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Hindi News ›   Chandigarh ›   Wrestlers are given free training in this Akhara of Chandigarh

अमर उजाला विशेष: इस देसी अखाड़े से निकल रहे राष्ट्रीय पहलवान, निशुल्क मिलता है प्रशिक्षण, सुखना लेक के पीछे है बना

Mon, 28 Feb 2022 03:25 PM IST
ajay kumar संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संजीव पंगोत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 28 Feb 2022 03:25 PM IST
सार

राष्ट्रीय स्तर के पदक विजेता मक्खन ने बताया कि पहलवानी की असली शुरुआत तो मिट्टी के अखाड़े से ही होती हैं। यहीं से इस खेल की बारीकियां सीखने को मिलती हैं। 

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Wrestlers are given free training in this Akhara of Chandigarh
अभ्यास करते पहलवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ में एकमात्र मिट्टी का एक ऐसा अखाड़ा है जहां पर आज भी पुराने तरीके से पहलवानी की जाती है। वर्षों पुराने अखाड़े में रोजाना युवा पहलवान इकट्ठा होकर अभ्यास करते हैं। पहलवानों का इस मिट्टी के अखाड़े से दंगल तक का सफर शुरू होता है। सुखना लेक के पीछे बने इस अखाड़े से हर साल राष्ट्रीय स्तर के पहलवान निकलते हैं और पदक जीतकर शहर का नाम रोशन करते हैं। 

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निशुल्क दी जाती है ट्रेनिंग 
राजा पहलवान इस अखाड़े के प्रमुख कोच हैं। उन्होंने बताया कि यहां पर कोई भी पहलवानी के गुर सीख सकता है। हर किसी को यहां पर निशुल्क कोचिंग दी जाती है। यहां पर मिट्टी के अखाड़े में लड़के और लड़कियां ट्रेनिंग करते हैं। इसके बाद रस्सी पर ऊंचाई पर उन्हें चढ़ने की ट्रेनिंग दी जाती है। कड़ी मेहनत के बाद सभी को दूध-बादाम के साथ देसी खुद तैयार की हुई खुराक भी दी जाती हैं। रोजाना 30 से अधिक खिलाड़ी यहां अभ्यास करते हैं। 
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अखाड़े से दंगल तक का सफर  
राजा पहलवान ने बताया कि ट्रेनिंग के बाद पहलवान पास के एरिया में लगने वाले दंगलों में हिस्सा लेता है। दंगल में पहलवानी करते हुए विजेता बनने पर इन्हें इनाम के रूप में रुपयों की माला दी जाती है। साथ ही इन्हें पूरा मान सम्मान भी मिलता है। 
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अब मेट पर होती हैं प्रतियोगिताएं  
नेशनल लेवल के मेडलिस्ट खिलाड़ी वीशू ने बताया कि आज के समय में पहलवानी को कुश्ती का नाम भी मिल चुका है। अब यह मेट पर खेली जाती है। शुरुआत में हमारी मिट्टी के अखाड़े से होती है लेकिन अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कुश्ती मेट पर खेली जाती है। इसलिए अब मेट पर भी अभ्यास करते हैं।

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