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13 साल बाद झीरम कांड में सजा की घड़ी: 10 दोषियों पर 16 सितंबर को फैसला; हमले की साजिश अब भी सवालों में

Tue, 15 Sep 2026 08:46 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Tue, 15 Sep 2026 08:46 PM IST
सार

बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में अब सजा की तारीख तय हो गई है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत 16 सितंबर को दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों की सजा पर फैसला सुनाएगी।

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13 years later, sentencing in the Jhiram massacre: Verdict on 10 convicts on September 16
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले से जुड़े मामले में अब सजा की तारीख तय हो गई है। जगदलपुर की विशेष एनआईए अदालत 16 सितंबर को दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। करीब 13 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद इस मामले में अब अदालत के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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25 मई 2013 को हुआ था दिल दहला देने वाला हमला
झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत कांग्रेस के कई नेता मारे गए थे। हमले में सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 29 लोगों की जान गई थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा के सबसे बड़े हमलों में इसे गिना गया।
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13 साल चली सुनवाई, 101 गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने बड़ी संख्या में गवाहों के बयान और दस्तावेज पेश किए गए। करीब 13 साल चली प्रक्रिया में 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने मामले में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया। अब 16 सितंबर को इन्हीं दोषियों को मिलने वाली सजा पर फैसला सुनाया जाएगा।
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दोषसिद्धि के बाद भी कई सवाल बाकी
अदालत में आरोपियों की दोषसिद्धि के बावजूद झीरम हमले से जुड़े कुछ बड़े सवाल अब भी चर्चा में हैं। खासतौर पर हमले की व्यापक साजिश किस स्तर तक थी, इसमें बड़े नक्सली नेताओं की क्या भूमिका थी और सुरक्षा व्यवस्था में कहीं गंभीर चूक हुई थी या नहीं—इन सवालों को लेकर अभी भी बहस जारी है। यही वजह है कि 16 सितंबर का फैसला केवल दोषियों की सजा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि झीरम मामले की आगे की कानूनी और राजनीतिक बहस पर भी इसका असर पड़ सकता है।

भूपेश बघेल ने उठाए थे जांच पर सवाल
झीरम हमले की जांच को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कई बार सवाल उठा चुके हैं। उनका दावा रहा है कि यह घटना महज नक्सली हमला नहीं थी, बल्कि इसके पीछे बड़ी साजिश थी। बघेल ने कई मौकों पर कहा था कि झीरम की साजिश से जुड़े सबूत उनके पास हैं। उन्होंने एनआईए की जांच पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि मामले की जांच में लीपापोती हुई। उनका कहना था कि यदि राज्य सरकार की एसआईटी को स्वतंत्र रूप से जांच का मौका मिलता, तो कथित षड्यंत्र के पीछे के लोगों तक पहुंचा जा सकता था। बघेल ने भाजपा पर भी झीरम मामले की पूरी तह तक नहीं जाने और साजिशकर्ताओं को बचाने का आरोप लगाया था।


अब 16 सितंबर पर टिकी नजरें
झीरम हमले के 13 साल बाद दोषियों की सजा पर आने वाला फैसला मामले की न्यायिक प्रक्रिया में एक अहम पड़ाव होगा। हालांकि दोषसिद्धि के बाद भी हमले की साजिश और इसके पीछे की पूरी कड़ी को लेकर उठते सवालों का जवाब तलाशने की मांग लगातार बनी हुई है। अब देखना होगा कि 16 सितंबर को विशेष एनआईए अदालत दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को क्या सजा सुनाती है।
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