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आठ माह यहां छिपा रहा आतंकी, मदरसे में लिया था दाखिला, की थी मौलवी की पढ़ाई 

Thu, 10 Aug 2017 02:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर, कपिल कुमार 
अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर, कपिल कुमार  Updated Thu, 10 Aug 2017 02:48 PM IST
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Eight months were hiding here in the madrasa
मदरसे के रिकार्ड में अब्दुल्ला की फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून छह साल पहले मुजफ्फरनगर में दाखिल हो गया था। आतंकी अब्दुल्ला ने जनपद और आसपास में आतंक के लिए जमीन तलाशनी शुरू कर दी थी। वर्ष 2011 में कुटेसरा के मदरसा जामिल उलूम में हाफिज की पढ़ाई करने के बाद वह शहर के सरवट पहुंचा था। सरवट के मदरसा महमूदिया में आतंकी अब्दुल्ला ने मौलवी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। खास बात यह है कि आतंकी ने मदरसे में नाम-पता गलत दर्शाया। मदरसे के रिकार्ड में आतंकी ने अपना नाम मोहम्मद अब्दुल, निवासी जिला पश्चिम त्रिपुरा दिखाया है। एक साल तक पढ़ाई करने के बाद वह मदरसा छोड़कर चला गया।  
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मुजफ्फरनगर के चरथावल के गांव कुटेसरा से एटीएस के हत्थे चढ़ा बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून छह साल पहले जिले में दाखिल हुआ था। बांग्लादेश में बैठे आकाओं के इशारों पर वह जगह बदलने के साथ नाम-पते भी बदलता रहा। वर्ष 2011 में मुजफ्फरनगर में आने के बाद पहले कुटेसरा के मदरसा जामिल उलूम में हाजिफ की पढ़ाई की। एक साल पढ़ने के बाद मुजफ्फरनगर शहर के सरवट गांव में शरण ली। यहां पर अब्दुल्ला ने सरवट के मदरसा महमूदिया में मौलवी की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया। आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून ने मदरसे में 27 सितंबर 2012 को असली नाम-पता छिपाकर दाखिला पाया था। 
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आतंकी ने मदरसे के रिकॉर्ड में खुद का नाम मोहम्मद अब्दुल, पिता का नाम मोहम्मद गफ्फार, निवासी जिला पश्चिमी त्रिपुरा लिखाया है। मदरसे के रिकार्ड में उसकी जन्मतिथि 6 मई 1991 दर्ज है, जिसके चलते उसकी उम्र 21 वर्ष लिखी गई थी। मदरसे के रिकार्ड के अनुसार आतंकी ने दाखिले के दौरान खुद को कुटेसरा में पढ़ना बताया था। साथ ही आलिम बनने की इच्छा भी जाहिर की थी। दाखिले की मुकम्मल प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसकी पढ़ाई शुरू हुई। अब्दुल्ला बेहद शांत रहने वाला छात्र था। 
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महमूदिया मदरसे में आतंकी अब्दुल्ला ने 8 माह 21 दिन गुजारे थे। मदरसे की मौलवियत के सात पेपर देने के बाद 19 जून 2013 को वह मदरसा छोड़कर चला गया था। मदरसे में रहते हुए कभी उसने किसी को शक नहीं होने दिया, लेकिन आतंकी मुजफ्फरनगर में रहकर आतंक के मंसूबों को मुकम्मल करने में लगा रहा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुजफ्फरनगर में 2013 में ही दंगा हुआ था। उस दौरान उसकी लोकेशन कहां रही और वह क्या कर रहा था, इसकी जानकारी अभी तक किसी के पास नहीं है।  
 

नाम और पता गलत दर्शाया 

Eight months were hiding here in the madrasa
वह मदरसा, जहां अब्दुल्ला ने की पढ़ाई - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला अल मॉमून का मदरसे में नाम-पता गलत लिखवाना ही उसके मंसूबों को जाहिर कर रहा है। बांग्लादेश से सीधे उसने यूपी के मुजफ्फरनगर को चुना। एटीएस उसके 2011 में भारत आना मान रही है। ऐसे में साफ जाहिर है कि आतंकी मुजफ्फरनगर से आतंक फैलाने की जमीन तलाश रहा था। इसके चलते ही उसने पढ़ाई के दौरान नाम-पता गलत लिखवाया, ताकि कोई उसके मूल पते तक न पहुंच जाए।

मोबाइल और कलम का था शौक 
मुजफ्फरनगर। बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसार उल बांग्ला टीम के सदस्य आतंकी अब्दुल्ला अधिकतर अपने काम से काम रखता था। वह साथी छात्रों से ज्यादा घुला-मिला नहीं था। मदरसे के रिकार्ड में उसका मोबाइल नंबर भी दर्ज है। वह नंबर अब किसी अनूप यादव को अलॉट हो चुका है। अपनी कक्षा में पढ़ाई पूरी करने के बाद वह तस्वीह पढ़ता रहता था। साथ ही साधारण मोबाइल और कलम रखने का शौक था।  
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