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टोक्यो पैरालंपिक: आठ साल की उम्र में मारा लकवा, अब योगेश कथुनिया ने रचा इतिहास, डिस्कस थ्रो में जीता रजत पदक

Mon, 30 Aug 2021 07:53 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Mon, 30 Aug 2021 07:53 PM IST
सार

डिस्कस थ्रो में टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतकर हरियाणा के बहादुरगढ़ के योगेश कथुनिया ने इतिहास रच दिया। योगेश के परिजन और पड़ोसियों ने जीत की खुशी जमकर मनाई। मां ने कहा कि घर लौटने पर बेटे को उसकी पसंद की रसमलाई और दाल चूरमा खिलाऊंगी।  

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Yogesh Kathuniya wins silver medal in discus throw in Tokyo Paralympics 2020
योगेश कथुनिया की जीत की खुशी मनाते परिजन व पड़ोसी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मात्र आठ वर्ष की आयु में ही हाथ और पांवों से लकवाग्रस्त होने के कारण ढंग से चलने-फिरने में लाचार हुए बहादुरगढ़ के योगेश कथुनिया ने टोक्यो पैरालंपिक में डिस्कस थ्रो में रजत पदक जीतकर साबित कर दिया है कि संकल्प हो तो क्या नहीं हो सकता। कथुनिया परिवार बहादुरगढ़ में राधा कालोनी में रहता है। सोमवार सुबह परिवार के सभी लोग टीवी पर मैच देख रहे थे। जैसे ही योगेश को रजत मिला लड्डू बांटे गए। वहीं परिजन ढोल की थाप पर नाचे। 

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मांडोठी है योगेश का गांव
डिस्कस थ्रोअर (श्रेणी एफ-56 में) योगेश कथुनिया का परिवार मूलत: उसी गांव मांडोठी से है जिसने देश को सोनू और धर्मेंद्र जैसे बड़े पहलवान दिए हैं। काफी समय से यह परिवार बहादुरगढ़ में रहता है। सोमवार सुबह योगेश का परिणाम सुनते ही चाचा प्रेमचंद खुशी से उछल पड़े। 
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वयोवृद्ध दादा-दादी के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। बुआ-बहनों से लेकर हर कोई रिश्तेदार, परिचित व खेल प्रशंसक खुश नजर आया। ढोल की थाप पर परिवार के सभी सदस्यों ने घर के बाहर गली में डांस करके खुशी का इजहार किया। योगेश की मां मीना ने बताया कि घर लौटने पर बेटे को उसकी मनपसंद रसमलाई और दाल चूरमा खिलाऊंगी। 

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पदक लाने की थी उम्मीद 

टोक्यो पैरालिंपिक में योगेश से परिजनों को पदक लाने की उम्मीद थी। जन्माष्टमी के दिन सुबह जब उनके इवेंट्स हुए तो दादा सूबेदार हुकमचंद, दादी सावित्री देवी, पिता ऑनरेरी कैप्टन ज्ञानचंद, चाचा प्रेमचंद, कर्मबीर, संदीप, संजीव, अमित, सुमित, बड़ी बहन पूजा, फूफा सुभाष व नरेश के अलावा आसपास के लोग टीवी के आगे मैच देखने बैठ गए थे। 

पिता ज्ञानचंद व मां मीना देवी ने बताया कि 24 अगस्त को जब योगेश को टोक्यो पैरालंपिक में हिस्सा लेने के लिए वे एयरपोर्ट पर  छोड़ने गए तो उसने एक ही वादा किया था कि वह देश के लिए मेडल लेकर ही लौटेगा। अपने गांव मांडोठी का नाम देश-दुनिया में चमकाएगा। योगेश ने जन्माष्टमी के दिन देशवासियों को बड़ी खुशी दी और तिरंगा का भी मान खूब बढ़ाया।

ये हैं उपलब्धियां

  • वर्ष 2018 में पंचकूला में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
  • 2018 में बर्लिन में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स में डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
  • 2018 में इंडोनेशिया में हुए एशियन पैरा गेम्स में चौथा स्थान पाया
  • 2019 में फरीदाबाद में हुई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता
  • 2019 में पेरिस में हुई ओपन ग्रेंडप्रिक्स डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक जीता
  • 2019 में दुबई में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता
  • 2021 में बंगलूरू में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता के डिस्कस थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया
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