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'योगी का काम सिर्फ दिखावा, 1 लाख का कर्ज माफ करने से फायदा क्या?'
अतुल सिन्हा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 09 Apr 2017 09:11 AM IST
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जनता की शिकायतें सुनते सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
- फोटो : File Photo
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एक लाख रुपये माफ करने का ऐलान कर देने से क्या होता है, इससे जो बाकी बचे कर्ज़ हैं, उनका ब्याज जोड़ लीजिए तो फिर उतना ही हो जाएगा। ये कहना है पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का। उत्तर प्रदेश में योगी जिस तरह काम कर रहे हैं, उसे कैप्टन सिर्फ दिखावा मानते हैं।
कहते हैं, किसानों के कर्ज़ माफ करना था तो पूरा माफ करते। मोदी किस तरह संघ के इशारे पर काम करते हैं, इसका यूपी से बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है। कांग्रेस कभी धर्म और बांटने की राजनीति नहीं कर सकती। कैप्टन अमरिंदर सिंह नए आत्मविश्वास से भरे हैं।
संपादकों के साथ अनौपचारिक मुलाकात के दौरान तमाम मुद्दों पर उनके भीतर की बेचैनी भी साफ दिखी। वे चाहते हैं कि ये जो पांच साल उन्हें मिले हैं, इस दौरान वे पंजाब की तस्वीर तो बदलें ही, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी को भी नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाएं।
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चाहे मुद्दा एसवाईएल का हो या पंजाब के विकास का, कांग्रेस में नेतृत्व संकट का हो या फिर मोदी-योगी के कामकाज की रफ्तार का, कैप्टन का नज़रिया बहुत साफ है। कर्ज़ में डूबे और चौपट हो चुके उद्योग धंधों वाले इस सूबे में निवेश के लिए औद्योगिक घरानों को फिर से लाने की कोशिशों में वो लग गए हैं।
फिलहाल पंजाब में चार बड़े औद्योगिक समूह निवेश करने के लिए आगे आए हैं और अमरिंदर सोमवार को मुंबई में कई और उद्योगपतियों से मिलकर पंजाब आने का न्यौता देने वाले हैं।
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कहते हैं, किसानों के कर्ज़ माफ करना था तो पूरा माफ करते। मोदी किस तरह संघ के इशारे पर काम करते हैं, इसका यूपी से बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है। कांग्रेस कभी धर्म और बांटने की राजनीति नहीं कर सकती। कैप्टन अमरिंदर सिंह नए आत्मविश्वास से भरे हैं।
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संपादकों के साथ अनौपचारिक मुलाकात के दौरान तमाम मुद्दों पर उनके भीतर की बेचैनी भी साफ दिखी। वे चाहते हैं कि ये जो पांच साल उन्हें मिले हैं, इस दौरान वे पंजाब की तस्वीर तो बदलें ही, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी को भी नया जीवन देने में अहम भूमिका निभाएं।
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चाहे मुद्दा एसवाईएल का हो या पंजाब के विकास का, कांग्रेस में नेतृत्व संकट का हो या फिर मोदी-योगी के कामकाज की रफ्तार का, कैप्टन का नज़रिया बहुत साफ है। कर्ज़ में डूबे और चौपट हो चुके उद्योग धंधों वाले इस सूबे में निवेश के लिए औद्योगिक घरानों को फिर से लाने की कोशिशों में वो लग गए हैं।
फिलहाल पंजाब में चार बड़े औद्योगिक समूह निवेश करने के लिए आगे आए हैं और अमरिंदर सोमवार को मुंबई में कई और उद्योगपतियों से मिलकर पंजाब आने का न्यौता देने वाले हैं।
Captain amarinder singh
- फोटो : अमर उजाला
कैप्टन मानते हैं कि एसवाईएल का मुद्दा बड़ा है और इसका राष्ट्रीय स्तर पर समाधान होना चाहिए। राजनीतिक तौर पर इस मसले का हल संभव नहीं है। इसके लिए केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को ठीक से पड़ताल करनी चाहिए और ज़मीनी हकीकत को देखते हुए कोई फैसला करना चाहिए।
पंजाब-हरियाणा में पानी के बंटवारे को लेकर जो विवाद है, इसे 1966 में हुए दोनों राज्यों के बंटवारे से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए जिसके तहत सूबे को 60 और 40 के अनुपात में बांटा गया था।
फिर राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगी कांग्रेस
कैप्टन को लगता है कि पंजाब में मिली अप्रत्याशित जीत के बाद कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर फिर से जी उठेगी। वक्त ज़रूर लगेगा, लेकिन राजनीति में ये उतार चढ़ाव आते जाते रहते हैं। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व के संकट से कहीं न कहीं वे भी असमंजस में हैं और बार बार सोनिया गांधी की खराब सेहत उन्हें परेशान करती हुई दिखती है।
पंजाब-हरियाणा में पानी के बंटवारे को लेकर जो विवाद है, इसे 1966 में हुए दोनों राज्यों के बंटवारे से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए जिसके तहत सूबे को 60 और 40 के अनुपात में बांटा गया था।
फिर राष्ट्रीय स्तर पर चमकेगी कांग्रेस
कैप्टन को लगता है कि पंजाब में मिली अप्रत्याशित जीत के बाद कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर फिर से जी उठेगी। वक्त ज़रूर लगेगा, लेकिन राजनीति में ये उतार चढ़ाव आते जाते रहते हैं। पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व के संकट से कहीं न कहीं वे भी असमंजस में हैं और बार बार सोनिया गांधी की खराब सेहत उन्हें परेशान करती हुई दिखती है।
राहुल- प्रियंका मिलकर करें काम
Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
राहुल- प्रियंका मिलकर करें काम
राहुल गांधी के बारे में वो खुलकर राय देने से बचते हैं, लेकिन ये ज़रूर कहते हैं कि अगर राहुल और प्रियंका मिलकर काम करें तो पार्टी की हालत सुधर सकती है। अपने पुराने दौर को याद करते हैं और आज की राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए वे वक्त का इंतज़ार करने की बात भी करते हैं।
पंजाब कैप्टन की प्राथमिकता
एक सवाल ये भी आता है कि क्या वो खुद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की बागडोर संभाल सकते हैं, इसके जवाब में वो यही कहकर टाल जाते हैं कि वैसे भी ये उनकी आखिरी पारी है, उम्र हो चुकी है, फिलहाल पंजाब उनकी प्राथमिकता है।
केंद्र के रवैये से खुश
लेकिन पंजाब के लिए केंद्र का सहयोगी रवैया कैप्टन के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। वे मोदी और जेटली से अपनी मुलाकात से खुश हैं। उन्हें लगता है कि पंजाब जिस तरह पिछड़ गया है और यहां की अर्थव्यवस्था जिस कदर खस्ता हो गई है, उसे वे जल्दी से जल्दी पटरी पर ले आएंगे।
राहुल गांधी के बारे में वो खुलकर राय देने से बचते हैं, लेकिन ये ज़रूर कहते हैं कि अगर राहुल और प्रियंका मिलकर काम करें तो पार्टी की हालत सुधर सकती है। अपने पुराने दौर को याद करते हैं और आज की राजनीतिक स्थितियों को देखते हुए वे वक्त का इंतज़ार करने की बात भी करते हैं।
पंजाब कैप्टन की प्राथमिकता
एक सवाल ये भी आता है कि क्या वो खुद राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की बागडोर संभाल सकते हैं, इसके जवाब में वो यही कहकर टाल जाते हैं कि वैसे भी ये उनकी आखिरी पारी है, उम्र हो चुकी है, फिलहाल पंजाब उनकी प्राथमिकता है।
केंद्र के रवैये से खुश
लेकिन पंजाब के लिए केंद्र का सहयोगी रवैया कैप्टन के लिए उत्साह बढ़ाने वाला है। वे मोदी और जेटली से अपनी मुलाकात से खुश हैं। उन्हें लगता है कि पंजाब जिस तरह पिछड़ गया है और यहां की अर्थव्यवस्था जिस कदर खस्ता हो गई है, उसे वे जल्दी से जल्दी पटरी पर ले आएंगे।