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रियो ओलंपिक से बाहर हुए योगेश्वर दत्त, नहीं मिला 'रेपचेज' खेलने का मौका

Mon, 22 Aug 2016 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 22 Aug 2016 02:07 AM IST
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yogeshwar dutt loses mens freestyle qualifier in rio olympics
योगेश्वर दत्त - फोटो : pti
भारतीय पहलवान योगेश्वर दत्त रियो ओलंपिक के आखिरी दिन रविवार को पहले दौर में हारकर बाहर हो गए। रियो ओलंपिक में भारत की आखिरी उम्मीद योगेश्वर को मौजूदा एशियाई चैंपियन मंगोलियाई पहलवान मंदाखनारान गैंजोरिग ने 3-0 से हराया। बता दें कि योगेश्वर दत्त क्वालिफिकेशन राउंड में ही हार कर बाहर हो गए। हालांकि योगेश्वर के पास एक मौका रेपचेज के रूप में था लेकिन मंगोलियाई खिलाड़ी के क्वार्टर फाइनल में हारने के बाद यह उम्मीद भी टूट गई।
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योगेश्वर दत्त ने ऐसे गवांया मैच
पहले पीरियड में योगेश्वर को चेतावनी मिली, जिसके बाद गैंजोरिग की जेब में एक अंक चले गए। दूसरे पीरियड में योगेश्वर ने अच्छा दांव खेला, लेकिन गैंजोरिग ने उनके दांव को पलटते हुए दो अंक हासिल कर लिए।
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योगेश्वर इसके बाद लाख कोशिशों के बावजूद कोई अंक हासिल नहीं कर सके और पहले राउंड से ही रियो ओलंपिक से बाहर हो गए।  मुकाबले से गैंजोरिग को तीन क्लासिफिकेशन पॉइंट भी मिले, जबकि योगेश्वर को कोई अंक नहीं मिला. योगेश्वर की हार के साथ रियो में भारतीय कुश्ती दल का अभियान साक्षी मलिक के एकमात्र कांस्य पदक के साथ समाप्त हो गया।
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लंबे समय तक रहे हैं चोटिल

yogeshwar dutt loses mens freestyle qualifier in rio olympics
योगेश्वर दत्त - फोटो : getty
योगेश्वर दत्त को कुश्ती के गुर स्वर्गीय मास्टर सतबीर भैंसवालिया ने सिखाए थे। सतबीर पेशे से पीटीआई थे और रिटायर होने के बाद वह अखाड़ा चलाने लगे थे। योगेश्वर दत्त को अपने करियर को दौरान कई बार चोट लगी है। वास्तव में वह बचपन से ही चोट का शिकार रहे हैं, लेकिन उन्होंने कुश्ती के प्रति अपने लगाव को कम नहीं होने दिया।

उन्होंने 8 साल की उम्र से ही कुश्ती से नाता जोड़ लिया था और अब उनकी सफलता से तो हर कोई परिचित ही है। सोनीपत, हरियाणा के योगेश्वर ने अपनी तैयारी किसी और के साथ नहीं बल्कि वर्ल्ड चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में मेडल विजेता रहे बजरंग के साथ की है।

बीजिंग में हुए थे फेल

yogeshwar dutt loses mens freestyle qualifier in rio olympics
योेगेश्वर दत्त - फोटो : getty
योगी ने सबसे पहले 2008 के बीजिंग ओलिंपिक में भी भाग लिया था, लेकिन वह क्वार्टरफाइनल में हारकर बाहर हो गए थे। इसकी भरपाई उन्होंने लंदन ओलिंपिक, 2012 में की और 60 किग्रा भार वर्ग में ब्रॉन्ज जीता। उनके नाम एशियाई खेलों में मेडल हैं।

उन्होंने इंचियोन, 2014 में 65 किग्रा भार वर्ग में एशियाई खेलों में गोल्ड जीता था। इससे पहले वह दोहा एशियाई खेल, 2006 में 60 किलो भार वर्ग में ब्रॉन्ज जीत चुके थे। कॉमनवेल्थ खेलों में योगेश्वर के रिकॉर्ड का भारत में कोई सानी नहीं है। उन्होंने दिल्ली कॉमनवेल्थ खेल, 2010 और ग्लास्गो कॉमनवेल्थ खेल, 2014 में गोल्ड जीता था। योगेश्वर की उलब्धियों को देखते हुए उन्हें 2012 में राजीव गांधी खेल रत्न भी मिल चुका है।
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