{"_id":"689a180eaa9799cb620d3c91","slug":"after-lecturer-s-death-his-family-donated-his-body-to-medical-college-jagdalpur-2025-08-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jagdalpur: व्याख्याता की मौत के बाद परिजनों ने मेकाज को किया देहदान, रक्षाबंधन के अगले तोड़ दिया था दम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jagdalpur: व्याख्याता की मौत के बाद परिजनों ने मेकाज को किया देहदान, रक्षाबंधन के अगले तोड़ दिया था दम
Mon, 11 Aug 2025 10:00 PM IST
आकाश दुबे
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जगदलपुर
Published by: आकाश दुबे
Updated Mon, 11 Aug 2025 10:00 PM IST
सार
अहिल्या कोमरे वर्ष भर पहले ही कबीर पंथी संतराम पाल जी महाराज संस्था से जुड़ने के बाद से मौत के पश्चात अपनी देह को दान करने की बात हमेशा से किया करती थीं। वहीं उनके छोटे भाई भी कुछ माह पहले देहदान के लिए फार्म भर चुके हैं।
विज्ञापन
व्याख्याता के भाई और बहू ने निभाया अपना वचन
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेडिकल कॉलेज डिमरापाल में सोमवार की शाम को जगदलपुर की अवंतिका कॉलोनी में रहने वाले कोमरे परिवार के सदस्यों ने अपनी बड़ी बहन की इच्छा को पूरा करते हुए उनकी पार्थिव देह को सोमवार की शाम मेकाज को सौंप दी। वहीं इस दौरान भाई बहू ही मौजूद थे, बताया जा रहा है कि बहन की काफी समय से यह इच्छा थी कि भविष्य में कभी भी कुछ होने पर उनकी देह दान की जाए।
विज्ञापन
जगदलपुर के अवंतिका कॉलोनी निवासी एमआर कोमरे ने बताया कि मृतका अहिल्या कोमरे 56 वर्ष कांकेर जिले के कोरर के कोपानपुर स्थित हाई स्कूल में व्याख्याता के पद पर पदस्थ थीं, विगत 2 साल से स्वास्थ्य खराब होने के कारण अपने भाई एमआर कोमरे के घर में ही रह रहे थीं, जहां उनकी देखभाल की जा रही थी। वहीं उनकी बहू सबत कोमरे रक्षित केंद्र जगदलपुर में पदस्थ होने के साथ ही न्यायालय में अपनी सेवा दे रही हैं। स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें मेकाज में भर्ती किया गया था, जहां रक्षाबंधन के दिन भी भाई से बात करने के साथ ही दोनों भाई-बहन साथ में थे, लेकिन रक्षाबंधन के दूसरे दिन 10 अगस्त को उनका निधन हो गया। अहिल्या कोमरे वर्ष भर पहले ही कबीर पंथी संतराम पाल जी महाराज संस्था से जुड़ने के बाद से मौत के पश्चात अपनी देह को दान करने की बात हमेशा से किया करती थीं। वहीं उनके छोटे भाई भी कुछ माह पहले देहदान के लिए फार्म भर चुके हैं। अहिल्या कोमरे का कहना था कि उनका मृत शरीर किसी ना किसी के काम जरूर आएगा, मेडिकल छात्र इसका उपयोग अपने अध्ययन में कर सकेंगे। मृतका के भाई एमआर कोमरे भी कांकेर जिले में व्याख्याता के पद पर पदस्थ हैं।
विज्ञापन