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हुडा की प्लाट आवंटन पॉलिसी को हाइकोर्ट में चुनौती
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 23 Jan 2014 04:29 PM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और हरियाणा अर्बन डिवेल्पमेंट अथॉरिटी(हुडा) को निर्देश जारी किए हैं कि हुडा के प्लाटों में विकलांगों के लिए तैयार नीति के संबंध में लोगों की आपत्तियों का टाइम बाउंड के तहत समाधान निकाला जाए।
चंडीगढ़ निवासी एनएस भिंडर द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में इस पॉलिसी को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि 11 जून 2009 को हुडा द्वारा जारी पॉलिसी से हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ है।
याचिका में इस पॉलिसी को रद करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित ने हरियाणा सरकार और हुडा को निर्देश जारी कर याचिका का निपटारा कर दिया।
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याचिका में कहा गया है कि जब हरियाणा सरकार ने राज्य विकलांगों के लिए (सामान अधिकार, सामान अवसर और पूरी पार्टिसिपेशन) एक्ट 1995 के तहत जमीन अलाटमेंट के लिए विशेष पॉलिसी फ्रेम की गई है।
इस स्थिति में हुडा द्वारा 11 जून 2009 को पत्र जारी कर नए सिरे से पॉलिसी निर्धारित करने की जरूरत नहीं है। याचिका में कहा गया है कि जून में जारी इस सूचि में हुडा ने प्रावधान किया है कि 70 फीसदी से ऊपर के विकलांग ही प्लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही विकलांगता दस साल से ऊपर होनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि यह पॉलिसी पूरी तरह गैर कानूनी है। याचिका में हाईकोर्ट के एक मामले में जारी दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।
हाईकोर्ट ने 21 जनवरी 2009 को हैंडी कैपड वेल्फेयर सोसायटी, पंचकूला बनाम हरियाणा सरकार के एक मामले में निर्देश जारी किए थे कि जिसमें विकलांगों के लिए सरकारी जमीन में विकलांगों के प्लाट आवंटन के लिए विशेष पॉलिसी फ्रेम करने के निर्देश जारी किए थे।
याचिका में हाया गया है कि हड्डियों में रोग से अपंगता(लोकोमोटर) से विकलांग लोगों को हुडा ने अपनी पॉलिसी में जगह ही नहीं दी, जिससे (सामान अधिकार, सामान अवसर और पूरी पार्टिसिपेशन) एक्ट 1995 के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन हुआ है।
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चंडीगढ़ निवासी एनएस भिंडर द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल की गई जनहित याचिका में इस पॉलिसी को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि 11 जून 2009 को हुडा द्वारा जारी पॉलिसी से हाईकोर्ट द्वारा जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन हुआ है।
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याचिका में इस पॉलिसी को रद करने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया है। वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित ने हरियाणा सरकार और हुडा को निर्देश जारी कर याचिका का निपटारा कर दिया।
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याचिका में कहा गया है कि जब हरियाणा सरकार ने राज्य विकलांगों के लिए (सामान अधिकार, सामान अवसर और पूरी पार्टिसिपेशन) एक्ट 1995 के तहत जमीन अलाटमेंट के लिए विशेष पॉलिसी फ्रेम की गई है।
इस स्थिति में हुडा द्वारा 11 जून 2009 को पत्र जारी कर नए सिरे से पॉलिसी निर्धारित करने की जरूरत नहीं है। याचिका में कहा गया है कि जून में जारी इस सूचि में हुडा ने प्रावधान किया है कि 70 फीसदी से ऊपर के विकलांग ही प्लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही विकलांगता दस साल से ऊपर होनी चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि यह पॉलिसी पूरी तरह गैर कानूनी है। याचिका में हाईकोर्ट के एक मामले में जारी दिशा निर्देशों का भी हवाला दिया गया है।
हाईकोर्ट ने 21 जनवरी 2009 को हैंडी कैपड वेल्फेयर सोसायटी, पंचकूला बनाम हरियाणा सरकार के एक मामले में निर्देश जारी किए थे कि जिसमें विकलांगों के लिए सरकारी जमीन में विकलांगों के प्लाट आवंटन के लिए विशेष पॉलिसी फ्रेम करने के निर्देश जारी किए थे।
याचिका में हाया गया है कि हड्डियों में रोग से अपंगता(लोकोमोटर) से विकलांग लोगों को हुडा ने अपनी पॉलिसी में जगह ही नहीं दी, जिससे (सामान अधिकार, सामान अवसर और पूरी पार्टिसिपेशन) एक्ट 1995 के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन हुआ है।