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Raipur News: नगर निगम में 100 करोड़ का जमीन घोटाला, चार अधिकारी निलंबित, जांच शुरू
Sun, 19 Apr 2026 01:06 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Sun, 19 Apr 2026 01:06 PM IST
सार
नगर निगम में कथित 100 करोड़ रुपये से अधिक के जमीन घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए निगम आयुक्त विश्वदीप ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगर निगम में कथित 100 करोड़ रुपये से अधिक के जमीन घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए निगम आयुक्त विश्वदीप ने चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें तत्कालीन जोन-10 कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव शामिल हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 150 एकड़ से ज्यादा जमीन को नियमों के विपरीत वैध करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इस दौरान निगम मुख्यालय को नजरअंदाज करते हुए फाइलें सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग भेजी गईं।
जांच समिति ने पाया कि 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलें गायब हैं और कई बार मांगने के बावजूद मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे पूरे मामले में गंभीर अनियमितताओं और मिलीभगत की आशंका और गहराई है।
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यह मामला बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में बिल्डरों, दलालों और कुछ अधिकारियों के बीच गठजोड़ के संकेत भी मिले हैं।
विपक्ष ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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जांच में खुलासा हुआ है कि लगभग 150 एकड़ से ज्यादा जमीन को नियमों के विपरीत वैध करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इस दौरान निगम मुख्यालय को नजरअंदाज करते हुए फाइलें सीधे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग भेजी गईं।
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जांच समिति ने पाया कि 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलें गायब हैं और कई बार मांगने के बावजूद मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे पूरे मामले में गंभीर अनियमितताओं और मिलीभगत की आशंका और गहराई है।
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यह मामला बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्रों से जुड़ा है, जहां अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने की कोशिश की गई। रिपोर्ट में बिल्डरों, दलालों और कुछ अधिकारियों के बीच गठजोड़ के संकेत भी मिले हैं।
विपक्ष ने इसे बड़ा घोटाला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। प्रशासन ने विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।