रहवासियों ने मतदान का बहिष्कार किया है। रहवासियों का कहना है कि, पिछले 15 सालों में न तो क्षेत्र में सड़कें बनी हैं, न ही स्ट्रीट लाइट की कोई व्यवस्था है। रात के वक्त पूरे इलाके की सड़कों पर अंधेरा छाया रहता है, जिसके चलते इलाके में छेड़छाड़ की घटनाएं भी आए-दिन होती रहती हैं। इसके लिए वार्ड के पार्षद और क्षेत्र के विधायक को कई बार लिखित आवेदन भी दिया गया है। लेकिन आज तक न तो सड़कें बन पाई हैं और नही स्ट्रीट लाइट्स लग पाई है, इसलिए इस बार रहवासी मतदान का बहिष्कार कर रहे हैं।
 
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