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वरिष्ठ कवि मनमोहन ने वापस लौटाया साहित्य सम्मान
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Fri, 16 Oct 2015 11:45 PM IST
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कवियों व साहित्यकारों के सम्मान वापस लौटाने के सिलसिले में रोहतक का नाम भी जुड़ गया है। शहर के सेक्टर 1 में रहने वाले वरिष्ठ कवि मनमोहन ने मौजूदा हालात के विरोध में हरियाणा साहित्य अकादमी से मिला सम्मान लौटा दिया है।
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एमडीयू के हिंदी विभाग में प्रोफेसर रहे मनमोहन को 2007-08 में महाकवि सूरदास सम्मान से नवाजा गया था। अब उन्होंने अकादमी के निदेशक को सम्मान वापस लौटाने का पत्र लिखते हुए उसके साथ एक लाख रुपये का चैक, स्मृति चिह्न और प्रशस्ति पत्र वापस भेज दिया है।
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मथुरा में जन्म लेने वाले मनमोहन की शिक्षा जेएनयू में हुई और वे एमडीयू रोहतक के हिंदी विभाग में प्रोफेसर रहे। 2013 में वे सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक को पुरस्कार लौटाने संबंधी एक पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि देश में असहमति के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को हिंसक तरीके से दबाने का चलन तेज हो गया है।
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सांप्रदायिक ध्रुवीकरण, नफरत, असुरक्षा और हिंसा का माहौल पैदा हो रहा है। बुद्धिजीवियों और लेखकों की हत्या की जा रही है। ऐसा करने वालों को संवैधानिक पदों पर बैठे लोग या राजनेता लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस कारण ही मैं अपना सम्मान वापस लौटा रहा हूं।
इस पत्र के साथ ही एक लाख रुपये का चैक, स्मृति चिह्न, प्रशस्ति पत्र, शॉल भी वापस भेज दिया गया है। उस सम्मान के साथ मिली एक लाख रुपये की धनराशि उसी समय वैचारिक नव जागरण मूल्यों के लिए काम कर रही स्वैच्छिक सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था की ज्ञान-विज्ञान समिति को भेंट कर दी गई थी।
इस कारण ही मैंने अब अपनी ओर से चैक दिया है। मनमोहन ने बताया कि आपात काल के दौरान मैं जेएनयू का छात्र था और उस समय भी आपात काल के विरोध में लिखी मेरी कई कविताएं बेहद चर्चित हुईं थीं। हरियाणा में नवजागरण आंदोलन में भी प्रभावी नेतृत्वकारी उपस्थिति रही है।