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कारगिल गाथा: मश्कोह सेक्टर में अब भी घात लगाए थे घुसपैठिए
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 23 Jul 2016 04:38 PM IST
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- फोटो : ADGPI
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कारगिल युद्ध में करारी हार और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद भारतीय क्षेत्र को तत्काल खाली करने के समझौते पर अमल में पाकिस्तान लगातार कन्नी काटता रहा। चार जुलाई को समझौते और 11 जुलाई को सीजफायर संबंधी फैसले के बावजूद 22 जुलाई तक पाकिस्तान भारतीय क्षेत्र को खाली नहीं कर पाया।
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मश्कोह सेक्टर के जुलु स्पर में पाकिस्तानी घुसपैठियों की मौजूदगी बनी हुई थी। पर्याप्त समय दिए जाने पर भी जब इलाका खाली नहीं किया गया तो भारतीय सेना ने हमला करने की रणनीति बनाई। 3/3 गोरखा राइफल्स को दो चरणों में हमले का आदेश दिया गया।
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एलओसी से सटे इलाकों में हमले की जटिलताओं के बावजूद 22 जुलाई को घुसपैठियाें पर हमले की कार्रवाई शुरू कर दी गई। पहले चरण के हमले में घुसपैठियाें को खदेड़ने की रणनीति कारगर साबित हुई। चरणवार रूप से गोरखा राइफल्स ने पूरी आक्रामकता के साथ हमले को अंजाम देना शुरू कर दिया।
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इससे पूर्व कारगिल, मश्कोह और बटालिक सेक्टर को सेनिटाइज करने के लिए भारतीय सेना की टुकड़ियों ने खास आपरेशन चलाया। ज्यादा इलाकाें को खाली करवा लिया गया था लेकिन एलओसी से सटे कुछ इलाकों में घुसपैठियाें की मौजूदगी बने रहने से नए सिरे से हमलों की रणनीति बनानी पड़ी।