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Chandigarh News: आपने दी नई जिंदगी, आपका योगदान जिंदगी भर याद रखेंगे
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दो साल के इंतजार के बाद पीजीआई में मृतक डोनर के लिवर से हुआ सफल ट्रांसप्लांट, स्वस्थ होकर घर लौटे हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान राकेश
चंडीगढ़। ‘आपने मुझे नई जिंदगी दी है, आपका यह योगदान मैं जिंदगी भर याद रखूंगा।’ हिमाचल प्रदेश पुलिस में तैनात राकेश के ने डोनर परिवार का दिल से शुक्रिया किया। करीब दो साल तक लिवर मिलने का इंतजार करने के बाद पीजीआई में उनका सफल ट्रांसप्लांट किया गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब वह अपने परिवार के पास लौट गए हैं।
राकेश लंबे समय से लिवर ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे थे। पीजीआई के जनरल सर्जरी और हेपेटोलॉजी विभाग की टीम ने यह प्रत्यारोपण किया। इसमें प्रो. एल. कमान, डॉ. सुनील तनेजा और डॉ. स्वप्नेश साहू के साथ पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम शामिल रही। अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय राकेश ने मृतक डोनर परिवार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दुख बेहद बड़ा होता है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भी परिवार ने किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन देने का फैसला किया। उनके इस निर्णय से राकेश को नई जिंदगी मिली है। वह इस एहसान को कभी नहीं भूलेंगे।
प्रो. एल. कमान ने कहा कि राकेश का स्वस्थ होकर घर लौटना पूरी टीम के लिए संतोष की बात है। हर मृतक डोनर ट्रांसप्लांट के पीछे एक ऐसा परिवार होता है, जो दुख के बीच भी अंगदान जैसा बड़ा फैसला लेता है। वहीं, डॉ. स्वप्नेश साहू ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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चंडीगढ़। ‘आपने मुझे नई जिंदगी दी है, आपका यह योगदान मैं जिंदगी भर याद रखूंगा।’ हिमाचल प्रदेश पुलिस में तैनात राकेश के ने डोनर परिवार का दिल से शुक्रिया किया। करीब दो साल तक लिवर मिलने का इंतजार करने के बाद पीजीआई में उनका सफल ट्रांसप्लांट किया गया। स्वास्थ्य में सुधार होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और अब वह अपने परिवार के पास लौट गए हैं।
राकेश लंबे समय से लिवर ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे थे। पीजीआई के जनरल सर्जरी और हेपेटोलॉजी विभाग की टीम ने यह प्रत्यारोपण किया। इसमें प्रो. एल. कमान, डॉ. सुनील तनेजा और डॉ. स्वप्नेश साहू के साथ पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम शामिल रही। अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय राकेश ने मृतक डोनर परिवार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि अपनों को खोने का दुख बेहद बड़ा होता है, लेकिन इस मुश्किल घड़ी में भी परिवार ने किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन देने का फैसला किया। उनके इस निर्णय से राकेश को नई जिंदगी मिली है। वह इस एहसान को कभी नहीं भूलेंगे।
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प्रो. एल. कमान ने कहा कि राकेश का स्वस्थ होकर घर लौटना पूरी टीम के लिए संतोष की बात है। हर मृतक डोनर ट्रांसप्लांट के पीछे एक ऐसा परिवार होता है, जो दुख के बीच भी अंगदान जैसा बड़ा फैसला लेता है। वहीं, डॉ. स्वप्नेश साहू ने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
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