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दिल्लीवासियों के जीवन के तीन वर्ष कम करने का दोषी पंजाब, यह नरसंहार और हत्या के समान है
Updated Fri, 11 Nov 2016 12:14 AM IST
सार
सरकारी निक्रियता और पराली जलाने से दो करोड़ दिल्लीवासियों के जीवन के तीन वर्ष कम करने का दोषी पंजाब
राजधानी में वायु प्रदूषण के लिए पंजाब जिम्मेदार- हाईकोर्ट
- सरकारी निष्क्रियता और पराली जलाने से दो करोड़ दिल्लीवासियों के जीवन के तीन वर्ष कम करने का दोषी पंजाब
- यह नरसंहार और हत्या के समान है, पंजाब सरकार मुख्य सचिव स्पष्ट करे क्यों न की जाए अवमानना कार्रवाई
- यूपी, हरियाणा व राजस्थान सरकार के प्रयास संतोषजनक
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- फोटो : self
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विस्तार
हाईकोर्ट ने राजधानी में बड़े स्तर पर वायु प्रदूषण के लिए पंजाब को जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने कहा पंजाब में सरकारी निष्क्रियता और पराली जलाने का चलन दो करोड़ दिल्लीवासियों के जीवन के तीन वर्ष कम करने के लिए दोषी है जो नरसंहार और हत्या के समान है।
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इतना ही नहीं अदालत ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को फटकार लगाते हुए स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न उनके खिलाफ अदालत की अवमानना कार्रवाई की जाए।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने राजधानी में वायु प्रदूषण पर पंजाब सरकार के उस तर्क पर कड़ी नाराजगी जताई कि वायु प्रदूषण पटाखों के चलाने से हुआ है न कि पराली से।
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अदालत ने सेटेलाईट इमेज से स्पष्ट है कि पंजाब सरकार कुछ नहीं कर रही। सरेआम पराली जलाई जा रही है। उन्होंने प्रदूषण में पटाखों की भूमिका बहुत ही सीमित है, दुर्भाग्य है कि सरकार अपनी गलती मानने की अपेक्षा गलत दिशा में जा रही है।
अदालत ने कहा यह हमें मार रहा है। इस गंभीर हालात से छह करोड़ से ज्यादा जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं या यूं कहें तो इससे दस लाख मौतें होती हैं। खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा क्या वोट देने वालों के जीवन से ज्यादा महत्वपूर्ण वोट होते हैं।
उन्होंने एक साप्ताहिक में प्रकाशित हालिया पर्यावरण अध्ययन का जिक्र करते हुए गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली जैसे किसी शहर में वायु प्रदूषण आपके जीवन के अपेक्षित वर्षों से तीन वर्ष कम कर देता है।
दिल्ली में दो करोड़ से ज्यादा की आबादी है। इसलिए छह करोड़ जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं और खत्म हो रहे हैं। यह दस लाख मौतों के बराबर हैं। यह दस लाख मौतों के समान है। अगर यह हत्या नहीं हैए तो क्या है यह नरसंहार है।
उन्होंने एक साप्ताहिक में प्रकाशित हालिया पर्यावरण अध्ययन का जिक्र करते हुए गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली जैसे किसी शहर में वायु प्रदूषण आपके जीवन के अपेक्षित वर्षों से तीन वर्ष कम कर देता है।
दिल्ली में दो करोड़ से ज्यादा की आबादी है। इसलिए छह करोड़ जीवन वर्ष बर्बाद हो रहे हैं और खत्म हो रहे हैं। यह दस लाख मौतों के बराबर हैं। यह दस लाख मौतों के समान है। अगर यह हत्या नहीं हैए तो क्या है यह नरसंहार है।
'क्या वोट बैंक ज्यादा महत्वपूर्ण है'
खंडपीठ ने कहा सरकारी निक्रियता जीवन कम होने के लिए दोषी है। मामले की भयावहता को समझें। क्या वोट बैंक ज्यादा महत्वपूर्ण है या वोट देने वाला महिला या पुररुष। उन्होंने कहा पंजाब (पराली जला कर) हमें मार रहा है।
अदालत ने कहा कि विभिन्न खबरों के मुताबिक दिल्ली को वायु गुणवत्ता के मामले में भारत में सबसे खराब शहर बताया गया है। अदालत के मुताबिक खराब गुणवत्ता वाली हवा न केवल लोगों को मारती है बल्कि सांस संबंधी बीमारियों भी बढ़ाती है।
पिछले महीने वायु प्रदूषण के मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों से पराली जलाने पर रोक लगाने को कहा था। फसलों के अवशेषों को जलाने की प्रथा बंद करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के बाद भी राष्ट्रीय राजधानी हर साल धुंध का प्रकोप झेलती है।
अदालत ने कहा कि विभिन्न खबरों के मुताबिक दिल्ली को वायु गुणवत्ता के मामले में भारत में सबसे खराब शहर बताया गया है। अदालत के मुताबिक खराब गुणवत्ता वाली हवा न केवल लोगों को मारती है बल्कि सांस संबंधी बीमारियों भी बढ़ाती है।
पिछले महीने वायु प्रदूषण के मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा राज्यों से पराली जलाने पर रोक लगाने को कहा था। फसलों के अवशेषों को जलाने की प्रथा बंद करने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण के आदेशों के बाद भी राष्ट्रीय राजधानी हर साल धुंध का प्रकोप झेलती है।
अदालत की कड़ी टिप्पणियां व मुख्य अंश
- वायु प्रदूषण से अकेले दिल्ली में ही 10,500 लोगों की मौत।
- पजांब सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट खारिज।
- राजस्थान व हरियाणा सरकार ने ठोस कदम उठाए, वे किसानों को कर रहे है जागरूक
- फिलहॉल यूपी से राजधानी को खतरा नहीं, लेकिन वे अपने ही राज्य के लोगों को मार रहे है।
- डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर के 20 शहरों में से 13 भारत के सर्वाधित प्रदूषित।
- पंजाब के मुख्य सचिव को 18 नवंबर तक स्पष्टï करने का निर्देश क्यों न की जाए अवमानना कार्रवाई।
- प्रदूषित वायु से लोग मर ही नहीं बल्कि विभिन्न बीमारियां भी पैदा हो रही है।
- नासा सेटेलाईट के जरिए स्पष्ट प्रदूषण के लिए पंजाब जिम्मेदार।
- पंजाब क्यों नहींकरता किसानों को प्रशिक्षित।
- किसानों का 80 हजार करोड़ ऋण माफ लेकिन 9900 करोड़ रुपये प्रदूषण को रोकने के लिए खर्च नहीं, क्या किसानों को इससे मशीने नहीं खरीद कर दे सकते।
- पजांब सरकार द्वारा पेश रिपोर्ट खारिज।
- राजस्थान व हरियाणा सरकार ने ठोस कदम उठाए, वे किसानों को कर रहे है जागरूक
- फिलहॉल यूपी से राजधानी को खतरा नहीं, लेकिन वे अपने ही राज्य के लोगों को मार रहे है।
- डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर के 20 शहरों में से 13 भारत के सर्वाधित प्रदूषित।
- पंजाब के मुख्य सचिव को 18 नवंबर तक स्पष्टï करने का निर्देश क्यों न की जाए अवमानना कार्रवाई।
- प्रदूषित वायु से लोग मर ही नहीं बल्कि विभिन्न बीमारियां भी पैदा हो रही है।
- नासा सेटेलाईट के जरिए स्पष्ट प्रदूषण के लिए पंजाब जिम्मेदार।
- पंजाब क्यों नहींकरता किसानों को प्रशिक्षित।
- किसानों का 80 हजार करोड़ ऋण माफ लेकिन 9900 करोड़ रुपये प्रदूषण को रोकने के लिए खर्च नहीं, क्या किसानों को इससे मशीने नहीं खरीद कर दे सकते।