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कश्मीर लोकसभा उपचुनाव में दोनों सीटों पर सीधा मुकाबला
बृजेश कुमार सिंह,अमर उजाला/जम्मू
Updated Wed, 22 Mar 2017 01:15 PM IST
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चुनाव
- फोटो : File Photo
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रियासत में दो लोकसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में सीधा मुकाबला नेकां-क्रांगेस गठबंधन बनाम पीडीपी-भाजपा गठबंधन के बीच है। श्रीनगर में नामांकन भरने के आखिरी दिन मंगलवार को भी भाजपा की ओर से चुनाव लड़ने के बारे में फैसला न किए जाने से यह माना जा रहा है कि अब पार्टी पीडीपी का चुनाव में समर्थन करेगी।
मौजूदा चुनाव में नेकां के दिग्गज नेता फारूक अब्दुल्ला तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है। हाल ही में सक्रिय राजनीति में आए महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर की प्रतिष्ठा भी फंसी हुई है। इसी वजह से गठबंधन सरकार के लिए यह चुनौती है।
वर्ष 2014 के चुनाव में पहली बार हार का स्वाद चखने वाले फारूक अब्दुल्ला उपचुनाव में पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरे हैं। उनके साथ इस बार कांग्रेस का भी साथ है। कहा जा रहा है कि यह चुनाव जीतना फारूक के राजनीतिक करियर के लिए महत्वपूर्ण है। इस वजह से दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
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कश्मीरियों में कश्मीर हिंसा के बाद पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ उपजे आक्रोश को भुनाने की कोशिशें की जा रही हैं। एजेंडा आफ अलायंस को लेकर सरकार की नाकामी को भी प्रचारित किया जा रहा है। मसलन शांति बहाली के लिए सभी वर्गों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने, सीजफायर उल्लंघन तथा आतंकी हमले की घटनाएं बढ़ने, पावर प्रोजेक्ट की वापसी जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
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मौजूदा चुनाव में नेकां के दिग्गज नेता फारूक अब्दुल्ला तथा मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की प्रतिष्ठा सीधे तौर पर दांव पर लगी हुई है। हाल ही में सक्रिय राजनीति में आए महबूबा के भाई तसद्दुक मुफ्ती और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीए मीर की प्रतिष्ठा भी फंसी हुई है। इसी वजह से गठबंधन सरकार के लिए यह चुनौती है।
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वर्ष 2014 के चुनाव में पहली बार हार का स्वाद चखने वाले फारूक अब्दुल्ला उपचुनाव में पूरी दमखम के साथ मैदान में उतरे हैं। उनके साथ इस बार कांग्रेस का भी साथ है। कहा जा रहा है कि यह चुनाव जीतना फारूक के राजनीतिक करियर के लिए महत्वपूर्ण है। इस वजह से दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।
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कश्मीरियों में कश्मीर हिंसा के बाद पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ उपजे आक्रोश को भुनाने की कोशिशें की जा रही हैं। एजेंडा आफ अलायंस को लेकर सरकार की नाकामी को भी प्रचारित किया जा रहा है। मसलन शांति बहाली के लिए सभी वर्गों से बातचीत की प्रक्रिया शुरू करने, सीजफायर उल्लंघन तथा आतंकी हमले की घटनाएं बढ़ने, पावर प्रोजेक्ट की वापसी जैसे मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
दोनों सीटों पर पीडीपी की होगी जीत: मुजफ्फर हुसैन
चुनाव
- फोटो : File Photo
वर्ष 2014 के चुनाव में पीडीपी ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए घाटी की दोनों सीटों पर कब्जा कर लिया था। श्रीनगर से नेकां प्रत्याशी फारूक अब्दुल्ला को हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें पीडीपी के तारिक हमीद कर्रा ने शिकस्त दी थी।
वर्ष 2016 में कश्मीर हिंसा की वजह से नाराज कर्रा के पार्टी छोड़ने और इस्तीफा देने से यह सीट रिक्त हो गई थी। अनंतनाग सीट पर महबूबा मुफ्ती विजयी हुई थीं, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
पीडीपी सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग का कहना है कि पार्टी को दोनों सीटों पर विजय हासिल होगी। नेकां तथा कांग्रेस के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। लोग इनके मौकापरस्त किरदार को पहचान चुके हैं। गठबंधन सरकार के कल्याणकारी कदमों तथा फैसलों से लोगों को अवगत कराया जा रहा है। अनंतनाग विधानसभा उपचुनाव में भी पीडीपी की हार की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन परिणाम आने पर सभी पार्टियों की बोलती बंद हो गई।
वर्ष 2016 में कश्मीर हिंसा की वजह से नाराज कर्रा के पार्टी छोड़ने और इस्तीफा देने से यह सीट रिक्त हो गई थी। अनंतनाग सीट पर महबूबा मुफ्ती विजयी हुई थीं, लेकिन मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने यह सीट छोड़ दी थी।
पीडीपी सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग का कहना है कि पार्टी को दोनों सीटों पर विजय हासिल होगी। नेकां तथा कांग्रेस के खिलाफ लोगों में गुस्सा है। लोग इनके मौकापरस्त किरदार को पहचान चुके हैं। गठबंधन सरकार के कल्याणकारी कदमों तथा फैसलों से लोगों को अवगत कराया जा रहा है। अनंतनाग विधानसभा उपचुनाव में भी पीडीपी की हार की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन परिणाम आने पर सभी पार्टियों की बोलती बंद हो गई।