जीरकपुर की रेखा के जज्बे को सलाम: कभी बैंड बाजा टीम कह चिढ़ाते थे... आज बना डाली दिव्यांग खिलाड़ियों की टीमें
रेखा ने बताया कि वर्ष 2014 में मास्टर ऑफ सोशल वर्क के दौरान वह सेक्टर-23 में इंटर्नशिप के लिए जाती थीं। मदर टेरेसा केंद्र में रहने वाले कुछ दिव्यांग बच्चे क्रिकेट खेलते थे। समस्याओं के बावजूद वह खेल का आनंद लेते थे।
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जीरकपुर निवासी रेखा त्रिवेदी दिव्यांग खिलाड़ियों की भलाई के लिए काम करती हैं। रेखा बताती हैं कि चंडीगढ़ सेक्टर-23 के मदर टेरेसा केंद्र में कुछ दिव्यांग बच्चे एक दीवार पर विकेट बनाकर क्रिकेट खेल रहे थे। व्हीलचेयर पर बैठे बच्चे बल्ले को पूरी जोर से घुमा रहे थे, वहीं कुछ बच्चे तो ठीक से चल नहीं पा रहे थे तो घसीटकर ही बॉल पकड़ने के लिए दौड़ रहे थे। इन बच्चों का जज्बा देखकर उनसे बात की तो पता चला कि उन्हें क्रिकेट का शौक तो बहुत है, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं है।
रेखा ने बताया कि 2016 में कुछ दिव्यांग बच्चों को अपने खर्चे पर सिरसा क्रिकेट खिलाने पहुंची तो रास्ते में कुछ लोग बोले- बैंड बाजे वालों की टीम है क्या यह। बात थोड़ी चुभी, लेकिन वहीं से मन में तय कर लिया कि इन बच्चों को मुकाम दिलाना है। आज सुकून मिलता है कि मैंने प्रयास कर देशभर में दिव्यांग खिलाड़ियों के 9 संगठन को सक्रिय कर दिया है और 5 संगठन प्रक्रिया में है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में मास्टर ऑफ सोशल वर्क के दौरान वह सेक्टर-23 में इंटर्नशिप के लिए जाती थीं। मदर टेरेसा केंद्र में रहने वाले कुछ दिव्यांग बच्चे क्रिकेट खेलते थे। समस्याओं के बावजूद वह खेल का आनंद लेते थे। उनमें से एक राहुल नाम के बच्चे से उन्होंने बात की। उसने बताया कि उसके जैसे और भी बच्चे हैं, लेकिन दिव्यांगों के लिए क्रिकेट का कोई प्लेटफॉर्म ही नहीं है। राहुल ने पंजाब के अलग-अलग शहरों में रहने वाले अपने दिव्यांग दोस्तों से रेखा को मिलाया। वर्ष 2016 में सिरसा में शान ए खालसा समिति की ओर से दिव्यांगों के लिए एक क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया। एक दिन पहले यह सूचना मिली और अगले दिन सुबह 7 बजे तक सिरसा पहुंचना था। पति से जिद कर रेखा ने 11 हजार रुपये लेकर एसी गाड़ी की और खिलाड़ियों को लेकर सिरसा निकल गईं। उन्होंने बताया कि रास्ते में खाना खाने रुके तो लोगों ने तंज भी कसा, लेकिन जोश से भरे खिलाड़ियों ने इसकी परवाह नहीं की और टूर्नामेंट में हिस्सा लिया।
ऐसे लिखी गई आठ सदस्यीय व्हील चेयर एसोसिएशन की पटकथा
रेखा ने बताया कि टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए देशभर से बच्चे बस और ट्रेन से किसी तरह आए थे। इसी दौरान हमारी गाड़ी देखकर लखनऊ से आया एक दिव्यांग खिलाड़ी सोमजीत गौड़ आया और कहा कि इतनी मदद हमारी कोई कर दे तो वर्ल्ड कप जीत लें। उसने रेखा त्रिवेदी से मदद करने का आग्रह किया। सोमजीत ने बताया कि उसके पास दिव्यांगों की काफी अच्छी टीम है। इन खिलाड़ियों से दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की टीम बना देंगे। इसके बाद रेखा लखनऊ जाकर खिलाड़ियों से मिली और यहीं से दिव्यांगों के खेल की पटकथा लिखी गई और देश का पहला आठ सदस्यीय व्हील चेयर क्रिकेट एसोसिएशन बना।
2017 में पीयू में हुआ देश का पहला दिव्यांग क्रिकेट टूर्नामेंट
रेखा ने बताया कि लखनऊ से शुरू हुआ सिलसिला चंडीगढ़ में तेजी से बढ़ा। पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्ष 2017 में देश का पहला व्हीलचेयर क्रिकेट टूर्नामेंट हुआ। इसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और यूपी की टीमें शामिल हुईं। यह पहला टूर्नामेंट था जब राज्यों के नाम से टीमें आई थीं। इसके बाद 2018 में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में टूर्नामेंट, 2019 में चंडीगढ़ में चुनाव आयोग के साथ रात-दिन का दिव्यांग क्रिकेट मैच, इसी वर्ष मैसूर और हिमाचल में टूर्नामेंट, 2020 में बड़ौदा में बड़े स्तर का टूर्नामेंट हुआ। इसमें बड़ौदा के तत्कालीन विधानसभा स्पीकर राजेंद्र त्रिवेदी ने समर्थन दिया। वर्ष 2021 में गुजरात में फिर एक टूर्नामेंट हुआ यहां आठ टीमों के 250 खिलाड़ी पहुंचे।
आज 2500 दिव्यांग खिलाड़ी जुड़े हैं रेखा त्रिवेदी से
रेखा त्रिवेदी ने बताया कि टूर्नामेंट के दौरान एक दिन के लिए विशेष सत्र का आयोजन होता है। इसमें क्रिकेट में कैसे खेलना है, इस संबंध में भी पूरी जानकारी दी जाती है। इसके लिए एक बुकलेट भी तैयार की गई है। आज रेखा त्रिवेदी से 2500 दिव्यांग खिलाड़ी जुड़े हैं। उनके प्रयासों से उन्हें घाना से भी आमंत्रण मिला है।
अब अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट समिति का भी गठन
अब कर्नाटक में अंतरराष्ट्रीय व्हीलचेयर क्रिकेट समिति को भी पंजीकृत करा दिया गया है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, गुजरात, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का संगठन तैयार है। वहीं तमिलनाडु, तेलंगाना, मणिपुर, उड़ीसा और राजस्थान में संगठन की प्रक्रिया लगभग पूरी होने को है। रेखा त्रिवेदी का कहना है कि जल्द ही जिले स्तर पर भी टीमें तैयार करना शुरू करेंगे।